लोकसभा में आज दो महत्वपूर्ण विधेयकों को पास किया गया है। इसमें एक नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस बिल- 2025 और नेशनल एंटी-डोपिंग (संशोधन) बिल- 2025, शामिल है। ये बिल भारतीय खेलों में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ाने के लिए लाए गए हैं। इस दौरान विपक्ष के बिहार में मतदाता सूची संशोधन (एसआईआर) को लेकर विरोध के कारण सदन में हंगामा भी देखने को मिला। खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने इन बिलों को आजादी के बाद खेलों में सबसे बड़ा सुधार बताया।
नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस बिल
यह बिल भारतीय खेलों के ढांचे को मजबूत करने और खेल संघों में सुशासन लाने के लिए बनाया गया है। इसका मकसद है कि खेल संगठनों में पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता सुनिश्चित हो। इस बिल के तहत नेशनल स्पोर्ट्स बोर्ड (एनएसबी) बनाया जाएगा, जो सभी नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशंस (एनएसएफ) को नियंत्रित करेगा। अगर कोई खेल संगठन नियमित चुनाव नहीं कराता या वित्तीय अनियमितताएं करता है, तो एनएसबी उसे मान्यता रद्द कर सकता है। सरकारी फंडिंग पाने के लिए एनएसएफ को एनएसबी की मान्यता लेनी होगी।
इसके अलावा बिल में नेशनल स्पोर्ट्स ट्रिब्यूनल की स्थापना का प्रस्ताव है, जो एक सिविल कोर्ट की तरह काम करेगा। यह ट्रिब्यूनल खिलाड़ियों के चयन, फेडरेशंस के चुनाव और अन्य विवादों को सुलझाएगा। इसकी अपील सिर्फ सुप्रीम कोर्ट में की जा सकेगी। बिल में खेल प्रशासकों की उम्र सीमा को लेकर भी कुछ रियायत दी गई है। पहले 70 साल की उम्र सीमा थी, लेकिन अब 70-75 साल के लोग भी चुनाव लड़ सकते हैं, बशर्ते अंतरराष्ट्रीय खेल संगठन इसे अनुमति दें।
एक और खास बात यह है कि सभी मान्यता प्राप्त खेल संगठन अब राइट टू इन्फॉर्मेशन (आरटीआई) एक्ट के दायरे में आएंगे। हालांकि, बीसीसीआई जैसे संगठनों को, जो सरकारी फंडिंग पर निर्भर नहीं हैं, इसमें कुछ छूट दी गई है। यह बिल भारत की 2036 ओलंपिक की मेजबानी की तैयारी को भी ध्यान में रखकर बनाया गया है, ताकि भारत का खेल ढांचा वैश्विक स्तर पर मजबूत हो।
नेशनल एंटी-डोपिंग (संशोधन) बिल: डोपिंग पर सख्ती
यह बिल 2022 के नेशनल एंटी-डोपिंग एक्ट में संशोधन करता है। विश्व एंटी-डोपिंग एजेंसी (वाडा) ने पहले इस एक्ट में सरकारी हस्तक्षेप की शिकायत की थी, जिसके कारण इसे लागू नहीं किया जा सका। नए संशोधन में नेशनल एंटी-डोपिंग एजेंसी (नाडा) को पूरी तरह स्वायत्तता दी गई है। अब नाडा किसी सरकारी मंत्रालय, खेल फेडरेशन या अंतरराष्ट्रीय संगठन के दबाव में काम नहीं करेगी। बिल में वाडा के कोड को शामिल किया गया है, खासकर डोपिंग नियम उल्लंघनों से जुड़े नियम।
इसमें डोपिंग टेस्टिंग लैब्स के लिए वाडा से मान्यता लेना अनिवार्य किया गया है। साथ ही, अगर कोई टेस्ट असामान्य पाया जाता है, तो नाडा को यह जांचना होगा कि क्या यह वाडा के मानकों से हटने के कारण हुआ। यह बिल भारत को वैश्विक एंटी-डोपिंग नियमों के अनुरूप लाने और खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के लिए तैयार करने में मदद करेगा।
विपक्ष का संसद में हंगामा
इन बिलों को पारित करने के दौरान लोकसभा में विपक्ष ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष संशोधन (एसआईआर) को लेकर जमकर हंगामा किया। विपक्षी सांसदों ने इसे मतदाताओं को हटाने की साजिश बताया और इस पर चर्चा की मांग की। इस वजह से सदन को दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा। बाद में, हंगामे के बीच ही दोनों बिल ध्वनि मत से पारित किए गए।

















