ओडिशा के नयागढ़ जिले में मदरसे में पढ़ने वाले नाबालिग छात्र की हत्या के मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जांच से स्पष्ट हो गया है कि यह दुर्घटना नहीं बल्कि हत्या का मामला है। पुलिस के अनुसार, मृतक छात्र का उसके वरिष्ठ सहपाठियों द्वारा लंबे समय से यौन उत्पीड़न किया जा रहा था। इस सिलसिले में पांच किशोरों को गिरफ्तार किया गया है।
पीड़ित छात्र कटक ज़िले का निवासी था और नीलापल्ली स्थित मदरसे में पढ़ रहा था। पिता की शिकायत पर जांच के बाद पुलिस ने जांच शुरु की । जांच के बाद नयागढ जिला पुलिस ने बताया कि छात्र को मदरसे परिसर के परित्यक्त बाथरूम में मारा गया और उसका शव उपयोग न होने वाले सेप्टिक टैंक में डाल दिया गया। जिला पुलिस के अनुसार, इस प्रकरण में शामिल पाँच वरिष्ठ छात्रों को गिरफ्तार कर जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (JJB) के समक्ष पेश किया गया, जहाँ से उन्हें अनुगुल स्थित बाल सुधार गृह भेज दिया गया। साथ ही, उनकी जन्मतिथि सत्यापन के लिए परिजनों को प्रमाण पत्र जमा करने का निर्देश भी दिया गया है।
पुलिस जांच में सामने आया कि मृतक छात्र लंबे समय से पाँच वरिष्ठ छात्रों द्वारा अप्राकृतिक यौन उत्पीड़न का शिकार हो रहा था। मृतक ने विरोध जताते हुए इस संबंध में अपने पिता को बताने की बात कही थी। इसी डर से आरोपियों ने उसकी हत्या कर दी। सूत्रों के अनुसार, 30 अगस्त को दो वरिष्ठ छात्रों ने उसे शौचालय टंकी में धकेलकर डुबोने का प्रयास किया, लेकिन वह किसी तरह बाहर निकल आया। इसके बावजूद उत्पीड़न जारी रहा। 2 सितंबर को एक बार फिर उसे धमकी देकर यौन शोषण किया गया। इसके बाद दो अन्य छात्रों ने भी उसका शोषण किया और गला दबाकर हत्या कर दी। बाद में सबूत मिटाने के लिए शव को शौचालय टंकी में डाल दिया गया।
फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से नमूने जुटाए और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान से आरोपियों की संलिप्तता की पुष्टि हुई। सभी पाँच किशोरों (आयु 12 से 15 वर्ष) को पॉक्सो अधिनियम, 2012 और भारतीय न्याय संहिता, 2023 की प्रासंगिक धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने अपराध कबूल कर लिया है। पुलिस का कहना है कि घटना के बाद आरोपियों में से एक ने मदरसा प्रमुख को मृतक के ग़ायब होने की सूचना देकर संदेह से बचने का प्रयास किया था। लेकिन वैज्ञानिक जांच और सहपाठियों से पूछताछ के दौरान सच्चाई सामने आ गई। मामले के उजागर होने के बाद ज़िले में सनसनी फैल गई है। इस घटना ने मदरसों और छात्रावासों में सुरक्षा व्यवस्था व निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

















