लंबे समय से उग्रवाद और अशांति का सामना कर रहे मणिपुर के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। प्रतिबंधित संगठन कांगलेइपाक कम्युनिस्ट पार्टी (पीपुल्स वॉर ग्रुप) यानी केसीपी (पीडब्ल्यूजी) के 46 सक्रिय उग्रवादियों ने हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है। इसे राज्य में शांति और स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस फैसले से उम्मीद बढ़ी है कि आने वाले समय में मणिपुर में हिंसा कम होगी और विकास का माहौल मजबूत होगा।
46 उग्रवादियों ने छोड़े हथियार
इंफाल ईस्ट जिले के मणिपुखरी स्थित असम राइफल्स मुख्यालय में आयोजित आत्मसमर्पण समारोह में मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह समेत कई वरिष्ठ प्रशासनिक और सुरक्षा अधिकारी मौजूद रहे। सभी उग्रवादियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर सामान्य जीवन अपनाने और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भरोसा जताने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में राज्य सरकार, पुलिस, असम राइफल्स, सीआरपीएफ और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया। आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादियों ने केवल संगठन छोड़ने की घोषणा नहीं की, बल्कि अपने पास मौजूद 28 आधुनिक हथियार भी सुरक्षा बलों को सौंप दिए। इनमें एके राइफल, इंसास राइफल, कार्बाइन मशीन गन, पिस्तौल, .303 राइफल और अन्य हथियार शामिल हैं। इसके अलावा बड़ी मात्रा में गोलियां, मैगजीन और विस्फोटक सामग्री भी जमा कराई गई। इससे साफ है कि सुरक्षा एजेंसियों को उग्रवाद के खिलाफ अभियान में बड़ी सफलता मिली है।
इस आत्मसमर्पण की सबसे खास बात यह है कि यह किसी औपचारिक शांति समझौते का हिस्सा नहीं था। उग्रवादियों ने अपनी इच्छा से हिंसा छोड़ने और सामान्य जीवन में लौटने का फैसला किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम दूसरे उग्रवादियों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है। सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार यह सफलता लगातार चलाए गए अभियानों, स्थानीय लोगों के सहयोग और सरकार की पुनर्वास नीति का नतीजा है। यदि आत्मसमर्पण करने वाले लोगों को रोजगार, शिक्षा और सम्मानजनक जीवन के अवसर मिलते हैं, तो वे दोबारा हिंसा की राह पर नहीं लौटेंगे।

















