राष्ट्रीय स्वयंयेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत 12-14 दिसंबर तक अंदमान-निकोबार के प्रवास पर रहे। सरसंघचालक के रूप में अंदमान-निकोबार में उनका यह पहला प्रवास रहा। इस दौरान उन्होंने कई कार्यक्रमों और बैठकों में भाग लिया और कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाया।
12 दिसंबर को श्री मोहनराव भागवत और केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह ने श्रीविजयपुरम (पोर्ट ब्लेयर का नया नाम) स्थित वीर सावरकर प्रेरणा पार्क में सावरकर जी की प्रतिमा का लोकार्पण किया। इस अवसर पर श्री मोहनराव भागवत ने कहा कि सावरकर जी के चरित्र में पूर्णता मिलती है। हर प्रकार की प्रतिभा उनके पास थी। सावरकर जी की एक-एक कविता में उनके व्यक्तित्व का एक-एक पहलू मिलता है। वे जन्मजात प्रतिभावान थे। गायन, लेखन, नाटक, कविता-सब कुछ उनके पास था। सावरकर जी का कृतित्व गगनचुंबी था। सावरकर जी का स्मरण देशभक्ति के लिए किया जाता है। सावरकर जी ने जिन बातों को लेकर काम किया, उन बातों को आचरण में लाने का प्रयास हमें अपने जीवन में करना पड़ेगा।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री अमित शाह ने कहा कि स्वतंत्रता से पहले जिसे अंदमान लाया जाता था, परिवार उसे भुला देता था। उस जमाने में कोई यह नहीं सोचता था कि काला पानी की सजा से कोई वापस आएगा। यदि कोई वापस आता भी था, तो शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह टूट चुका होता था। मगर आज यह स्थान तीर्थस्थल बना है, क्योंकि वीर सावरकर ने यहां अपने जीवन के अत्यंत कठिन दिन बिताए हैं। यह स्थान सुभाष बाबू के जीवन से भी जुड़ा है। उन्होंने भारत की जिस भूमि को सबसे पहले स्वतंत्र करवाया, यह भूमि वही है। उन्होंने ही इस भूमि को ‘शहीद’ और ‘स्वराज’ के नाम से संबोधित करने का सुझाव दिया था, जिसे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साकार किया।
13 दिसंबर को श्रीविजयपुरम के नेताजी स्टेडियम में विशाल हिंदू सम्मेलन आयोजित हुआ। इसमें अंदमान-निकोबार द्वीप समूह के अलग-अलग स्थानों से आए लगभग 25,000 लोगों ने भाग लिया। इसे संबोधित करते हुए श्री मोहनराव भागवत ने लोगों से आह्वान किया कि हिंदू समाज की एकता के लिए कार्य करें। इसी दिन समरसता बैठक हुई। इसमें संघ के आनुषांगिक संगठनों के प्रमुख कार्यकर्ताओं के अलावा आनंद मार्ग, गायत्री परिवार, इस्कॉन जैसे संगठनों के वरिष्ठ कार्यकर्ता भी शामिल हुए।
इन सबका मार्गदर्शन सरसंघचालक जी ने किया। 14 दिसंबर को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में अंदमान एवं निकोबार विभाग द्वारा डी.बी.आर.ए.आई.टी. ऑडिटोरियम में ‘प्रबुद्ध नागरिक सम्मेलन’ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर श्री मोहनराव भागवत ने बताया कि संघ किस प्रकार गुणवान स्वयंसेवकों के माध्यम से स्वस्थ समाज और सशक्त राष्ट्र के निर्माण हेतु कार्य करता है।
उन्होंने संघ से जुड़ी विभिन्न भ्रांतियों का भी निराकरण करते हुए कहा कि संघ का उद्देश्य केवल सज्जन अर्थात् गुणवान मनुष्यों का निर्माण करना है, जो निःस्वार्थ भाव से समाज में मूल्य आधारित जीवन का प्रसार कर राष्ट्र गौरव और विकास को सुदृढ़ करें। कार्यक्रम में प्रश्नोत्तर सत्र भी हुआ, जिसमें श्री विजयपुरम् के नागरिकों ने राष्ट्रीय सुरक्षा, शिक्षा और राष्ट्रीय दृष्टिकोण से जुड़े प्रश्न पूछे। सरसंघचालक जी ने कहा कि प्रत्येक नागरिक अपनी प्राचीन भारतीय सनातन संस्कृति को अपनाकर आत्मनिर्भरता (स्वदेशी आत्मनिर्भरता) को प्रोत्साहित करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभा सकता है।
सम्मेलन में स्थानीय जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ नागरिक, सेवानिवृत्त अधिकारी, शिक्षाविद्, चिकित्सक, अधिवक्ता, प्रतिष्ठित व्यापारी, कलाकार, विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक गैर-सरकारी संगठनों के सदस्य और पत्रकार उपस्थित रहे।

















