एक युवक ने प्रेमानंद जी महाराज से पूछा, “महाराज जी, मेरी कुछ परीक्षाएं ठीक नहीं हुईं। मैं असफल हो गया हूँ। अब मेरा मन बहुत दुखी और बेचैन रहता है। लगता है कि मेरे दोस्त मुझसे आगे निकलते जा रहे हैं, और मैं पीछे छूट रहा हूँ। मन में डर बैठ गया है कि अगर अगली बार भी सफल न हुआ तो मेरा क्या होगा? कृपया मुझे मार्ग दिखाइए।”
महाराज जी बहुत प्रेम और स्नेह से मुस्कराए और बोले, बिल्कुल, जीवन के इस मोड़ पर ऐसी सोच आना स्वाभाविक है। लेकिन बेटा, सबसे पहले तो यह समझो कि असफलता कोई अंत नहीं है। यह तो सिर्फ एक सीख है, जो तुम्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है। उन्होंने समझाया जब कोई छात्र पूरी एकाग्रता और समर्पण से पढ़ाई करता है, तो वह असफल नहीं होता। अगर तुम्हें लग रहा है कि तुमने मेहनत की थी फिर भी असफल हो गए, तो आत्ममंथन करो। कहीं न कहीं ध्यान भटक रहा होगा, या शायद पढ़ाई में गहराई से नहीं उतर पाए। महाराज जी ने एक उदाहरण दिया, हमने बहुत से ग्रंथ पढ़े हैं, और कई वर्षों पहले जो पढ़ा, वह आज भी याद है। क्यों? क्योंकि हमने उसे सिर्फ रटने के लिए नहीं, बल्कि समझने और आत्मसात करने के लिए पढ़ा। अगर कोई आज भी हमसे किसी पुरानी बात के बारे में पूछे, तो हम 10 मिनट में उसकी पूरी व्याख्या कर सकते हैं। यह तब संभव होता है जब अध्ययन पूरी श्रद्धा और एकाग्रता से किया जाए।
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फिर वे बोले अगर तुम लगातार प्रयास कर रहे हो, अपने विषय पर ध्यान दे रहे हो, फिर भी असफल हो रहे हो तो दो ही कारण हो सकते हैं। या तो पढ़ाई में मन नहीं लग रहा है, या फिर जीवन में संयम की कमी आ गई है। कहीं इधर-उधर का प्रपंच, ज्यादा मनोरंजन, या ब्रह्मचर्य से विचलन तो नहीं हो रहा? ये सब चीजें मन को भटकाती हैं और एकाग्रता को तोड़ती हैं। महाराज जी ने बहुत सरल भाषा में समझाया, “हम किसी एक पाठ को याद करने के लिए एक साल का समय पाते हैं। अगर हम पूरे मन से पढ़ें, तो वह पाठ तो कंठस्थ हो ही जाएगा। ऐसे में अगर कोई असफल होता है, तो इसका मतलब है कि मेहनत में कहीं न कहीं कमी रह गई है।”
उन्होंने एक बहुत प्रेरणादायक बात कही, “असफलता मिलना कोई दुर्भाग्य नहीं है। यह तो सफलता का पहला संकेत है। जब हम असफल होते हैं, तो हमें और ज्यादा जोश के साथ आगे बढ़ना चाहिए। यही सोच होनी चाहिए कि अगली बार मैं और बेहतर करूंगा।” अंत में प्रेमानंद जी ने कहा, यदि तुम ब्रह्मचर्य से रहो, पूरी निष्ठा और अनुशासन के साथ पढ़ाई करो, भगवान का नाम जप करो, माता-पिता की सेवा और आशीर्वाद लो तो जीवन में असफलता का कोई स्थान नहीं रहेगा। तुम्हारी सफलता निश्चित है।














