E20 इथेनॉल मिश्रण: भारत की ऊर्जा स्वतंत्रता और ग्रामीण सशक्तिकरण की दिशा में कदम
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E20 इथेनॉल मिश्रण: भारत की ऊर्जा स्वतंत्रता और ग्रामीण सशक्तिकरण की दिशा में कदम

भारत का E20 इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम कार्बन उत्सर्जन में 30% कमी और किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण। जानें E20 के लाभ, भ्रम और सच्चाई।

Written byवैभव डांगेवैभव डांगे
Aug 13, 2025, 02:43 pm IST
inविश्लेषण
Petrol Pakistan reserve

प्रतीकात्मक तस्वीर

भारत में 20% इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल (E20) की पहल प्रकृति और मानवीय विकास के लिए महत्वपूर्ण कदम है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय का स्पष्टीकरण (अगस्त 2025) E20के कारण “भारी माइलेज हानि” जैसी की गढ़ी गई थ्योरी से जो चिंता उत्पन्न हुई उससे हमें बाहर निकालता है। मैं लम्बे समय से इथेनॉल, बायो-सीएनजी और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में काम कर रहा हूं। इसलिए मुझे लगता है कि देश में E20 को लेकर जिस तरह की धारणा बनाने का प्रयास हो रहा है उसकी पूरी तस्वीर साफ करने का समय आ गया है।

इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कम होगा कार्बन उत्सर्जन

हमें गंभीरता से समझना चाहिए कि यह भारत सरकार का राष्ट्रीय कार्यक्रम है। जिसका उद्देश्य कार्बन उत्सर्जन को कम करना और किसानों की आय बढ़ाना है। IOCL, ARAI, SIAM और नीति आयोग द्वारा किए गए शोध में इस बात की पुष्टि होती है कि E10की तुलना में E20 टेलपाइप कार्बन उत्सर्जन को लगभग 30% कम करता है। नीति आयोग के एक अध्ययन में पाया गया किगन्ना-आधारित इथेनॉल से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन 65 प्रतिशत और मक्का-आधारित इथेनॉल से 50 प्रतिशत तक कम होता है।

इथेनॉल ब्लेंडिंग से बची 1.44 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा 

पिछले 11 वर्षों में सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने पेट्रोल में इथेनॉल मिलाकर 1.44 लाख करोड़ रुपये का विदेशी मुद्रा बचाया है और 736 लाख टन कार्बन-डाई-ऑक्साइड उत्सर्जन घटाया, जो 30 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है। यह 245 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल का विकल्प बना है, जो पर्यावरण बचाने की दिशा में भारत के सकारात्मक योगदान को दर्शाता है।
E20 का ऑक्टेन नंबर (108.5) पेट्रोल (84.4) से ज्यादा है, जिससे गाड़ियां का एक्सीलरेशन (वेग में वृद्धि) बेहतर हो जाता है। यह इंजन की नॉकिंग कम करता है और एयर-फ्यूल मिक्स को ज्यादा घना बनाकर पावर बढ़ाता है। पहले भारत में बिकने वाले पेट्रोल का RON (रिसर्च ऑक्टेन नंबर) 88 था, जो अब BS-VI मानकों के तहत 91 हो गया है। E20 मिलाने से यह बढ़कर 95 हो गया है, जिससे गाड़ियों के प्रदर्शन में सुधार हुआ है।

E20 के खिलाफ फैलाया जा रहा झूठ

यह देखने में आया है कि पिछले कुछ समय से E20 को लेकर भ्रम फैलाने की हर संभव कोशिश हो रही है। तर्क यह परोसा गया कि इसके कारण गाड़ियों का माइलेज कम हो गया है। इस तरह की थ्योरी पेश करने से जो भ्रम उत्पन्न हो रहा है, उसे दूर करने के लिए भारत सरकार सामने आई है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने “ड्रास्टिक” माइलेज गिरने के दावे को गलत ठहराते हुए साफ किया है कि गाड़ी का माइलेज ड्राइविंग हैबिट, मेंटेनेंस, टायर प्रेशर, एलाइनमेंट और एसी के इस्तेमाल पर भी निर्भर करता है। मंत्रालय ने कहा कि कई निर्माता 2009 से E20-कम्पैटिबल गाड़ियां बना रहे हैं, जिनमें माइलेज पर कोई खास असर नहीं पड़ता। मंत्रालय चाहता है कि वाहन मालिकों की माइलेज संबंधी आशंका दूर हो, इसके लिए उन्हें कहा गया है कि वे बेहिचक अधिकृत सर्विस सेंटर्स में जाएं, वहां उन्हें लगता है कि उनकी गाड़ी का E20 के लिए ट्यूनिंग या पार्ट बदलने की जरूरत है, तो सर्विस सेंटर्स का पूरा नेटवर्क मदद के लिए तैयार है।

इथेनॉल ने किसानों को बनाया ऊर्जादाता

इथेनॉल कार्यक्रम ग्रामीण परिवर्तन का एक सशक्त माध्यम बना है। इस साल 20% ब्लेंडिंग के साथ किसानों को 40,000 करोड़ रुपये का भुगतान और 43,000 करोड़ की विदेशी मुद्रा बचाने की उम्मीद है। किसान अब केवल अन्नदाता नहीं, बल्कि ऊर्जादाता भी हैं। यह योजना किसान की आर्थिक क्षमता और गरिमा को मजबूत करती है।

कुछ सोशल मीडिया योद्धाओं ने यह भी प्रचारित करने का प्रयास किया कि जिन गाड़ियों में E20 का इस्तेमाल किया जाएगा, उसके नुकसान का खर्च इंश्योरेंस कंपनियां नहीं उठाएंगी। वास्तविकता ये है कि एक इंश्योरेंस कंपनी के ट्वीट को भ्रम फैलाने वाले तंत्र की तरफ से तोड़-मरोड़कर इस तरह से प्रस्तुत किया गया जिससे लोगों के मन में यह बात घर कर जाय कि इंश्योरेंसकम्पनियां E20 ईंधन वाली गाड़ियों से पल्ला झाड़ रही हैं। जबकि हकीकत ये है कि E20 ईंधन के इस्तेमाल वाली गाड़ियों के इंश्योरेंस की वैधता पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

इसे भी पढ़ें: अमेरिका में सिख बुजुर्ग पर नस्लीय हमला, गोल्फ क्लब मारकर हड्डी तोड़ी, ट्रक पर लिखा ‘गो बैक टु योर कंट्री’

देश में एक ऐसा तंत्र सक्रिय है जो हर तरह से E20 ईंधन को गलत ठहराने पर तुला हुआ है। उसी तंत्र की तरफ से नया शिगूफायह छोड़ा गया कि जब इथेनॉल सस्ता है तो E20 की कीमत भी कम होनी चाहिए। लोगों को यह जानना जरूरी है कि जब 2020-21 में नीति आयोग की रिपोर्ट बनी थी, तब इथेनॉल सस्ता था। अब इसकी खरीद कीमत पेट्रोल से ज्यादा है, जो औसतन 71.32 रुपये प्रति लीटर, जिसमें ट्रांसपोर्ट और जीएसटी भी शामिल है। मक्का-आधारित इथेनॉल 71.86 रुपये प्रति लीटर है।

इथेनॉल की कीमतें

गन्ना आधारित:
– 2021-22: 46.66/लीटर
– 2024-25: 57.97/लीटर
मक्का आधारित:
– 2021-22: 52.92/लीटर
– 2024-25: 71.86/लीटर

2021 में बना रोडमैप

E20 का रोडमैप 2021 में बना था। यह पहल भारत सरकार के इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम का हिस्सा है। जिसका उद्देश्य देश की तेल पर निर्भरता कम करना और वाहनों से निकलने वाले उत्सर्जन को स्वच्छ बनाना है। पहले इथेनॉल मिश्रण का औसत 12.06 प्रतिशत था, जो बढ़कर 14.6 प्रतिशत हो गया था। फरवरी, 2025 में यह 19.6 प्रतिशत तक पहुंच गया और थोड़े समय बाद ही 20 प्रतिशत का लक्ष्य भी पार कर लिया गया है।हमें बहुत गहराई से समझना होगा कि इथेनॉल-पेट्रोल का मिश्रण जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता के स्थान पर किसान द्वारा उत्पादित ईधन का सेतु है।

हमें भारत की प्रगति पर अड़चन पैदा करने की कोशिश को समझना होगा। भारत की दुनिया के समक्ष पर्यावरण सुरक्षा के लिए जो प्रतिबद्धता प्रगट की गई है, उसमें खरा उतरने के लिए उन सभी विकल्पों को अपनाना होगा जो कृषि-उत्पादित, जलवायु-अनुकूलता के साथ राष्ट्र के लिए हितकारी हों। भारत सदियों से प्रयोगवादी रहा है और नया भारत नित्य नए प्रयोगों के साथ आगे बढ़ते हुए नए मुकाम को हासिल करेगा।

(लेखक बुनियादी ढांचा, सतत गतिशीलता, जैव ऊर्जा विषयों के सार्वजनिक नीति विशेषज्ञ हैं)

(डिस्क्लेमर: ये लेखक के स्वयं के विचार हैं। आवश्यक नहीं कि पाञ्चजन्य उनसे सहमत हो)

Topics: E20 ethanolपर्यावरण संरक्षणfarmer incomeenvironmental protectionethanol blendingEnergy Independencepetrol mileagecarbon emissionsgreenhouse gasE20 इथेनॉलrural empowermentकार्बन उत्सर्जनBS-VI standardकिसान आयइथेनॉल मिश्रणपेट्रोल माइलेजग्रामीण सशक्तिकरण
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