पंजाब सरकारी की लैंड पूलिंग पॉलिसी का जहां विपक्षी दल और किसान विरोध कर रहे हैं वहीं पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने भी इस पर कड़ा रुख अपनाया है। शहरी व औद्योगीकरण के लिए लाई गई लैंड पूलिंग नीति पर हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद पंजाब सरकार बैकफुट पर आ गई।
क्या है मामला?
मोहाली सहित पंजाब के अन्य क्षेत्रों में शहरों व औद्योगिक क्षेत्रों को विकसित करने के लिए विभिन्न गांवों की भूमि को अधिग्रहित करने के लिए लाई गई पंजाब सरकार की नीति को चुनौती देते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। याचिका में हाईकोर्ट को बताया गया कि इस नीति को लाने से पहले सरकार ने जमीनी स्तर पर इससे पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन नहीं किया है। इस नीति से सीधे तौर पर आम लोग प्रभावित होंगे जिनके पुनर्वास के बारे में सरकार ने कोई व्यवस्था नहीं की है।
हाई कोर्ट के तीखे सवाल
याची पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि पंजाब सरकार 60 हजार एकड़ भूमि का अधिग्रहण करने जा रही है। क्या प्रति एकड़ के हिसाब से 90 हजार करोड़ सरकार के बजट में है। कोर्ट ने कहा कि यह मान भी लिया जाता है कि भूमि मालिकों को अधिग्रहण के लिए मुआवजा मिल जाएगा लेकिन जिन लोगों से रोजगार छिन जाएगा क्या उनके बारे में सरकार ने यह नीति लाने से पहले कोई योजना बनाई है। हाईकोर्ट ने कहा कि इस नीति को लाने से पहले सरकार को इसका समाज व पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर अध्ययन करना चाहिए था।

















