भारत देश में आर्थिक विकास तब तक अधूरा माना जाता है जब तक समाज के हर वर्ग को वित्तीय सेवाओं तक समान पहुंच न मिल सके। प्रधानमंत्री जन धन योजना की शुरुआत 28 अगस्त 2014 को हुई थी। इसका उद्देश्य था सभी नागरिकों, खासकर गरीबों को, बैंकिंग सेवाओं से जोड़ना। 11 वर्षों में इसके तहत 56 करोड़ से अधिक बैंक खाते खोले गए हैं और इनमें कुल जमा राशि 2.68 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच चुकी है।
योजना का उद्देश्य- प्रधानमंत्री जन धन योजना का मकसद है – हर व्यक्ति तक बैंकिंग, बचत, बीमा और पेंशन जैसी सुविधाएं पहुंचाना। यही वित्तीय समावेशन है।
विशेषताएँ- बिना शेष राशि के खाता (Zero Balance Account), कोई भी व्यक्ति बिना न्यूनतम राशि के बैंक खाता खोल सकता है। खाता धारक को एक मुफ्त RuPay कार्ड मिलता है, जिससे वह एटीएम से पैसे निकाल सकता है और खरीदारी कर सकता है। RuPay कार्डधारकों को कुछ शर्तों के तहत ₹2 लाख तक का दुर्घटना बीमा मिलता है। 6 महीने सक्रिय खाता होने पर ₹10,000 तक ओवरड्राफ्ट मिलता है। सरकारी पैसे सीधे खाते में आते हैं। गांवों में लोग मोबाइल से बैंकिंग कर सकते हैं।
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प्रधानमंत्री जन धन योजना के लाभ- इस योजना से गरीबों को बचत की आदत पड़ी है और वे आपात स्थिति में बैंक से छोटी राशि उधार ले सकते हैं। सरकारी सब्सिडी और सहायता सीधे खातों में जमा होने से बिचौलियों की भूमिका कम हुई है। खाता धारकों को बैंकिंग और बीमा सेवाएं मिलने से वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो सके हैं। महिलाओं के नाम से खाते खुलने से वे स्वयं के वित्तीय निर्णय लेने में सक्षम हुई हैं। कोविड-19 जैसे संकट काल में सरकार ने जन धन खातों के माध्यम से सीधे सहायता राशि पहुंचाई।
(रिपोर्ट- महक सिंह)












