'सुभाष चंद्र बोस अंग्रेजों के डर से जर्मनी भागे', केरल सरकार के स्कूल की हैंडबुक में दावा, बढ़ा विवाद
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‘सुभाष चंद्र बोस अंग्रेजों के डर से जर्मनी भागे’, केरल सरकार के स्कूल की हैंडबुक में दावा, बढ़ा विवाद

वामपंथी अपने कार्टूनों में सुभाष चंद्र बोस को 'जापानी, जर्मन फासिस्टों का कुत्ते या बिल्ली' जैसा दिखाते थे। सुभाष चंद बोस ने भारत की आजादी के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया, उनके बारे में यह कहना कि वे डर से भाग गए, उनकी वीरता का अपमान है।

Written byPanchjanyaPanchjanya
Aug 16, 2025, 06:34 pm IST
inभारत, केरल
केरल सरकार के स्कूल की हैंडबुक (चित्र - साभार - केरल कौमुदी )

केरल सरकार के स्कूल की हैंडबुक (चित्र - साभार - केरल कौमुदी )

तिरुवनंतपुरम। केरल राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (SCERT) की कक्षा चार की हैंडबुक में दावा किया गया कि सुभाष चंद्र बोस “अंग्रेजों के डर से जर्मनी भाग गए थे। इससे विवाद बढ़ गया। यह कहा जा रहा है कि यह एक तथ्यात्मक गलती नहीं, बल्कि भारत के महानतम स्वतंत्रता सेनानियों में से एक के इतिहास को जानबूझकर विकृत करने का गंभीर प्रयास है।

सुभाष चंद बोस ने भारत की आजादी के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया, उनके बारे में यह कहना कि वे डर से भाग गए, उनकी वीरता का अपमान है। बोस डर से नहीं, बल्कि अंग्रेजों के  खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने और एक सैन्य मोर्चा बनाने के दृढ़ संकल्प के साथ भारत से बाहर गए थे।

उनकी आजाद हिंद फौज ब्रिटिश शासन के लिए एक बड़ी चुनौती थी और नेताजी की यह फौज आज भी लोगों को प्रेरित करती है। केरल कौमुदी की खबर के मुताबिक SCERT ने अपनी गलती स्वीकार कर ली है और अगले संस्करण में सुधार का वादा किया है। लेकिन केवल एक माफी और “भविष्य में सावधानी” का वादा काफी नहीं है। केरल और पूरे देश के लोगों को यह जानने का अधिकार है कि ऐसी गंभीर गलती को होने ही क्यों दिया गया, और इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई की जाएगी।

राष्ट्रीय नायक हैं सुभाष चंद्र बोस

सुभाष चंद्र बोस सिर्फ एक किताब का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि एक स्थायी राष्ट्रीय नायक हैं। केरल सरकार को इस बात का जवाब देना होकि कि क्या यह एक चूक थी, या इतिहास को फिर से लिखने का एक जानबूझकर किया गया प्रयास?

त्रुटि कहकर नहीं किया जा सकता खारिज

महान स्वतंत्रता सेनानी के प्रति इस तरह के शब्द और तथ्यों से छेड़छाड़ को  “त्रुटि” या चूक कहकर खारिज नहीं किया जा सकता। हैंडबुक तैयार करते समय सावधानी बरती जाती है। इन्हें कई स्तरों पर जांचा जाता है। लोगों का कहना है कि सीपीआई-एम के नेतृत्व वाली केरल सरकार और उसकी एजेंसियां का यह एक प्रयोग लगता है। उन्होंने यह टटोलने की  कोशिश की है कि इस तरह के ऐतिहासिक विकृतियों पर समाज कैसे प्रतिक्रिया देता है।

उठ रहे ये सवाल

  • हैंडबुक में इस तरह का गलत दावा डालकर, SCERT ने राष्ट्रीय स्मृति के साथ एक खतरनाक खेल खेला है?
  • क्या यह कदम कुछ राजनीतिक या सांप्रदायिक हितों को साधने के लिए उठाया गया था?
  • क्या यह उन नेताओं के योगदान को कम करने की सोची-समझी रणनीति थी जो एक विशेष वैचारिक ढांचे में फिट नहीं बैठते हैं?

 

वामपंथियों का नेताजी सुभाषचंद्र बोस के प्रति शब्दावली गाली-गलौज से भरी

वामपंथियो की नेताजी के प्रति दुराग्रह नया नहीं है। वे नेताजी सुभाषचंद्र बोस के लिए अपमानजक कार्टून अपने मुखपत्रों में छापते थे। 1940 में कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा प्रकाशित अंग्रेजी पुस्तिका ‘बेनकाब दल व राजनीति’ में नेताजी को ‘अंधा मसीहा’ कहा गया। फिर उनके कामों को कहा गया, ‘सिद्धांतहीन अवसरवाद, जिसकी मिसाल मिलनी कठिन है। धीरे-धीरे नेताजी के प्रति कम्युनिस्ट शब्दावली हिंसक और गाली-गलौज से भरती गई। जैसे, ‘काला गिरोह’, ‘गद्दार बोस’, ‘दुश्मन के जरखरीद एजेंट’, ‘तोजो (जापानी तानाशाह) और हिटलर के अगुआ दस्ते’, ‘राजनीतिक कीड़े’, ‘सड़ा हुआ अंग जिसे काटकर फेंकना है’,आदि। ये सब विशेषण सुभाष बोस और उनकी सेना आई़ एऩ ए़ (इंडियन नेशनल आर्मी) के लिए थे। तब कम्युनिस्ट मुखपत्रों, पत्रिकाओं में नेताजी के कई कार्टून छपे थे, जिससे कम्युनिस्टों की घोर अंधविश्वासी मानसिकता की झलक मिलती है (उन पर सधी नजर रखने वाले इतिहासकार स्व़ सीताराम गोयल के सौजन्य से वे कार्टून उपलब्ध हैं)। अधिकांश कार्टूनों में सुभाष बाबू को ‘जापानी, जर्मन फासिस्टों का कुत्ते या बिल्ली’ जैसा दिखाया गया है, जिससे उसका मालिक जैसे चाहे खेलता है। एक कार्टून में बोस को तोजो का मुखौटा, तो अन्य में भारतवासियों पर जापानी बम गिराने वाला दिखाया गया है।

एक में बोस को ‘गांधीजी की बकरी छीनने वाला’ दिखाया गया। एक कार्टून में तोजो एक गधे के गले में रस्सी डाले सवारी कर रहा है, उस गधे का मुंह बोस जैसा बना था। दूसरे में बोस को ‘तोजो का पालतू क्षुद्र बौना’ दिखाया, आदि।

Topics: केरल SCERT विवादवामपंथियों का इतिहासनेताजी का अपमानइतिहास से छेड़छाड़आजाद हिंद फौजकम्युनिस्ट पार्टीसुभाष चंद्र बोसइतिहास की विकृतिकेरल सरकार
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