देश में पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने को लेकर काफी चर्चा चल रही है। कुछ लोग कह रहे हैं कि इससे गाड़ी का माइलेज कम हो जाता है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस मुद्दे पर अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि एथेनॉल का इस्तेमाल रेसिंग कारों में भी हो रहा है और इससे फायदे भी हैं।
रेसिंग कारों में एथेनॉल का इस्तेमाल
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि रेसिंग कारों में एथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल इस्तेमाल किया जाता है। इससे गाड़ी की एक्सेलरेशन यानी तेजी से रफ्तार पकड़ने की क्षमता बेहतर होती है। नॉकिंग की समस्या भी कम होती है। हां, माइलेज थोड़ा कम हो सकता है, लेकिन वे कहते हैं कि कई वजहों से ऐसा होता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह बात अच्छी तरह साबित हो चुकी है।
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सभी स्टेकहोल्डर्स से बातचीत के बाद फैसला
पुरी ने बताया कि इस नीति को लागू करने से पहले SIAM (सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स) और ARAI (ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया) समेत सभी संबंधित पक्षों से चर्चा की गई। कुछ लोग कह रहे थे कि इंश्योरेंस कंपनियां अब इस फ्यूल को कवर नहीं करेंगी, लेकिन मंत्री ने साफ किया कि इंश्योरेंस कंपनियों ने पहले ही बता दिया है कि ऐसा कोई मसला नहीं है।
20% से आगे बढ़ने से पहले टेस्ट
भारत में फिलहाल 20 प्रतिशत एथेनॉल ब्लेंडिंग हो रही है। पुरी ने कहा कि अगर 25 प्रतिशत तक जाना है तो सभी जरूरी टेस्ट पूरे होने के बाद ही फैसला लिया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि देश के बढ़ते बाजार में इलेक्ट्रिक वाहनों, हाइब्रिड गाड़ियों, CNG और बायोफ्यूल वाली गाड़ियों के लिए काफी जगह है। हर तरह की टेक्नोलॉजी के साथ आगे बढ़ने की गुंजाइश है।
तेल कंपनियों का नुकसान
मंत्री ने मिडिल ईस्ट संकट के चलते कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का जिक्र किया। 30 जून तक की अवधि में तेल मार्केटिंग कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और LPG बेचने में 74,781 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। अप्रैल से जून 2026 के बीच कुल अंडर-रिकवरी यानी लागत से कम पर बेचने का घाटा 1,88,871 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। कंपनियां अभी भी पुराने महंगे स्टॉक का इस्तेमाल कर रही हैं।
कीमतों में कटौती की संभावना
जब उनसे पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कटौती के बारे में पूछा गया तो पुरी ने कहा कि अगर कच्चे तेल की कीमतें 2-3 महीने तक कम रहती हैं तो देखा जाएगा। अभी यह सिर्फ संभावना है। अमेरिका में E10 फ्यूल आम है और E15 का दायरा बढ़ रहा है। वहां लाखों फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां E85 पर चलती हैं। ब्राजील में E27 अनिवार्य है और कई गाड़ियां 100 प्रतिशत एथेनॉल पर भी चल सकती हैं।
















