मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में महादेवगढ़ मंदिर में जन्माष्टमी के पावन अवसर पर युवक अनीश ने सनातन धर्म में वापसी की। उसने स्वयं को भगवान श्रीकृष्ण का परम भक्त बताया और अपना नाम कृष्णा रखा।
अनीस का घर वापसी निर्णय अचानक नहीं था। बचपन से ही उनमें भगवान कृष्ण और महादेव के प्रति विशेष श्रद्धा रही है। उन्होंने श्रीमद्भागवत महापुराण की कथाओं को न केवल सुना बल्कि समझा भी। इलेक्ट्रिशियन का काम करने वाले अनीश का कई बार कथा पंडालों में जाना होता था, जहां वे विद्युत व्यवस्था संभालते थे।
इसी दौरान वे संतों और कथावाचकों की वाणी से गहराई से प्रभावित हुए। यही कारण था कि उन्होंने स्वयं को “कृष्णा” के रूप में स्वीकार करने का निर्णय लिया और जन्माष्टमी जैसे पावन पर्व पर इसे सार्वजनिक रूप से व्यक्त करने का क्षण उन्होंने चुना।
“मैंने बिना किसी दबाव के घर वापसी की”
मंदिर में उपस्थित भक्तों के सामने कृष्णा ने साफ शब्दों में कहा कि उनकी घर वापसी किसी दबाव, भय या प्रलोभन में नहीं हुई है। यह उनका व्यक्तिगत और आत्मिक निर्णय है। उनका कहना था कि वे अब वे स्वतंत्र रूप से, बिना किसी रोक-टोक के, कृष्ण की भक्ति कर पाएंगे। उन्होंने इस अवसर पर श्रद्धा से भरे नारे लगाए और मंदिर प्रांगण में उपस्थित लोगों को अपने निर्णय का साक्षी बनाया।
महादेवगढ़ मंदिर का ऐतिहासिक महत्व
खंडवा का महादेवगढ़ मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि सामाजिक-सांस्कृतिक चेतना का केंद्र भी है। कुछ वर्ष पूर्व भी इस मंदिर में अनेक परिवारों ने सामूहिक रूप से सनातन धर्म में वापसी की थी।
















