नई दिल्ली। भारत की अध्यक्षता में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (18th BRICS Summit) का नई दिल्ली में ऐतिहासिक समापन हुआ. “बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी” की थीम पर आयोजित इस दो दिवसीय शिखर सम्मेलन में सभी सदस्य देशों के शीर्ष नेताओं ने वैश्विक शासन व्यवस्था में आमूलचूल सुधार, बहुपक्षवाद की मजबूती और अंतरराष्ट्रीय शांति व सुरक्षा के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहराई. सम्मेलन के समापन पर विस्तृत ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ सर्वसम्मति से अंगीकार किया गया, जिसमें विकासशील देशों (Global South) की आवाज को बुलंद करने और निष्पक्ष वैश्विक व्यवस्था बनाने का स्पष्ट रोडमैप पेश किया गया है.
घोषणापत्र में भारत की सफल अध्यक्षता की भूरि-भूरि प्रशंसा की गई, जिसके अंतर्गत वर्ष भर में 30 प्रमुख शहरों में 400 से अधिक उच्चस्तरीय मंत्रिस्तरीय और विषयगत बैठकों का सफल आयोजन हुआ.

UNSC सुधार और भारत-ब्राजील की स्थायी सदस्यता का पुरजोर समर्थन
नई दिल्ली घोषणापत्र में संयुक्त राष्ट्र (UN) और विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के व्यापक पुनर्गठन पर विशेष बल दिया गया. घोषणापत्र में कहा गया कि वैश्विक संस्थाओं को समकालीन वास्तविकताओं के अनुरूप अधिक लोकतांत्रिक, प्रतिनिधि और प्रभावी बनाया जाना अनिवार्य है.
“सुरक्षा परिषद में विकासशील देशों और अफ्रीका, एशिया व लैटिन अमेरिका के उभरते राष्ट्रों का प्रतिनिधित्व बढ़ना चाहिए। सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य के रूप में चीन और रूस ने यूएन और सुरक्षा परिषद में भारत तथा ब्राजील की महत्वपूर्ण और बड़ी भूमिका की आकांक्षाओं का स्पष्ट समर्थन दोहराया है।” – 18वां ब्रिक्स नई दिल्ली घोषणापत्र
इसके साथ ही, नेताओं ने रेखांकित किया कि संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में अब तक किसी भी महिला को महासचिव पद पर नहीं चुना गया है, जबकि अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका के प्रतिनिधियों का शीर्ष पदों पर प्रतिनिधित्व अत्यंत सीमित रहा है. घोषणापत्र में अंतरराष्ट्रीय संगठनों में महिलाओं और ग्लोबल साउथ के प्रतिनिधियों की समान भागीदारी की पुरजोर वकालत की गई.
एक नजर में 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (नई दिल्ली) के मुख्य परिणाम
| प्रमुख क्षेत्र / स्तंभ | नई दिल्ली घोषणापत्र के ऐतिहासिक निर्णय एवं सहमति |
|---|---|
| वैश्विक शासन एवं UNSC सुधार | यूएन सुरक्षा परिषद में अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका का प्रतिनिधित्व बढ़ाने की मांग; भारत व ब्राजील के दावे का समर्थन. |
| वित्तीय एवं स्थानीय मुद्रा व्यापार | राष्ट्रीय मुद्राओं में सीमा-पार व्यापार निपटान, पेमेंट टास्क फोर्स (BPTF) को बढ़ावा; गिफ्ट सिटी (गुजरात) में ‘ब्रिक्स रिस्क लैब’ का प्रस्ताव. |
| आतंकवाद पर कड़ा रुख | 22 अप्रैल 2025 के जम्मू-कश्मीर आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा; सीमा पार आतंकवाद और दोहरे मापदंड को पूर्णतः खारिज किया. |
| कृषि एवं खाद्य सुरक्षा | ब्रिक्स ग्रेन एक्सचेंज (BRICS Grain Exchange) पहल, इंदौर कृषि बैठक से ‘BRICS AGRIN’ नेटवर्क और बीज प्रणालियों के मंच का समर्थन. |
| स्वास्थ्य एवं चिकित्सा | चंडीगढ़ बैठक के निष्कर्षों पर मुहर; निमहंस (NIMHANS) के नेतृत्व में मानसिक स्वास्थ्य एक्सीलेंस नेटवर्क व संक्रामक रोग अर्ली वार्निंग सिस्टम. |
| आगामी अध्यक्षता | वर्ष 2027 में 19वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी के लिए चीन को पूर्ण समर्थन. |
जम्मू-कश्मीर आतंकी हमले की कड़ी निंदा, सीमा पार आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस
घोषणापत्र में आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों की कड़े शब्दों में भर्त्सना की गई. सदस्य देशों ने स्पष्ट किया कि किसी भी उद्देश्य या विचारधारा के नाम पर किए गए आतंकी कृत्यों को उचित नहीं ठहराया जा सकता.
आतंकवाद और साइबर अपराध पर वैश्विक संकल्प:
- 22 अप्रैल 2025 के आतंकी हमले की निंदा: जम्मू-कश्मीर में 22 अप्रैल 2025 को हुए कायराना आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की गई, जिसमें 26 निर्दोष नागरिकों की जान गई थी और कई घायल हुए थे.
- सीमा पार फंडिंग और सेफ हेवन का खात्मा: आतंकियों की सीमा पार आवाजाही, टेरर फंडिंग और सुरक्षित पनाहगाहों को समाप्त करने पर बल दिया गया और आतंक के खिलाफ लड़ाई में दोहरे मापदंडों को पूरी तरह खारिज किया गया.
- अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक संधि (CCIT): संयुक्त राष्ट्र के तत्वावधान में लंबे समय से लंबित सीसीआईटी (CCIT) को शीघ्र अंतिम रूप देकर लागू करने की मांग की गई.
- डिजिटल फ्रॉड और स्कैम नेटवर्क: सीमा पार संचालित होने वाले ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी, ‘स्कैम कंपाउंड्स’ और मनी लॉन्ड्रिंग सिंडिकेट्स के खिलाफ कड़े अंतरराष्ट्रीय समन्वय का आह्वान किया गया.
स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और गुजरात के गिफ्ट सिटी में ‘ब्रिक्स रिस्क लैब’
ब्रिक्स देशों ने आर्थिक संप्रभुता और वित्तीय लचीलेपन को सशक्त करने के लिए ब्रिक्स पेमेंट टास्क फोर्स (BPTF) के प्रयासों की सराहना की. सदस्य देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं (Local Currencies) में व्यापार निपटान और निवेश को गति देने पर सहमति जताई गई, जिससे लेन-देन त्वरित, सुरक्षित, पारदर्शी और कम लागत वाला बन सके.
इसके अतिरिक्त, एक आत्मनिर्भर पुनर्बीमा और बीमा अवसंरचना विकसित करने के उद्देश्य से भारत द्वारा गुजरात के गिफ्ट सिटी (GIFT City IFSC) में ‘ब्रिक्स रिस्क लैब’ (BRICS Risk Lab) स्थापित करने के प्रस्ताव का स्वागत किया गया. साथ ही, आईएमएफ (IMF) के 16वें और 17वें कोटा रिव्यू में विकासशील देशों के कोटा और वोटिंग शेयर में बढ़ोतरी की जोरदार वकालत की गई.

वैश्विक शांति, गाजा-सूडान संकट और भारत की पहलें
घोषणापत्र में पश्चिम एशिया, गाजा, लेबनान, सीरिया और सूडान के बिगड़ते हालातों पर गहरी चिंता व्यक्त की गई. गाजा में तत्काल और निर्बाध मानवीय सहायता, स्थायी युद्धविराम और 1967 की सीमाओं के आधार पर संप्रभु फलस्तीन राष्ट्र के निर्माण के साथ द्वि-राष्ट्र समाधान (Two-State Solution) का पुनः समर्थन किया गया. लेबनान में यूनीफिल (UNIFIL) शांति सैनिकों पर हुए हमलों की तीखी निंदा की गई.
भारत द्वारा शुरू किए गए इंटरनेशनल बिग कैट्स अलायंस (IBCA), आपदा रोधी अवसंरचना गठबंधन (CDRI) और पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली (LiFE) से जुड़े मंचों को ब्रिक्स देशों ने व्यापक समर्थन दिया. घोषणापत्र के अंत में भारत की ऐतिहासिक अध्यक्षता के लिए आभार जताते हुए वर्ष 2027 में चीन में होने वाले 19वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए पूर्ण सहयोग का संकल्प लिया गया.












