अभी हाल ही में केरल सरकार ने अपनी पीठ यह कहते हुए थपथपाई थी कि केरल अत्यधिक गरीबी से मुक्त होने वाला पहला प्रदेश बन गया है। और बार-बार केरल सरकार अपनी पीठ यह भी कहते हुए थपथपाती रहती है कि वह सबसे अधिक कल्याणकारी सरकार है और वहाँ पर गरीब और बुजुर्गों का सबसे ज्यादा ध्यान रखा जाता है। मगर क्या जो दिखता है, वही सच है? क्या गरीबों की कथित मसीहा सरकार का यही सच है या फिर सच कुछ और ही है?
गरीबी मिटाने के दावे के बीच बेघर हुए बुजुर्ग
जिस केरल में अत्यधिक गरीबी को मिटाने का दावा किया जा रहा था, उसी केरल में एक वृद्ध दम्पत्ति को घर से बेघर होना पड़ा और इसके पीछे कारण गरीबी ही रही। मगर इसके पीछे एक कारण उस आश्वासन की विफलता भी है, जो मुख्यमंत्री ने विधानसभा में दिया था कि सहकारी बैंक ऋण के कारण किसी का एकमात्र घर नहीं छीना जाएगा।
वृद्ध दम्पत्ति की दर्दनाक स्थिति
केरल के पथनमथिट्टा जिले के वझूर ग्राम पंचायत में 84 वर्षीय जनार्दनन और उनकी 70 वर्षीय पत्नी विजयम्मा के सिर पर भी सहकारी बैंक का ही ऋण था, मगर वे इसे भरने में असमर्थ रहे। और फरवरी 2025 में विधानसभा में मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए इस आश्वासन के बाद भी कि सहकारी बैंक ऋण के कारण किसी को भी घर से बेदखल नहीं किया जाएगा, इन बुजुर्गों को तब घर से बाहर कर दिया गया, जब वे अपनी ढलती उम्र में तमाम बीमारियों से ग्रस्त हैं।
रात दरवाजे पर गुजारनी पड़ी
इन दोनों ने ही रात अपने बंद घर के बाहर गुजारी और अब इनके पास रहने का कोई अन्य स्थान नहीं है। परंतु उन्हें इस प्रकार घर से बेघर किया किसने? आखिर क्या कारण है कि दो अत्यंत बुजुर्गों को उम्र की इस बेला में बेघर होना पड़ गया है?
क्या है पूरा मामला?
केरल के पथनमथिट्टा जिले के वझूर ग्राम पंचायत में 84 वर्षीय जनार्दनन ने वर्ष 2014 में ऋण लिया था और वे अपने ऋण को चुकाने में विफल रहे। उन्होंने जिस बैंक से ऋण लिया था, वह थिरुवल ईस्ट कोऑपरेटिव बैंक है, जिसका नियंत्रण CPI(M) के हाथ में है। और उसी ने अब इन दो वृद्ध असहाय लोगों को बेघर कर दिया है।
बैंक की कार्रवाई और बुजुर्गों का आरोप
जनार्दनन के अनुसार अधिकारी उनके घर बीती रात पहुंचे और उन्हें बाहर निकालकर ताला डाल दिया। बैंक अधिकारियों ने कहा कि उन्हें यह काम करना होगा, नहीं तो उन्हें नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा। NDTV से बात करते हुए इन दोनों ने कहा कि घर से बेघर होने के बाद उन्हें रात अपने घर के बाहर गुजारनी पड़ी।
बैंक का पक्ष – नोटिस दिया गया था
वहीं इस मामले में बैंक का कहना है कि उन्होंने कुछ गलत नहीं किया है। दरअसल जब जनार्दनन अपना ऋण चुकाने में विफल रहे तो उन्हें नोटिस दिया गया था।
ढाई लाख का ऋण, दोगुनी राशि चुकाने के बाद भी बेदखली
यह बात सामने आई है कि जनार्दनन ने बैंक से ढाई लाख का ऋण लिया था। समय के साथ उन्होंने ब्याज सहित इस रकम की दोगुनी रकम चुका दी है, मगर अभी तक वे मूल राशि नहीं चुका पाए थे और इसके बाद भी वे बैंक वालों को नीलामी और जब्तीकरण से रोक नहीं सके।
सरकार द्वारा पारित कानून
अपने प्रांत से अत्यधिक गरीबी गायब करने का दावा करने वाली विजयन सरकार ने 9 अक्टूबर 2025 को केरल सिंगल ड्वेलिंग प्लेस प्रोटेक्शन बिल 2025 पारित किया था। इसका लक्ष्य था कि जिन लोगों के पास केवल एक ही घर है और वे ऋण चुकाने में विफल रहते हैं, तो उन्हें घर से बेघर न किया जाए।
कानून लागू, लेकिन बुजुर्ग फिर भी बेघर
मगर अक्टूबर से दिसंबर तक ही जनार्दनन को बेदखल किया जा चुका है। बैंक ने घर को नीलाम करके बेच भी दिया है और उसे पड़ोसी ने ही खरीदा है।
भाजपा ने साधा निशाना
इस घटना को लेकर CPI(M) के नेता बचाव में हैं, जबकि केरल भाजपा इस पर हमलावर है। भाजपा पार्षद दीप्ति दामोदरन के अनुसार बैंक के अध्यक्ष जनता से झूठ बोल रहे हैं। उन्होंने कहा कि गाँव में हर कोई जानता है कि बुजुर्ग दम्पत्ति कई दशकों से उस घर में रह रहे थे और जमीन की कीमत कम से कम 25 लाख रुपए है, मगर नीलामी केवल 11 लाख रुपए में हुई है। कुछ स्थानीय लोगों का भी कहना है कि यह केवल कम कीमत में नीलामी के कारण किया गया है।
चुनावों से ठीक पहले CPI(M) की छवि पर चोट
यह घटना तब हुई है, जब स्थानीय चुनाव सिर पर हैं। पिछले चुनावों में पथनमथिट्टा में LDF ने जीत हासिल की थी, मगर इस बार चुनावों के समय ऐसी घटनाओं के कारण कहीं न कहीं पार्टी की नकारात्मक छवि बन रही है।

















