जम्मू-कश्मीर सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए ‘फलाह-ए-आम ट्रस्ट’ (FAT) द्वारा चलाए जा रहे 215 स्कूलों को अपने नियंत्रण में ले लिया है। यह कदम 23 अगस्त 2025 से लागू कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि यह फैसला बच्चों की पढ़ाई और भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए लिया गया है।
‘फलाह-ए-आम’ का मतलब होता है- सबकी भलाई। यह ट्रस्ट जमात-ए-इस्लामी जम्मू-कश्मीर द्वारा बनाया गया था। 1972 से पहले जमात-ए-इस्लामी खुद स्कूल चलाता था, लेकिन बाद में इन स्कूलों को ‘फलाह-ए-आम ट्रस्ट’ के हवाले कर दिया गया। हालांकि, जमात-ए-इस्लामी को भारत सरकार ने पहले ही एक गैर-कानूनी संगठन घोषित कर दिया है। साल 2019 में इस संगठन पर प्रतिबंध लगाया गया था और 2024 में यह बैन दोबारा बढ़ा दिया गया। बावजूद इसके, यह संगठन फलाह-ए-आम ट्रस्ट के ज़रिए शिक्षा का काम करता रहा। सरकारी और खुफिया एजेंसियों ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि फलाह-ए-आम ट्रस्ट के ये स्कूल सीधे या परोक्ष रूप से प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी संगठन से जुड़े हुए हैं। इसके साथ ही, इन स्कूलों की जो मैनेजिंग कमेटियाँ थीं, उनकी वैधता (legitimacy) भी खत्म हो चुकी थी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इन स्कूलों की गतिविधियों पर नजर रखने की ज़रूरत है क्योंकि ये संगठन के प्रभाव में चल रहे थे।
सरकार ने क्या कदम उठाया-
सरकार ने इन 215 स्कूलों को फिलहाल सीधे जिला प्रशासन (District Administration) के नियंत्रण में ले लिया है। अब इन स्कूलों की देखरेख संबंधित जिला मजिस्ट्रेट (DM) या डिप्टी कमिश्नर (DC) करेंगे। आगे चलकर सरकार इन स्कूलों के लिए एक नई मैनेजिंग कमेटी बनाएगी जो पूरी तरह वैध और पारदर्शी तरीके से काम करेगी। सरकार ने यह भी कहा है कि यह कदम किसी राजनीतिक या धार्मिक कारण से नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य और शिक्षा की गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। सबसे बड़ा सवाल यह था कि इन स्कूलों के संचालन में बदलाव से बच्चों की पढ़ाई पर बुरा असर न पड़े। इस पर सरकार ने आश्वासन दिया है कि किसी भी छात्र की पढ़ाई नहीं रुकेगी। जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग मिलकर इन स्कूलों को पहले की तरह चलाते रहेंगे। सभी छात्रों को नियमित रूप से कक्षाएं मिलेंगी और किसी को भी स्कूल छोड़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सरकार का यह भी कहना है कि अब इन स्कूलों में नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जाएगी, जिससे बच्चों का सर्वांगीण विकास हो सकेगा।

















