RSS के 100 वर्ष : स्वतंत्रता संग्राम में संघ का निर्णायक योगदान
September 14, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम सम्पादकीय

RSS के 100 वर्ष : स्वतंत्रता संग्राम में संघ का निर्णायक योगदान

संघ का योगदान स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में अक्सर अनदेखा किया गया, जबकि उसका प्रभाव मौन रहकर भी निर्णायक था

Written byहितेश शंकरहितेश शंकर
Aug 22, 2025, 10:45 pm IST
inसम्पादकीय, संघ @100

क्या आपको पता है कि भगत सिंह और सुखदेव के साथी राजगुरु का संबंध राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से रहा है? क्या आप जानते हैं कि गांधी जी ने खुद संघ के अनुशासन और सेवा-भाव की सार्वजनिक सराहना की थी? क्या आप जानते हैं कि विभाजन की विभीषिका में लाहौर और मुल्तान से हजारों हिंदू-सिख परिवारों को सुरक्षित भारत लाने में रा.स्व.संघ के स्वयंसेवकों ने अपना बलिदान दिया? यह वे तथ्य हैं जिन्हें आज हर एक भारतीय के लिए जानना जरूरी है, क्योंकि इतिहास की किताबों ने इन्हें धुंधला कर दिया है।

आसान नहीं थी यात्रा

भारत की स्वतंत्रता की यात्रा केवल राजनीतिक आंदोलनों या कुछ नेताओं तक सीमित नहीं थी। यह यात्रा आसान नहीं थी। यह उस मौन तपस्या और संगठन के बल की भी कहानी थी, जिसने राष्ट्र को आत्मगौरव और एकात्मता का संस्कार दिया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना इसी दृष्टि से हुई थी। एक ऐसा संगठन, जो नारे और शोर से परे जाकर समाज की आत्मा को जाग्रत करे और स्वतंत्र भारत की नींव तैयार करे।

इस यात्रा की शुरुआत डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार से हुई, जिनकी देशभक्ति का पहला सार्वजनिक उद्घोष 1907 में ही सामने आ गया था। नील सिटी स्कूल के किशोर केशव बलिराम हेडगेवार ने सरकारी निरीक्षक के सामने पूरी कक्षा से वंदे मातरम् बुलवाया और परिणामस्वरूप उन्हें विद्यालय से निष्कासित कर दिया गया। यह कोई क्षणिक आवेश नहीं था, बल्कि वह विद्रोही चेतना थी, जिसने आगे चलकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की रूपरेखा तैयार की।

कांग्रेस द्वारा पूर्ण स्वतंत्रता का संकल्प पारित करने से पूरे नौ वर्ष पहले, सन् 1920 में डॉ. हेडगेवार कांग्रेस की नागपुर इकाई के संयुक्त सचिव के रूप में सक्रिय थे। उसी समय उन्होंने एक प्रस्ताव रखा था, जिसमें स्पष्ट रूप से उन्होंने कहा था, “कांग्रेस का लक्ष्य है पूर्ण स्वतंत्रता प्राप्त करना, एक भारतीय गणराज्य की स्थापना करना और विश्व के अन्य राष्ट्रों को पूंजीवादी साम्राज्यवाद के शोषण और अत्याचार से मुक्त कराना।” उन्होंने गांधी जी के असहयोग आंदोलन में भाग लिया। राजद्रोह का मुकदमा झेला और लगभग 11 महीने कारावास में रहे। उनके भाषण इतने प्रखर थे कि नागपुर के कलेक्टर ने उन्हें एक वर्ष तक सार्वजनिक भाषण देने से प्रतिबंधित कर दिया था। जेल से लौटने पर उनका स्वागत मोतीलाल नेहरू, हकीम अजमल खां, राजगोपालाचारी और विट्ठलभाई पटेल जैसे नेताओं ने किया। किंतु डॅा. हेडगेवार ने यह घोषणा की कि नैतिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत एकता के बिना राजनीतिक स्वतंत्रता निरर्थक होगी। इसी विचार से प्रेरित होकर उन्होंने 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की।

संघ की स्थापना का मार्ग आसान नहीं था। राजनीतिक आंदोलनों में भाग लेने वालों को तत्काल सुर्खियां मिलती थीं, परंतु संगठन निर्माण और सांस्कृतिक जागरण की मौन साधना का कोई नाम तक दर्ज नहीं होता था। डॉ. हेडगेवार ने वही कठिन मार्ग चुना। यही कारण है कि संघ का योगदान स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में अक्सर अनदेखा किया गया, जबकि उसका प्रभाव मौन रहकर भी निर्णायक था।

भगत सिंह और सुखदेव के साथी शिवराम हरि राजगुरु का संबंध भी संघ से रहा। नागपुर में शिक्षा प्राप्त करते हुए वे हेडगेवार जी से मिले और शाखा में आते-जाते रहे। 1929 में गिरफ्तारी से पूर्व डॉ. हेडगेवार ने उन्हें सुरक्षित स्थान पर रहने की सलाह भी दी, परंतु राजगुरु जैसे क्रांतिकारी जोखिम उठाने से नहीं चूके और अंततः गिरफ्तार हो गए। यह प्रसंग बताता है कि संघ और क्रांतिकारियों के बीच केवल वैचारिक रिश्ता ही नहीं था, बल्कि संरक्षण और मार्गदर्शन का संबंध भी था।

हर आंदोलन में सक्रिय रहे स्वयंसेवक

1930 में नागपुर में आयोजित संघ की तीन दिवसीय बैठक में बिना शर्त गांधी जी के नमक सत्याग्रह का समर्थन करने का निर्णय लिया गया। डॉ. हेडगेवार ने स्वयं सरसंघचालक पद अस्थायी रूप से छोड़ दिया ताकि संघ कार्य प्रभावित न हो और वे व्यक्तिगत रूप से सत्याग्रह में सम्मिलित हो सकें। वर्धा से निकला उनका जत्था दस हजार की भीड़ में बदल गया। डॉ. हेडगेवार को फिर से नौ महीने का करावास हुआ। जेल से छूटते ही उन्होंने फिर से संघ कार्य का दायित्व संभाला।

1938 में जब हैदराबाद में निजामशाही के शासन में हिंदुओं पर अत्याचार बढ़ गए तो हैदराबाद आंदोलन के लिए हिन्दू महासभा और आर्य समाज के नेतृत्व में ‘भागानगर नि:शस्त्र प्रतिकार मंडल’ का सत्याग्रह हुआ। संघ ने साफ नीति अपनाई, जिनके पास संगठन का प्रमुख दायित्व है, वे वहीं रहें, बाकी स्वयंसेवक व्यक्तिगत रूप से अवश्य भाग लें।

1942 में गांधी जी के ‘अंग्रेजो, भारत छोड़ो आंदोलन’ के आह्वान के समय भी संघ पीछे नहीं रहा। विदर्भ के चिमूर, बावली और आष्टी जैसे क्षेत्रों में कांग्रेस और संघ के कार्यकर्ता साथ लड़े। चिमूर में संघ स्वयंसेवक बालाजी रायपुरकर अंग्रेजों की गोली से बलिदान हुए। यह उस आंदोलन का एकमात्र बलिदान था, जिसमें एक स्वयंसेवक ने अपने प्राणों की आहुति दी। इस आंदोलन के चलते दिल्ली, बिहार, आर्वी, जशपुर, उज्जैन, हर जगह संघ कार्यकर्ता गिरफ्तार हुए, घायल हुए, संपत्ति जब्त हुई। लेकिन इन बलिदानों का जिक्र शायद ही इतिहास की पाठ्यपुस्तकों में मिले।

संघ और गांधी जी के संबंधों में मतभेद अवश्य रहे, विशेषकर मुस्लिम नेतृत्व को लेकर। लेकिन ये मतभेद कभी दुश्मनी में नहीं बदले। 1934 में गांधी जी वर्धा के संघ शिविर में आए और अनुसूचित जाति स्वयंसेवकों को भेदभाव-रहित वातावरण में देखकर प्रसन्न हुए। 1947 में दिल्ली में उन्होंने संघ के अनुशासन और सेवा-भाव की सार्वजनिक सराहना भी की।

इसके बाद आया 1947 का विभाजन, भारत के इतिहास का सबसे भीषण अध्याय। पंजाब, सिंध और बंगाल की धरती पर खून और आग का समुद्र उमड़ पड़ा। लाखों हिंदू और सिख परिवार उजड़ गए। ऐसे समय में संघ के स्वयंसेवक सबसे आगे खड़े थे। तत्कालीन सरसंघचालक गुरुजी गोलवलकर ने स्पष्ट निर्देश दिए, जहां भी कोई हिंदू, सिख या निर्दोष परिवार फंसा हो, चाहे वह पाकिस्तान के किसी भी हिस्से में हो, उसे सुरक्षित भारत लाने का हरसंभव प्रयास करो। जीवन का जोखिम उठाना पड़े, तो भी पीछे मत हटो। ऐसा ही हुआ। अनेक स्वयंसेवक बलिदान हुए, घायल हुए, लेकिन पीछे हटना किसी ने स्वीकार नहीं किया। पुनर्वास के बाद भी उन्होंने इन परिवारों को घर बनाने, रोजगार ढूंढने और बच्चों की शिक्षा में सहयोग दिया।

स्वतंत्रता केवल एक आंदोलन या एक दल का परिणाम नहीं थी। यह अनेक प्रयत्नों-सत्याग्रह, सशस्त्र क्रांति, आजाद हिंद फौज, सैनिक विद्रोह और सांस्कृतिक जागरण का संयुक्त फल था। स्वतंत्रता संग्राम और विभाजनकाल, दोनों ही दौर में रा.स्व. संघ ने वह भूमिका निभाई, जो मौन रहते हुए भी निर्णायक थी। यह हमें सिखाता है कि राष्ट्र की शक्ति केवल राजनीति से नहीं, बल्कि संगठित समाज, जाग्रत संस्कृति और त्याग की परंपरा से बनती है।

X @hiteshshankar

Topics: मोतीलाल नेहरूसंघ का योगदानIndia Pakistan Partition StoriesHindus atrocities in Partitionराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघभारत पाक बंटवारे की कहानीहितेश शंकर1947 का विभाजनगांधी जीभगत सिंह-सुखदेव-राजगुरुभारत की स्वतंत्रताहकीम अजमल खांविभाजन विभीषिकाराजगोपालाचारी और विट्ठलभाई पटेलVibhajan Vibhishikaसंस्कृति और त्याग की परंपरापाञ्चजन्य विशेष1942 में गांधी जी के ‘अंग्रेजो-भारत छोड़ो आंदोलन’
हितेश शंकर
हितेश शंकर
हितेश शंकर पत्रकारिता का जाना-पहचाना नाम, वर्तमान में पाञ्चजन्य के सम्पादक [Read more]
Share
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

दुनिया डगमगाई, भारत संभला

कूटनीतिक गूंज के बाद, उत्सवी उल्लास…

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी

BRICS Summit 2026: PM मोदी का वैश्विक सुधारों पर जोर, कहा- विशेषाधिकार के पिरामिड को साझेदारी में बदलना होगा

यायावर कायनात काजी और लेखक राहुल नील से चर्चा करते हुए तृप्ति श्रीवास्तव

ओडिशा की उड़ान 2.0 : ‘पूरा जीवन कम है भारत को समझने के लिए’

ओडिशा की उड़ान 2.0 में साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ अमित दुबे  से बातचीत करते हुए  वरिष्ठ पत्रकार अनुराग पुनेठा

ओडिशा की उड़ान 2.0 : ‘साइबर अपराध से सतर्कता ही बचाव’

‘सुशासन संवाद : ओडिशा की उड़ान 2.0’ में  विश्व हिंदू परिषद के संयुक्त महासचिव डॉ. सुरेंद्र  कुमार जैन से वरिष्ठ पत्रकार अनुराग पुनेठा

ओडिशा की उड़ान 2.0 : ‘हमारी यात्रा राम मंदिर से राष्ट्रमंदिर की है’

Load More

ताज़ा समाचार

आरोपी फरमान को पुलिस ने किया गिरफ्तार

देहरादून : हलाला का मामला आया सामने, महिला का उत्पीड़न कर तीन तलाक देने वाले फरमान को पुलिस ने किया गिरफ्तार

मदरसा (प्रतीकात्मक चित्र)

बंगाल में 2396 अवैध मदरसों की पहचान, 252 को बंद करने का आदेश, सरकार की बड़ी कार्रवाई

आज का श्लोक : वाक्ताडनं प्रमत्तस्य परीवादं रिपोरपि।

t20 match first time vande mataram

भारतीय क्रिकेट में ऐतिहासिक अध्याय: भारत-अफगानिस्तान टी20 मैच में पहली बार राष्ट्रगान के साथ गाया गया ‘वंदे मातरम्’

दुनिया ताकतवर को देखती है: गोटन में RSS सरसंघचालक जी ने कहा- ‘व्यक्ति से लेकर राष्ट्र तक सामर्थ्य अनिवार्य है’

महराजगंज में RSS शताब्दी वर्ष पर भव्य युवा संवाद : दीपक विस्पुते जी ने युवाओं को दिया ‘राष्ट्र प्रथम’ का संदेश

AP Aboobacker Fatwa Muslim Women Samastha Kerala Jam Eyyathul Ulama Panchjanya

“फतवा वापस नहीं होगा”: मुस्लिम महिलाओं पर दिए बयान पर कायम AP अबूबकर, जानिए जमीयतुल उलमा का बड़ा दावा!

वरिष्ठ पत्रकार अनुराग पुनेठा जी और गुजरात मुख्यमंत्री के प्रमुख सलाहकार एवं GMDC के अध्यक्ष डॉ. हसमुख अधिया जी

Sabarmati Samvad 2026: “गुजरात कैसे बनेगा भारत का सबसे बड़ा ग्रोथ इंजन? डॉ. हसमुख अधिया जी ने बताई 2047 की पूरी रणनीति”

दुनिया डगमगाई, भारत संभला

Role of Spiritual Leaders in Nation Building Hindu Resurgence Panchjanya

राष्ट्र निर्माण और हिंदू पुनरुत्थान में आध्यात्मिक गुरुओं की भूमिका: जानिए कैसे मिलेगा ‘परम वैभव’!

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies