ग्रेट निकोबार प्रोजेक्‍ट को क्‍यों नहीं पूरा होने देना चाहती कांग्रेस
August 13, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत अंडमान और निकोबार द्वीप

ग्रेट निकोबार प्रोजेक्‍ट को क्‍यों नहीं पूरा होने देना चाहती कांग्रेस

यह परियोजना केवल एक बंदरगाह या हवाई अड्डा नहीं है, इससे बहुत आगे भारत की समुद्री सुरक्षा, वैश्विक व्यापार में भागीदारी और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। किंतु इसे लेकर कांग्रेस बार-बार शंका और भय का वातावरण बना रही है।

Written byडाॅ. मयंक चतुर्वेदीडाॅ. मयंक चतुर्वेदी — edited by Sudhir Kumar Pandey
Sep 10, 2025, 01:24 pm IST
inअंडमान और निकोबार द्वीप, विश्लेषण
ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट

ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट

भारतीय लोकतंत्र का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि यहाँ राष्ट्रीय महत्व की किसी भी योजना पर राजनीतिक बहस इतनी तेज हो जाती है कि असली तथ्य पीछे छूट जाते हैं और जनता के सामने आधे-अधूरे सच पहुंचते हैं। ग्रेट निकोबार की समग्र विकास परियोजना इसका ताजा उदाहरण है। यह परियोजना केवल एक बंदरगाह या हवाई अड्डा नहीं है, इससे बहुत आगे भारत की समुद्री सुरक्षा, वैश्विक व्यापार में भागीदारी और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। किंतु इसे लेकर कांग्रेस बार-बार शंका और भय का वातावरण बना रही है।

केंद्र सरकार ने अंदमान और निकोबार द्वीप समूह को भारत की सुरक्षा के एक मजबूत किले के रूप में विकसित करने का संकल्प लिया है। स्‍वभाविक है कि इस दिशा में ग्रेट निकोबार परियोजना एक ‘गेमचेंजर’ साबित हो सकती है। इसके अंतर्गत गैलेथिया खाड़ी में विश्वस्तरीय अंतरराष्ट्रीय ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल, ग्रीनफील्ड अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, 300,000 से 400,000 लोगों के लिए एक नियोजित टाउनशिप, 450 एमवीए क्षमता वाला गैस और सौर आधारित पॉवर प्लांट और सड़कों-जलगृहों का नेटवर्क तैयार किया जाना है। नीति आयोग के नेतृत्व में और एएनआईआईडीसीओ के माध्यम से चल रही इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 81,000 करोड़ रुपये है।

ग्रेट निकोबार का रणनीतिक महत्व

ग्रेट निकोबार का महत्व रणनीतिक दृष्टि से भी है। यह मलक्का जलडमरूमध्य के पश्चिमी छोर और सिक्स डिग्री चैनल के पास स्थित है। दुनिया के 30 से 40 प्रतिशत समुद्री व्यापार जहाज इसी रास्ते से गुजरते हैं और चीन की ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा भी यहीं से आता है। यदि भारत इस क्षेत्र में मजबूत उपस्थिति दर्ज करता है तो हिंद महासागर में बीजिंग की विस्तारवादी ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ रणनीति को सीधी चुनौती मिलेगी। एक ओर चीन ग्वादर, हंबनटोटा और क्याउकप्यू जैसे बंदरगाहों में निवेश करके हिंद महासागर में घेराबंदी कर रहा है, तो दूसरी ओर भारत का यह कदम स्वाभाविक रक्षा प्रतिक्रिया है जोकि पूरे हिंद-प्रशांत की समुद्री सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

नौसैनिक दृष्टि से लाभ

नौसैनिक दृष्टि से भी यह योजना दूरगामी है। प्रस्तावित हवाई अड्डा नागरिक और सैन्य, दोनों उपयोग के लिए होगा। यह भारत की एकमात्र त्रि-सेवा कमान—अंडमान और निकोबार कमान को तत्काल तैनाती और निगरानी की नई क्षमता देगा। नौसेना के युद्धपोत, एयर फोर्स के विमान और थलसेना की लॉजिस्टिक सप्लाई इस द्वीप से तेजी से संचालित की जा सकेंगी। यह केवल रक्षा और व्यापार नहीं, बल्कि मानवीय सहायता और आपदा प्रबंधन का भी केंद्र बनेगा।

आर्थिक पहलू क्या है

आर्थिक दृष्टि से यह परियोजना भारत के लिए वरदान है। आज भारत के कंटेनर जहाजों को सिंगापुर या कोलंबो होकर गुजरना पड़ता है। इस पर हर साल लगभग 1800 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। ग्रेट निकोबार पर बनने वाला ट्रांसशिपमेंट पोर्ट यह निर्भरता खत्म कर देगा। इसकी क्षमता पहले चरण में 4 मिलियन टीईयू होगी और 2050 तक यह 16 मिलियन टीईयू तक पहुँच सकती है। यह भारत को वैश्विक समुद्री व्यापार का प्रमुख केंद्र बनाएगा, विदेशी मुद्रा की बचत करेगा और हजारों करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व उत्पन्न करेगा। इसके साथ ही इस परियोजना से लगभग ढाई लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे। पर्यटन, लॉजिस्टिक्स, शिक्षा और स्वास्थ्य के नए अवसर खुलेंगे। लेकिन कांग्रेस इस योजना को “दुस्साहस” बताकर आदिवासी अधिकारों और पर्यावरणीय खतरे का मुद्दा उठा रही है।

सोनिया गांधी का लेख

सोनिया गांधी ने हाल ही में एक लेख में चेतावनी दी कि यह परियोजना शोम्पेन और निकोबारी जनजातियों के अस्तित्व के लिए संकट है और इससे लाखों पेड़ काटे जाएंगे। जयराम रमेश ने पेड़ों की संख्या 8.5 लाख से बढ़ाकर 32 से 58 लाख तक बताई और इसे पर्यावरणीय विनाश कहा। राहुल गांधी ने जनजातीय मामलों के मंत्री को पत्र लिखकर वन अधिकार अधिनियम के उल्लंघन की बात उठाई। इन आरोपों में सच्चाई कितनी है, यह अलग बहस हो सकती है। पर इससे जुड़ा महत्‍वपूर्ण तथ्य यह है कि शोम्पेन और निकोबारी जनजातियों की सुरक्षा और कल्याण के लिए 200 करोड़ रुपये से अधिक का विशेष पैकेज रखा गया है। किसी भी जनजातीय परिवार को जबरन विस्थापित नहीं किया जाएगा। स्वास्थ्य, शिक्षा और आजीविका सुधारने के लिए योजनाएं हैं। द्वीप के 82 प्रतिशत क्षेत्र को अब भी संरक्षित रखा जाएगा।

पर्यावरण संरक्षण का ध्यान

पर्यावरण संरक्षण और पुनर्वनीकरण के लिए 30 वर्षों में 9,162 करोड़ रुपये का प्रावधान है। समुद्री जीवों, प्रवाल भित्तियों और लेदरबैक कछुए तक के संरक्षण हेतु वैज्ञानिक उपाय तय किए गए हैं। सरकार का दावा है कि यह परियोजना विकास और पर्यावरण संरक्षण, दोनों के संतुलन के साथ आगे बढ़ेगी। क्‍या कांग्रेस इस बात से डर रही है कि ग्रेट निकोबार आईलैंड प्रोजेक्ट की शुरुआत नरेंद्र मोदी सरकार ने 2021 में की है। इस मेगा प्रोजेक्ट को अंडमान-निकोबार द्वीप समूहों के आखिरी छोर तक बनाया जाना है। इसमें मालवाहक जहाजों के लिए बंदरगाह, एक इंटरनेशनल एयरपोर्ट, स्मार्ट सिटी और 450 मेगावॉट की गैस और सौर बिजली परियोजना स्थापित किया जाना शामिल है और यदि से सफल होता है तो इसका श्रेय मोदी सरकार एवं भाजपा को सदियों तक मिलता रहेगा ?

विकास करना क्यों गलत

यहां सवाल उठता है कि यदि 2012 में कांग्रेस सरकार के समय आईएनएस बाज को कैंपबेल बे में स्थापित करना सही था, तो आज उसी क्षेत्र में विस्तृत विकास करना क्यों गलत है? जब तत्कालीन यूपीए सरकार ने समुद्री रणनीति को ध्यान में रखकर इस क्षेत्र को महत्व दिया था, तो अब उसे “आदिवासी अस्तित्व पर हमला” बताना क्या दोहरा रवैया नहीं है? आज आईएनएस बाज भारतीय नौसेना का एक ऐसा नौसैनिक हवाई स्टेशन है, जो ग्रेट निकोबार द्वीप पर कैंपबेल बे से भारत के दक्षिणी क्षेत्र की निगरानी में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाता है और मलक्का जलडमरूमध्य और सिक्स डिग्री चैनल पर नजर रखने में मदद करता है। क्‍या कोई इस सामरिक महत्‍व को नकार सकता है?

भूकंप का तर्क कितना सही

परियोजना के विरोध में भूकंपीय जोखिम का तर्क भी दिया जा रहा है। 2004 की सुनामी के समय यह क्षेत्र प्रभावित हुआ था, लेकिन उसके बाद से ही यहाँ मजबूत भूकंपीय निगरानी और आपदा प्रबंधन प्रणाली विकसित की गई है। यह तर्क देना कि आपदा की आशंका से विकास रोक दिया जाए, वैसा ही है जैसे भूकंप संभावित क्षेत्रों में कोई शहर या उद्योग न बसाया जाए। इस दृष्टि से देखें तो भारत के उच्च जोखिम वाले भूकंपीय क्षेत्रों में उत्तर-पूर्वी राज्य, हिमालयी क्षेत्र (जैसे कश्मीर और उत्तर बिहार), गुजरात का कच्छ क्षेत्र और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह शामिल हैं, जहाँ शक्तिशाली भूकंप आ सकते हैं। इन क्षेत्रों में दिल्ली, श्रीनगर और गुवाहाटी जैसे कई बड़े शहर भी स्थित हैं जो भूकंप के प्रति संवेदनशील माने जाते हैं। तब तो फिर इस सभी शहरों एवं राज्‍यों को खाली कर देना होगा। कांग्रेस यहां यह भूलती हुई नजर आ रही है कि आधुनिक इंजीनियरिंग और तकनीक का उद्देश्य ही यही है कि जोखिम के बावजूद सुरक्षित निर्माण हो सके।

विकास और पर्यावरण पूरक

सवाल यह है कि क्या हमें अपने सामरिक हितों और आर्थिक संभावनाओं को इसलिए छोड़ देना चाहिए कि कुछ जोखिम हैं? या हमें उन जोखिमों का वैज्ञानिक समाधान निकालना चाहिए और आगे बढ़ना चाहिए? सरकार का दावा यही है कि उसने वैज्ञानिक संस्थाओं, पर्यावरण विशेषज्ञों और जनजातीय कल्याण मंत्रालय की सलाह के आधार पर ही परियोजना को मंजूरी दी है। फिर केंद्रीय मंत्रियों ने बार-बार स्पष्ट किया है कि यह योजना केवल आधारभूत ढाँचे का विस्तार नहीं, बल्कि हिंद-प्रशांत में भारत की स्थिति को मज़बूत बनाने का राष्ट्रीय दायित्व है। पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने संसद में कहा कि “विकास और पर्यावरण विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं। ग्रेट निकोबार परियोजना इसका उदाहरण होगी।” रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे “भारत की सामरिक ढाल” बताया। जनजातीय मामलों के मंत्री जुएल ओराम ने कहा कि “जनजातीय अधिकारों और ग्रामसभा की सहमति को पूरी तरह सुनिश्चित किया गया है।”

भय का वातावरण न बनाएं

वास्‍तव में यदि विपक्ष यदि इस पर गंभीर है तो उसे ठोस वैकल्पिक सुझाव देने चाहिए, न कि केवल भय और अविश्वास का वातावरण बनाना चाहिए। आज दुनिया के तमाम देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की होड़ में हैं। यदि भारत अपने सामरिक स्थानों को मजबूत नहीं करेगा तो यह बड़ा अवसर गंवा देगा और चीन जैसी शक्तियाँ शून्य भर देंगी। यह अवसर गँवाना ही हमारे लिए दुस्साहस होगा। क्‍योंकि ग्रेट निकोबार परियोजना भारत की भावी सामरिक और आर्थिक शक्ति का आधार है और यह हिंद महासागर में भारत की भूमिका को निर्णायक बनाएगी।

अब कांग्रेस चाहे जितने तर्क दे, लेकिन सच्चाई यह है कि इस परियोजना को रोकना भारत की सुरक्षा और विकास, दोनों से समझौता करना होगा। आलोचना करना लोकतंत्र का हिस्सा है, पर तथ्यों के विपरीत भ्रम फैलाना जनता और देश दोनों के साथ अन्याय है। ग्रेट निकोबार परियोजना दुस्साहस नहीं, बल्कि दूरदृष्टि का प्रतीक है।

Topics: नरेंद्र मोदीसोनिया गांधीहिंद—प्रशांत क्षेत्रजयराम रमेशपाञ्चजन्य विशेषग्रेट निकोबार प्रोजेक्टमलक्का जलडमरूमध्यशोम्पेन और निकोबारी जनजातियांकांग्रेसराहुल गांधी
डाॅ. मयंक चतुर्वेदी
डाॅ. मयंक चतुर्वेदी
लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और हिंदुस्थान समाचार से संबद्ध हैं। [Read more]
Share
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

कोलकाता में तस्लीमा नसरीन का सम्मान करते सुवेंदु अधिकारी

पश्चिम बंगाल : फिर दूसरे ‘घर’ में तस्लीमा

ऐसी बाढ़ थी कि उसने पक्के घरों को भी बहा दिया। एक ऐसे ही घर की नींव के सहारे बांस के घर का निर्माण करते कार्यकर्ता और (प्रकोष्ठ में) यह महिला 10 दिन तक कीचड़ में गर्दन तक दबी रही। इसे सेवा भारती के कार्यकर्ताओं ने बचाया

बाढ़ पीड़ितों के लिए नीड़ का निर्माण

सजा सुनाए जाने के बाद पुलिस हिरासत में जेल जाता ताहिर

आजीवन जेल काटेगा ताहिर

बेंगलुरु में रह रहे बांग्लादेशी घुसपैठियों के साथ बात करते डॉ. नागेंद्र

पैसे दो, बेंगलुरु में रहो!

सर्वोच्च न्यायालय ( प्रकोष्ठ में ) न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां

न्यायपालिका : न्यायाधीशों के चयन के मानदंड स्पष्ट नहीं

विशाल जनभागीदारी-हजारों की संख्या में रत्नागिरि के नागरिक, छात्र और ‘जेन-जी’ युवा पदयात्रा में शामिल हुए

राष्ट्रहित में मौन हुंकार

Load More

ताज़ा समाचार

लखपति दीदी (चित्र प्रतीकात्मक, एआई द्वारा निर्मित)

उत्तराखंड की बड़ी उपलब्धि: लखपति दीदियों की संख्या 3 लाख के पार, जानें कैसे बदली इनकी दुनिया

Uttarakhand Weather: उत्तराखंड में भारी बारिश का अलर्ट, 14 से 17 अगस्त तक सभी जिलों को सतर्क रहने के निर्देश

Punjab Sukhbir Singh badal

पंजाब के पूर्व डिप्टी सीएम व शिअद नेता सुखबीर सिंह बादल पर नांदेड़ में जानलेवा हमला, अस्पताल में भर्ती

आचार्य श्री मिथिलेश नंदिनी शरण जी और पाञ्चजन्य संपादक श्री हितेश शंकर जी

पर्यटन, देशाटन या तीर्थाटन? आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण जी महाराज ने बताया- यात्रा का असली उद्देश्य क्या है?

कोलकाता में तस्लीमा नसरीन का सम्मान करते सुवेंदु अधिकारी

पश्चिम बंगाल : फिर दूसरे ‘घर’ में तस्लीमा

Mukul Kanitkar Panchjanya Sushashan Samvad

पाञ्चजन्य सुशासन संवाद राजस्थान: विभाजन की विभीषिका पर बोले मुकुल कानितकर-‘यह हिन्दुओं का एकतरफा नरंसहार था’

भारत के विभाजन के दौरान हिंदुओं के नरसंहार का उपेक्षित इतिहास

Online Scam

सरकारी नौकरी के नाम पर फर्जी नोटिस और वेबसाइट से ठगी – PIB फैक्ट चेक ने किया खुलासा

प्रतीकात्मक तस्वीर

UPI के 10 साल: कैसे बना भारत का सबसे बड़ा डिजिटल पेमेंट सिस्टम और चुनौती

Punjab Haryana highcourt

‘आप’ सरकार को झटका, पंजाब में कथित पेपर लीक मामला, उच्च न्यायालय ने फार्मेसी ऑफिसर भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगाई

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies