तालिबान ने फिर चलाया महिलाओं पर चाबुक: गुपचुप चल रहे ब्यूटी पार्लर्स को या तो बंद करें या जेल जाएं
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तालिबान ने फिर चलाया महिलाओं पर चाबुक: गुपचुप चल रहे ब्यूटी पार्लर्स को या तो बंद करें या जेल जाएं

तालिबान शासन में अफगान महिलाओं की गुप्त आजीविका खतरे में। चोरी-छिपे चल रहे ब्यूटी पार्लर बंद करने की साजिश, महिलाओं की आवाज दबाई जा रही है।

Written byसोनाली मिश्रासोनाली मिश्रा — edited by कुलदीप सिंह
Sep 1, 2025, 12:33 pm IST
in विश्व, विश्लेषण
Afghan Taliban ristriction on women

प्रतीकात्मक तस्वीर

अफगानिस्तान में महिलाएं जो चोरी छिपे कुछ काम कर रही हैं, वह भी अब तालिबान को रास नहीं आ रहा है। महिलाओं को पहले ही पूरी तरह से कैद में रखने के बाद अब तालिबान शासन ने उन महिलाओं पर भी शिकंजा कस दिया है, जो चोरी छुपे ब्यूटी पार्लर का काम कर रही हैं।

सार्वजनिक जीवन से गायब हो चुकी हैं महिलाएं

तालिबान को शासन सम्हाले अब चार वर्ष हो गए हैं और इन चार वर्षों में अफगानिस्तान से महिलाएं सार्वजनिक स्थल से पूरी तरह से गायब हो चुकी हैं। उन्हें धीरे-धीरे क्रमबद्ध तरीके से गायब किया गया और देखते ही देखते मीडिया, सरकारी नौकरियों, चिकित्सा आदि सभी क्षेत्रों से महिलाएं गायब हो गईं। यहाँ तक कि वहाँ पर घरों की खिड़कियां भी गायब कर दी गईं कि लड़कियां बाहर न देख लें। लड़कियों की आय का एक बहुत बड़ा स्रोत ब्यूटी पार्लर था। हालांकि लड़कियां टीचर्स भी थीं, मगर तालिबान ने लड़कियों के लिए कक्षा 6 के बाद लड़कियों के लिए स्कूल बंद कर दिए और उनके लिए पढ़ाई के सारे दरवाजे बंद कर दिए। और उसके बाद ब्यूटी पार्लर भी बंद करवा दिए गए।

मगर लड़कियां ऑनलाइन पढ़ाई भी कर रही है और वे चोरी छिपे ब्यूटीपार्लर का भी काम कर रही थीं। अगस्त 2023 में तालिबान की सरकार ने आधिकारिक रूप से देश में चल रहे सभी ब्यूटी पार्लर बंद करवा दिए थे और इसमें काम करने वाली लगभग 50,000 लड़कियों के हाथों से रोजगार छीन लिया था।

मगर इसके बाद भी लड़कियों ने हार न मानते हुए अपना काम जारी रखा था। मगर अब तालिबान ने यह कहा है कि वे इस चोरी छिपे चल रहे व्यापार को भी हटाना चाहते हैं और तालिबान ने समुदाय के नेताओं और बुजुर्ग लोगों से यह कहा है कि वे पूरे देश में चल रहे ऐसे पार्लर्स की पहचान करें और जानकारी भेजें।

गार्डीअन में कई ऐसी महिलाओं ने अपनी पीड़ा व्यक्त की है, जो चोरी छुपे यह काम कर रही थीं और अब उन्हें अपनी इस आय के जाने का खतरा है। 38 वर्षीय फ्रेसथा ने कहा कि वे चोरी छिपे अपना सैलून 2023 के बाद से चला रही थीं, क्योंकि उनके पास अपने तीन बच्चों का पेट पालने के लिए कोई और साधन नहीं है। उन्होनें कहा कि जब तालिबान ने हमारे सैलून बंद कर दिए, तो मैं अपने परिवार में अकेली कमाने वाली थी; मेरे पति बीमार थे, और मेरे तीन बच्चे थे जिनका खर्च मुझे ही उठाना था,” फिर उन्होनें कहा कि “लेकिन मैंने काम करना जारी रखा क्योंकि मुझे बहुत अच्छा लगता है जब मैं किसी महिला की सुंदरता वापस ला पाती हूँ। जब कोई महिला खुद को आईने में देखकर मुस्कुराती है, तो उसकी खुशी मेरी खुशी बन जाती है।

महिलाओं पर बढ़ा खतरा

मगर अब उन्हें डर है। उन्हें डर है कि अब उनपर खतरा और बढ़ गया है। उन्होनें कहा “अब, मुझे नहीं लगता कि मैं आगे काम कर पाऊँगी क्योंकि जोखिम बहुत ज़्यादा है [लेकिन] मुझे कोई और काम नहीं आता। हमारी हालत बहुत खराब है, लेकिन इस दुनिया में हमारी आवाज़ सुनने या हमारा साथ देने वाला कोई नहीं है।”

यह बात पूरी तरह से सच है कि अफगानिस्तान की ऐसी महिलाओं का साथ सभी ने छोड़ दिया है, जो तालिबान के इस शोषण का शिकार लगातार हो रही हैं। ऐसा लग रहा है कि जैसे पूएर विश्व के लिए ये अफगानी महिलाएं मायने ही नहीं रखती हैं और वे इनके प्रति अपनी तनिक भी जिम्मेदारी नहीं समझते हैं।

गाजा के लिए आवाज उठेगी, मगर अफगानिस्तान में सार्वजनिक पटल से गायब हो चुकी महिलाओं के विषय में आवाज नहीं उठेगी।

आवाज उठने की बात तो बहुत दूर की बात है, यह पीड़ा चर्चा में भी नजर नहीं आती है। तालिबान के साथ व्यापार करने वाले देश भी इस बात को लेकर सरकार से प्रश्न नहीं करते हैं कि आखिर आप अपनी महिलाओं को सार्वजनिक रूप से जीवन में क्यों नहीं आने देते हैं? क्यों उनकी पढ़ाई पर ही प्रतिबंध है? क्यों उनके बाहर निकलने पर, उनके घर से झाँकने तक पर प्रतिबंध है?

महिलाओं के लिए वहाँ पर जिम, रेस्टोरेंट, पार्क आदि सभी स्थानों के दरवाजे अब बंद हो चुके हैं। बंद दरवाजों के पीछे उनकी अपनी जो दुनिया है, जहां से वे अपने पैरों पर खड़े होकर कुछ काम कर सकती हैं, वह भी अब तालिबान के निशाने पर है।

 

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