अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत के लिए राजदूत के तौर पर नामित किए गए सर्जियो गोर ने बड़ी बातें कही हैं। उन्होंने दावा किया है कि अमेरिका भारत के साथ बातचीत कर रहा है और जल्द ही दोनों देशों के बीच व्यापार सौदा हो सकता है। गोर ने कहा कि वॉशिंगटन और नई दिल्ली के बीच ज्यादा मतभेद नहीं बचे हैं, और ये रिश्ता अमेरिका के लिए दुनिया में सबसे अहम साझेदारियों में से एक है। ये बयान ऐसे समय में आया है जब हाल के हफ्तों में दोनों देशों के बीच तनाव की खबरें सुर्खियां बटोर रही थीं।
भारत को रणनीतिक साझेदार बताया
सर्जियो गोर अभी राष्ट्रपति के सहायक और प्रेसिडेंशियल पर्सनल के डायरेक्टर हैं। उन्होंने गुरुवार को सीनेट की फॉरेन रिलेशंस कमिटी के सामने लंबी सुनवाई के दौरान भारत की तारीफों के पुल बांधे। उन्होंने कई बार कहा कि भारत अमेरिका का “रणनीतिक साझेदार” है और “क्षेत्रीय स्थिरता का आधार”। गोर ने ये भी बताया कि ट्रंप ने भारतीय प्रतिनिधिमंडल को अगले हफ्ते वॉशिंगटन बुलाया है, जहां बातचीत हो सकती है जो कुछ ही हफ्तों में व्यापार सौदे को अंतिम रूप दे दे।
उन्होंने बयाने में गोर ने कहा, “हम अभी भारतीयों के साथ सक्रिय रूप से बातचीत कर रहे हैं। राष्ट्रपति ने उनके वाणिज्य और व्यापार मंत्री को अगले हफ्ते आने का न्योता दिया है। हम अभी सौदे पर ज्यादा दूर नहीं हैं। बल्कि, वे सौदे के बारीक विवरणों पर मोलभाव कर रहे हैं।” ये बातें सुनकर लगता है कि बात अब आखिरी चरण में पहुंच गई है, जहां छोटी-मोटी बातें सुलझानी बाकी हैं। गोर की ये सकारात्मक टिप्पणियां एक बड़े बदलाव का संकेत दे रही हैं, क्योंकि पहले के हफ्तों में अमेरिकी अधिकारियों के बयानों से माहौल काफी तनावपूर्ण था।
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रूस-चीन के साथ भारत की नजदीकी पर सवाल
अमेरिका के नरम पड़ने की असल वजह ये है कि अमेरिकी टैरिफ के बाद हाल ही में हुई एससीओ की बैठक के दौरान भारत-रूस और चीन की नजदीकी से अमेरिका को इस बात का डर सताने लगा कि कहीं भारत उसके हाथ से न निकल जाए। ये बात सर्जियो गोर के बयानो से भी देखने को मिली। गोर को भारत और रूस के रिश्तों से ऐतराज है। अमेरिकी अधिकारियों ने भारत को “क्रेमलिन के लिए तेल का धन शोधन केंद्र” तक कह दिया था। उन्होंने भारत से कहा कि उसे अमेरिका और रूस-चीन के गठजोड़ के बीच से एक को चुनना होगा। ये सब तब हुआ जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बीजिंग में शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (SCO) समिट में गए, जहां रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के शी जिनपिंग भी थे।
अमेरिका को ये चुभा कि भारत रूस से तेल खरीद रहा है, खासकर यूक्रेन संकट के बीच। सीनेट कमिटी के चेयरमैन जिम रिश ने तो इसे “खतरनाक” तक बता दिया। लेकिन गोर ने जवाब दिया कि भारत को रूसी तेल खरीदना बंद करवाना उनकी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर होगा। उन्होंने भारत की तारीफ की, कहा कि ये दुनिया की सबसे बड़ी लोकतंत्र है, 1.4 अरब की आबादी वाला देश, और अमेरिका के साथ इसके साझा मूल्य रूस या चीन से कहीं ज्यादा हैं।
ट्रंप-मोदी की दोस्ती का दिया हवाला
भारत को बर्बाद करने की बात करने वाले ट्रंप के दूत गोर अब मोदी-ट्रंप के रिश्ते की दुहाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा, “हमारे राष्ट्रपति का प्रधानमंत्री मोदी के साथ गहरा दोस्ताना रिश्ता है। जब राष्ट्रपति ने भारत की आलोचना की, तो उन्होंने मोदी की तारीफ करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उनके बीच शानदार रिश्ता है।” ट्रंप के वाणिज्य सचिव हावर्ड लुटनिक ने भी CNBC को बताया, “मुझे लगता है कि भारत के साथ हम इसे सुलझा लेंगे, बस वे रूसी तेल खरीदना बंद कर दें।” भारत के वाणिज्य और विदेश मंत्रालय को भेजे ईमेल का कोई जवाब नहीं आया।
















