ब्रिटेन के लीसेस्टर में एक बार फिर से मजहबी उन्मादियों ने उत्पात मचाने की कोशिश की है। इस्लामवादियों ने भारतवंशियों और अन्सय समुदायों के बीच पांथिक प्रतीकों और पहचान को लेकर तनाव पैदा करने की कोशिश की है। पूरे विश्व में इन दिनों गणेश चतुर्थी की धूम है। भारत ही नहीं, दुनियाभर में बसे हिन्दू गणेश पूजन और उपासना में लगे हैं। लेकिन ब्रिटेन के इस शहर में गणेश चतुर्थी के जलूस में भगवा ध्वज लेकर चलने की बात पर कट्टर इस्लामवादियों ने बेवजह का विवाद पैदा करने की तैयारी की हुई थी। उनके ऐसा करने बेशक, स्थानीय हिन्दू और मुस्लिम समुदायों के बीच पहले से मौजूद दरार और गहरी ही हुई है।
हुआ यूं कि लीसेस्टर में गणेश चतुर्थी के जलूस में कई गाड़ियों पर भगवा ध्वज लगाए गए थे। मुस्लिम काउंसिल ऑफ ब्रिटेन को इस पर चिढ़ मच गई। उन्होंने बिना आगापीछा सोचे इसे ‘हिंदुत्व से जुड़ा उग्र प्रतीक’ बत दिया। इतना ही नहीं, मुसलमानों के इस गुट ने पुलिस से कहा कि इस पर कार्रवाई की जाए। वैसे भी ब्रिटेन, खासकर लंदन में इस्लामवादियों की तेजी से बढ़ी संख्या उनके उग्र हौसलों को हवा दे ही रही है। लेकिन हिंदू संगठनों ने भी तुरंत हरकत में आते हुए मुस्लिम काउंसिल के उक्त बयान को ‘भटाकने वाला, अपमानजनक और पांथिक स्वतंत्रता का उल्लंघन’ बताया। हिन्दू संगठनों ने भी पुलिस में अपनी ओर से शिकायत दर्ज करवाई।
हिंदू संगठनों का कहना है कि भगवा ध्वज हिंदू धर्म का पवित्र प्रतीक है, जो शांति, त्याग, साहस और सत्य की खोज को इंगित करता है। इसे उग्र विचार के साथ जोड़ना न केवल धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाता है, बल्कि विभिन्न समुदायों के बीच दरार को भी गहराता है।
ब्रिटेन के लीसेस्टर शहर में हिंदू और मुस्लिम, दोनों समुदायों की अच्छी—खासी आबादी है। साल 2022 में भी क्रिकेट मैच में पाकिस्तान की हार के बाद मजहबी उन्मादी तत्वों ने यहां हिन्दुओं के घरों, मंदिरों पर हमले किए थे, मजहबी उन्माद फैला था। पुलिस ने बजाय उनको मजहबी उपद्रवियों को शांत करने के, दूर खड़े रहकर तमाशा देखते रहने का रास्ता अपनाया था। मुस्लिमों ने जबरदस्त मारपीट करके हिन्दुओं को आतंकित किया था।
गणेश चतुर्थी पर यहां हर साल इसी प्रकार का जश्न मनाया जाता रहा है, लेकिन इस बार जानबूझकर बेवजह का विवाद पैदा करने की कोशिश की गई। इससे तनाव को फिर से उकसाने की मंशा जाहिर होती है। हिन्दू उत्सवों को राजनीतिक रंग देकर समुदायों के बीच विभाजन पैदा करने के लिए जैसे मुस्लिम काउंसिल उतावली रहती है। यह गुट न केवल ब्रिटेन की बहुसांस्कृतिक पहचान को चुनौती देता है, बल्कि भारतीयों को बिना मतलब डराने की चाल चलता है।
सब जानते हैं कि भगवा ध्वज हिंदू श्रद्धालुओं सहित प्रत्येक भारतीय के लिए आस्था और स्वाभिमान का विषय है। वैश्विक स्तर पर भी यह हिंदू धर्म का एक पवित्र प्रतीक है। इसे उग्रता के भाव से जोड़कर इसकी निंदा करना पांथिक स्वतंत्रता के अधिकारों का उल्लंघन माना जा सकता है। हिंदू संगठनों ने इस बात पर जोर दिया है कि ब्रिटेन के कानून पांथिक स्वतंत्रता की रक्षा की बात करते हैं। इसलिए मुस्लिम काउंसिल की इस हरकत को अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए।
समाज में सौहार्द बनाए रखने में स्थानीय प्रशासन और पुलिस की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है। उन्हें उग्रता दिखाने वाले पक्ष से बात करनी चाहिए और ऐसे कदम उठाने चाहिए जो हिन्दू और मुस्लिम समुदायों के बीच भरोसा कायम रहने का माहौल बनाएं। लीसेस्टर की घटना केवल एक स्थानीय विवाद नहीं है, बल्कि यह दो समुदायों के बीच बेवजह के टकराव को पैदा करने की एक चाल है।

















