आज के बच्चों में अच्छे संस्कार कैसे जगाएं? प्रेमानंद जी महाराज से जानिए
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होम जीवनशैली

आज के बच्चों में अच्छे संस्कार कैसे जगाएं? प्रेमानंद जी महाराज से जानिए

आध्यात्मिक शिक्षा के अभाव में बच्चों में विनम्रता की भावना दिन-प्रतिदिन कम होती जा रही है। आज के बच्चे, चाहे जितने भी पढ़े-लिखे हों, विनय से दूर होते जा रहे हैं।

Written byMahak SinghMahak Singh
Sep 18, 2025, 12:32 pm IST
in जीवनशैली
प्रेमानंद जी महाराज

प्रेमानंद जी महाराज

प्रेमानंद जी महाराज ने कहा किआज की पढ़ाई में आधुनिकता तो है लेकिन आध्यात्मिकता नहीं है। आध्यात्मिक शिक्षा के अभाव में बच्चों में विनम्रता की भावना दिन-प्रतिदिन कम होती जा रही है। आज के बच्चे, चाहे जितने भी पढ़े-लिखे हों, विनय से दूर होते जा रहे हैं। विडंबना यह है कि जितना कोई उच्च शिक्षा प्राप्त कर लेता है, उतना ही उसमें अहंकार आ जाता है। जबकि होना यह चाहिए कि जितना अधिक कोई शिक्षित हो, उतना ही अधिक वह सरल, विनम्र और सभ्य हो।

एक पढ़े-लिखे व्यक्ति की पहचान उसके व्यवहार से होनी चाहिए, जैसे- वह किसी बस या गाड़ी में बैठा हो और कोई बुज़ुर्ग व्यक्ति खड़ा हो, तो वह तुरंत कहे-“दादाजी, आइए आप बैठ जाइए, मैं खड़ा रह सकता हूँ।” ऐसे व्यवहार से लगे कि वह सच में पढ़ा-लिखा और संस्कारी है। आज की स्थिति यह है कि पढ़े-लिखे लोग तो बहुत हैं लेकिन उनमें से अधिकतर में न तो विनय बचा है और न ही सभ्यता। इसका मूल कारण यही है कि शिक्षा में आध्यात्मिकता नहीं है। मेरा मानना है कि इस स्थिति को आध्यात्मिक शिक्षा ही सुधार सकती है। बच्चे तो मासूम होते हैं, उन्हें स्वयं यह समझ नहीं होती कि उनके लिए क्या अच्छा है। उनके कल्याण के लिए हमें प्रयास करने होंगे — हम यदि उनके लिए नामजप करें, तो अवश्य ही परिवर्तन होगा।

यह भी पढ़ें- https://panchjanya.com/2025/09/11/434685/lifestyle/premananda-ji-maharaj-what-to-do-if-people-are-not-happy-even-after-performing-the-duty/

अगर हम बच्चों को प्यार और स्नेह से समझाएं, जैसे- “आओ बेटा, 10 मिनट ‘राधा-राधा’ बोलो, भगवान का नाम लो, फिर हम तुम्हारे लिए विशेष भोग बनाएंगे।” तो वे धीरे-धीरे नामजप में रुचि लेने लगते हैं। शुरू में हो सकता है कि वे एक-दो दिन करें फिर हफ्ते भर छोड़ दें लेकिन अगर वे सप्ताह में एक दिन भी करने लगें, तो वह एक शुरुआत होगी। धीरे-धीरे वे नामजप और भजन में रुचि लेने लगेंगे। कई जगह बच्चों को खेल-खेल में भजन कराया जाता है, जैसे- “जब तक ‘राधा-राधा’ नहीं बोलोगे, तब तक प्रसाद नहीं मिलेगा।” फिर बच्चे खेल-खेल में ही नाम जपते हैं- “राधा-राधा, राधा-राधा…”और यह नामजप उनके मन में उतरने लगता है। फिर जब वे भजन, कथा, संतवाणी सुनने बैठते हैं, तो धीरे-धीरे उनके संस्कार बदलते हैं। जैसे अर्जुन ने गर्भस्थ अभिमन्यु को चक्रव्यूह भेदन की शिक्षा दी थी, वैसे ही यदि हम भी गर्भस्थ या छोटे बच्चों को भगवान की कथाएँ, भजन व नाम सुनाएँगे, तो उनके भाव बदलेंगे, संस्कार सुधरेंगे, और उनका जीवन भी आध्यात्मिक दिशा में अग्रसर होगा।

Topics: प्रेमानंद जी महाराजPremanand Ji Maharajप्रेमानंद जी महाराज प्रवचनbhajan margpremanand ji maharaj vaniPremanand Ji Maharaj Ke Vichaarpremanand ji maharaj vrindavan
Mahak Singh
Mahak Singh
2022 में ज़ी न्यूज़ से पत्रकारिता की शुरुआत की। उसके बाद न्यूज़ नेशन, दैनिक जागरण और न्यूज़ 24 जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में कार्य करते हुए पत्रकारिता के विभिन्न आयामों का अनुभव प्राप्त किया। वर्तमान में पाञ्चजन्य में सब एडिटर के रूप में कार्यरत हूं। ज़िमा ज़ी इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया आर्ट्स से मैने पत्रकारिता की है। [Read more]
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