India Pakistan Partition: “ऑपरेशन सिंदूर तमाशा था? पाकिस्तान पर कार्रवाई में भारतीय वायुसेना के कितने लड़ाकू विमान मार गिराए गए? बालाकोट में सर्जिकल स्ट्राइक हुई, इसका क्या सबूत है, पहलगाम आतंकवादी हमले में पाकिस्तान का हाथ है, इस बात के कोई सुबूत नहीं हैं। पुलवामा आतंकवादी हमले में इस्तेमाल आरडीएक्स कहां से आया?” ये बयान और ये सवाल पढ़ने के बाद आप कहेंगे कि ये सब पाकिस्तान की ओर से आए होंगे। जी नहीं, ये सारे बयान भारतीय विपक्षी दलों के हैं। इनमें से कई बयान तो देश की संसद में दिए गए हैं। इसका सीधा अर्थ है, पाकिस्तान और भारत के विपक्षी दलों का सुर एक है। तो क्या इन दलों और पाकिस्तान का लक्ष्य भी एक है? मसला अब बेहद संवेदनशील हो चुका है।

पाकिस्तान ने हमेशा से भारत की अखंडता और संप्रभुता को निशाने पर रखा है। क्या इसके मायने ये नहीं हैं कि जो खतरा इस देश को पाकिस्तान से है, वह कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष से भी हो सकता है? कोई यह कह सकता है कि विपक्ष लोकतंत्र में सवाल पूछेगा। पूछे, किसने मना किया है। लेकिन यह मसला सरकार और विपक्ष का बिल्कुल नहीं है।
एक मोहम्मद अली जिन्ना हुए और देश बंट गया। लेकिन इस समय देश की गली-गली में ‘जिन्ना’ रुदाली कर रहे हैं। कौन हैं वे लोग जो देश की संप्रभुता और अखंडता के दुश्मन हैं? इन कुछ सवालों पर गौर कीजिए और इनके जवाब ढूंढिए-
- किसी सरकार के विरोध में कोई राजनीतिक दल इस हद तक चला जाए कि उसकी भाषा और पाकिस्तान की बोली में कोई अंतर न रह जाए, तो आप उसे क्या कहेंगे?
- उन लोगों को क्या कहेंगे, जो अपने देश के प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री, गृह मंत्री, विदेश मंत्री से ज्यादा विश्वास दूसरे मुल्क के राष्ट्राध्यक्ष पर करते हों?
- उन नेताओं को क्या कहेंगे, जो ऑपरेशन सिंदूर, सर्जिकल स्ट्राइक में यह ढूंढने का प्रयास करते हों कि हमारी सेना से क्या चूक हुई और उसका क्या नुकसान हुआ?
- उन विपक्षी दलों के विषय में भी आपकी एक राय जरूरी है, जो गलवान से लेकर मुरीदके तक में भारतीय सेना के शौर्य एवं पराक्रम को नहीं पचा पा रहे हैं?
राजनीति देश की, बोली पाकिस्तान की
इन सवालों के बीच चार अगस्त 2025 को सर्वाेच्च न्यायालय से एक बड़ी महत्वपूर्ण खबर आई, जिसमें इन तमाम सवालों का जवाब छिपा है। दरअसल, लोकसभा में विपक्ष के नेता व कांग्रेस सांसद राहुल गांधी जहां-तहां ये कहते रहे हैं कि चीन ने भारत की 2000 वर्ग किलोमीटर जमीन कब्जा ली है। इस पर सर्वाेच्च न्यायालय ने पूछा, आपको कैसे पता चला कि चीन ने भारत की 2000 वर्ग किलोमीटर जमीन हड़प ली है? अगर आप सच्चे भारतीय होते तो ऐसी बात नहीं करते।
जी हां, अगर सच्चे भारतीय होते तो…। यानी यह आकलन अब सर्वोच्च न्यायालय की न्यायिक प्रक्रिया में भी आ गया है कि राहुल गांधी सच्चे भारतीय हैं या नहीं। यह बात सर्वाेच्च न्यायालय में अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति ए. जी. मसीह की खंडपीठ ने कही। जो बात चार अगस्त 2025 को सर्वोच्च न्यायालय ने कही, वह बात तो यह देश, देश का हर नागरिक कितने ही सालों से महसूस कर रहा है, सुन रहा है।
यह बात अकेले राहुल गांधी की नहीं। कांग्रेस के सहयोग में बना ‘इंडी’ गठबंधन का हर दल कदम-कदम पर यह अहसास कराता रहा है कि ये दल राजनीति तो भारत में करते हैं, लेकिन स्वर पाकिस्तान जैसा होता है।
सीखने की जरूरत
राजनीति कैसी होती है और कैसी होनी चाहिए, इसका एक उदाहरण- 2013 की बात है। पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ संयुक्त राष्ट्र की बैठक में भाग लेने के लिए अमेरिका गए। तब मनमोहन सिंह भारत के प्रधानमंत्री थे और बराक ओबामा अमेरिका के राष्ट्रपति। नवाज शरीफ ने अमेरिका में बयान दिया कि ‘भारत में कोई भी घटना होती है, मनमोहन सिंह मेरी शिकायत ओबामा से करते हैं। भारत के प्रधानमंत्री का आचरण एक देहाती औरत जैसा है।’ तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। यह सुनकर वह आगबबूला हो उठे।
उन्होंने सार्वजनिक मंच से कहा- ‘भारत में हम अपने प्रधानमंत्री से लड़ेंगे। उनकी नीतियों का विरोध करेंगे। लेकिन वह 125 करोड़ भारतीयों के प्रधानमंत्री हैं। नवाज शरीफ, आपकी कौन सी औकात कि उन्हें आप देहाती औरत कहो।’ एक वह राजनीति थी, जिसमें सरकार का सबसे मुखर आलोचक कह रहा है कि खबरदार, आप मेरे पीएम के बारे में बदजुबानी नहीं कर सकते। एक यह राजनीति, कि प्रधानमंत्री से लेकर विदेश मंत्री तक ये कह चुके हैं कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान संघर्ष विराम लेकर किसी विदेशी नेता से मोदी की बात तक नहीं हुई। लेकिन राहुल गांधी और ‘इंडी’ गठबंधन के बाकी नेताओं का एक ही राग है कि ट्रंप 29 बार यह दावा कर चुके हैं कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच ये संघर्ष विराम कराया है।
हालत यह हो चुकी है कि राहुल गांधी के मुख्य सलाहकार अपने एक्स पर पोस्ट में ट्रंप को “प्रेसिडेंट ट्रंप” कहकर संबोधित करते हैं, न कि “अमेरिकन प्रेसीडेंट ट्रंप”। ट्रंप रटते रटते कांग्रेस समेत पूरा विपक्ष यह भूल बैठा है कि सात समंदर पार किसी देश का राष्ट्रपति क्या कहता है, क्या दावा करता है, इस पर भारत सरकार का कोई जोर नहीं है।

चोट उधर, दर्द इधर
इस समूचे विपक्ष का राजनीतिक बोध किन तत्वों और कहां से प्रभावित है, यह सोचना ही होगा। पहलगाम आतंकवादी हमले के जवाब में जब भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान पर निर्णायक हमला किया, तो मिसाइल पाकिस्तान में गिरा, लेकिन चोट यहां भी कुछ लोगों को कम नहीं लगी। पाकिस्तान ने पहले ही दिन दावा कर डाला कि उसने पांच युद्धक विमान मार गिराए हैं, जिनमें तीन राफेल हैं। कांग्रेस ने पाकिस्तान की इस बात को सर-माथे लगा लिया।
संसद में बहस के दौरान कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की रुचि इस बात में कतई नहीं थी कि भारत ने पाकिस्तान के अंदर घुसकर उसके सैन्य ठिकानें बर्बाद कैसे किए। उसका सवाल यही था कि कितना नुकसान हुआ। जंग दोधारी तलवार है। आप जीत भी जाते हैं, तो ये दावा नहीं कर सकते कि आपको कोई नुकसान नहीं हुआ है। लेकिन कांग्रेस और समूचे विपक्ष के मनोमस्तिष्क पर राफेल पहले दिन से छाया हुआ है। यहां तक कि सर्वोच्च न्यायालय से इस सौदे को क्लीन चिट मिलने के बाद भी कांग्रेस आज तक ये हजम नहीं कर पाई कि भारत ने किसी भी सुरक्षा व्यवस्था को बेधकर हमला करने में सक्षम ये विमान कैसे खरीद लिया।
वह कांग्रेस, जिसका प्रधानमंत्री हर आतंकवादी हमले के बाद ओबामा से शिकायत करता था। वह कांग्रेस, जिसकी सरकार में मुंबई आतंकवादी हमला हुआ और सरकार पाकिस्तान को ‘डोजियर’ सौंपती रह गई। वह कांग्रेस, जिसके समय में तत्कालीन सेनाध्यक्ष के मुताबिक ‘सिर्फ तीन दिन की जंग का गोला-बारूद बचा’ हुआ था। वह कांग्रेस, जिसकी सरकार ये कहती थी कि उसके पास देश की सुरक्षा के लिए लड़ाकू विमान खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं। वह कांग्रेस यह कैसे यह पचा ले कि भारत सीमा पार से आई एक हजार मिसाइल और ड्रोन की लहर को आसमान में ही तबाह कर डालता है।
कदम-कदम पर कांग्रेस और समूचे विपक्ष का यह चेहरा देश के सामने आता रहा है। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 समाप्त हुआ और आजादी के बाद पहली बार जम्मू-कश्मीर का भारत के साथ संपूर्ण एकीकरण हुआ। इस एकीकरण से पाकिस्तान को जितनी परेशानी हुई, उतनी ही परेशानी भारत में कांग्रेस व अन्य विपक्षी दलों को हुई। पाकिस्तान इसके खिलाफ दुनिया भर में भटका और भारत में कांग्रेस, उनकी सहयोगी नेशनल कॉन्फ्रेंस, समाजवादी पार्टी, द्रमुक, तृणमूल कांग्रेस आदि दलों ने पाकिस्तान की लाइन पर चलते हुए यहां तक दावा किया कि वे सत्ता में आने पर अनुच्छेद 370 को दोबारा लागू करेंगे।
भारत के साथ जम्मू-कश्मीर के एकीकरण पर पाकिस्तान और भारत के विपक्ष की राय एक जैसी है, तो क्या यह सिर्फ संयोग है? ये याद रखिए कि कभी राहुल गांधी की सलाहकार मंडली के रत्न रहे मणिशंकर अय्यर तो पाकिस्तान गए और वहां मांग की कि पाकिस्तान भारत में नरेंद्र मोदी सरकार को पलटने में कांग्रेस की मदद करे। वही मणिशंकर अय्यर आज भी दोहरा रहे हैं कि पहलगाम आतंकवादी हमला पाकिस्तान ने कराया, इसका कोई सबूत नहीं है। यह रिश्ता क्या कहलाता है, बताइए।
पुलवामा हमले के बाद जब पूरा देश शोक में डूबा था, कांग्रेस समेत समूचे विपक्ष की रुचि इस बात में थी कि सरकार की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति पर सवाल खड़े किए जाएं। जब जवाब में भारतीय वायुसेना ने सर्जिकल स्ट्राइक कर पाकिस्तान के बालाकोट में आतंकवादी शिविरों को तबाह किया, तो राहुल गांधी से लेकर अरविंद केजरीवाल तक सबने इस बात के सुबूत मांगे कि सर्जिकल स्ट्राइक हुई है या नहीं। सेना बार-बार दावा करती रही कि सर्जिकल स्ट्राइक में पाकिस्तान में आतंकवादी शिविरों को तबाह कर दिया गया है, लेकिन कांग्रेस पाकिस्तान के सुर में बोलती रही।
भारत के अखंड रूप को पाकिस्तान आज तक स्वीकार नहीं कर पाया और राहुल गांधी भी कहते हैं कि भारत एक देश नहीं, राज्यों का समूह भर है। यह वही कांग्रेसी नेता हैं, जो जेब में संविधान लेकर घूमते हैं। लेकिन हकीकत यही है कि कांग्रेस या अन्य विपक्षी दलों को संविधान नहीं, पाकिस्तान पर विश्वास है। लगातार चुनाव हारते ये दल इस स्थिति में पहुंच गए हैं कि ये कभी पाकिस्तान, कभी चीन और कभी अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर इस उम्मीद से देखते हैं कि वे ही कुछ करके नरेंद्र मोदी को सत्ता से बेदखल कर दें।
बात महज इतनी नहीं कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों का रवैया सरकार विरोधी से देश विरोधी हो चुका है। मसला खतरनाक रुख ले रहा है। अपने राष्ट्रीय नेताओं से प्रेरणा लेते इन दलों के कार्यकर्ता किस स्तर तक पहुंच चुके हैं, उसका उदाहरण देखिए- 12 मई 2025 को कर्नाटक कांग्रेस ने पाकिस्तान को आईएमएफ कर्ज मिलने पर भाजपा पर निशाना साधते हुए एक पोस्ट लिखी। इसमें कर्नाटक कांग्रेस ने जम्मू-कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा दर्शा दिया। बवाल मचा, तो इसे हटा दिया गया। 5 मई को मध्य प्रदेश के इंदौर में पाकिस्तान जिंदाबाद का नारा लगाने के आरोप में कांग्रेसी पार्षद अनवर जाफरी को गिरफ्तार किया गया।
27 अप्रैल को पहलगाम हमले के खिलाफ बिहार के लखीसराय में राष्ट्रीय जनता दल ने मोमबत्ती मार्च निकाला। मार्च में पाकिस्तान प्रायोजित इस हमले में 26 हिंदुओं की हत्या के विरोध प्रदर्शन के दौरान पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए गए। इस मसले में पुलिस ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के जिलाध्यक्ष कैलाश प्रसाद को गिरफ्तार किया। ये इक्का-दुक्का घटनाएं नहीं हैं। उत्तर प्रदेश से लेकर तमिलनाडु तक इस तरह की घटनाएं हो रही हैं। कांग्रेस और अन्य विपक्ष दलों के शीर्ष नेताओं के पाकिस्ताननुमा आचरण का यह नतीजा है कि इन दलों का आखिरी कार्यकर्ता तक पाकिस्तान के समर्थन में नारेबाजी करके अपने नेतृत्व को खुश करने में जुटा है।

















