नई दिल्ली। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के उपराष्ट्रपति उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन 16 साल की उम्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ गये थे। उन्हें सियासत का 40 साल से अधिक का अनुभव है। पूरा नाम चंद्रपुरम पोनूसामी राधाकृष्ण है। अभी वो महाराष्ट्र के राज्यपाल हैं। उपराष्ट्रपति पद के लिए उनका नाम राजग के सभी दलों की सहमति के बाद तय किया या है। वह भारतीय जनता पार्टी के मिशन दक्षिण के लिए उपयोगी होंगे। राधाकृष्णन मूल रूप से तमिलनाडु से आते हैं। उनके नाम का उपराष्ट्रपति पद के लिए चयन कर बीजेपी ने विपक्षी द्रमुक के लिए दिक्कतें खड़ी कर दी हैं। कहा जा रहा है कि द्रमुक के लिए उनके नाम का विरोध करना मुश्किल हो सकता है, क्योंकि जिस राज्य से राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार खड़ा होता है, वहां के दल उसका समर्थन करते हैं। साल 2026 में तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव हैं और बीजेपी को इसका फायदा मिल सकता है। गौरतलब है कि संसद के मानसून सत्र के पहले दिन 21 जुलाई को जगदीप धनखड़ ने इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद उपराष्ट्रपति का पद खाली हो गया था।

स्वयंसेवक रहे हैं राधाकृष्णन
एनडीए के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन संघ के स्वयंसेवक रहे हैं। वह 16 साल की उम्र से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ गये थे। संघ की विचारधारा से आने के कारण राधाकृष्णन को संघ और बीजेपी के समर्थक वर्ग के बीच भी उम्मीद की दृष्टि से देखा जा रहा है और इस फैसले को अच्छा माना जा रहा है। वह पहले कांग्रेस में थे और फिर बीजेपी में शामिल हुए थे। सीपी राधाकृष्णन ने संघ, जनसंघ और बीजेपी में चार दशक से सक्रिय तौर पर काम किया है।

सीपी राधाकृष्णन का सियासी सफर
सीपी राधाकृष्णन 1974 में जनसंघ में स्टेट एक्जक्यूटिव कमेटी के मेंबर बने। 1996 में तमिलनाडु में बीजेपी के सचिव नियुक्त किये गये। 1998 में पहली बार कोयंबटूर से लोकसभा सासंद चुने गये। 1999 में फिर से कोयंबटूर सीट से सांसद चुने गये थे। वह साल 2004 से लेकर 2007 तक तमिलनाडु बीजेपी के अध्यक्ष रहे। 2020 से 2022 तक वह केरल भाजपा के ऑल इंडिया प्रभारी रहे। वह दो बार कोयंबटूर सीट से सांसद भी रहे हैं। उन्हें साल 2024 में महाराष्ट्र का राज्यपाल बनाया गया था। इससे पहले वह झारखंड के राज्यपाल भी रहे हैं। राधाकृष्णन 68 वर्ष के हैं और उनकी पैदाइश 20 अक्टूबर 1957 को तमिलनाडु के तिरुप्पुर में हुई। उन्होंने 2004 से 2007 में 19,000 किलोमीटर की ‘रथ यात्रा’ शुरू की जो 93 दिनों तक चली थी। इस यात्रा में देश भर की नदियों को जोड़ने, आतंकवाद से लड़ने, समान नागरिक संहिता लाने, अस्पृश्यता को समाप्त करने और नशीली दवाओं के दुरुपयोग से निपटने जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया गया था।
उन्हें NDA की ओर से उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाये जाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सीपी राधाकृष्णन ने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में, अपनी लगन, विनम्रता और बुद्धिमत्ता से विशिष्ट पहचान बनाई है। विभिन्न पदों पर रहते हुए, उन्होंने हमेशा सामुदायिक सेवा और वंचितों के सशक्तिकरण पर ध्यान केंद्रित किया है। उन्होंने तमिलनाडु में जमीनी स्तर पर व्यापक कार्य किया है।

















