पाकिस्तान इस समय सबसे बड़े पानी की समस्या से जूझ रहा है। खासकर वहां के दक्षिणी हिस्से में सिंधु नदी के पास वाला इलाका बहुत प्रभावित हुआ है। यहां के लाखों लोग पानी की कमी और समुद्र के खारे पानी के बढ़ने की वजह से अपने गांव छोड़ने को मजबूर हो गए हैं।
खारो चान नाम के इलाके में पहले लगभग 40 गांव थे, लेकिन अब वहां सिर्फ कुछ घर ही बचे हैं। शाम को पूरा इलाका बहुत शांत हो जाता है और खाली पड़े घरों में सिर्फ आवारा कुत्ते घूमते हैं। यह इलाका सिंधु नदी के उस हिस्से में है, जहां नदी अरब सागर से मिलती है। पहले लोग यहां मछली पकड़ते थे और खेती करते थे, लेकिन अब समुद्र का खारा पानी यहां तक पहुंच गया है। इसलिए खेती नहीं हो पाती और मछलियां भी कम मिलती हैं। यहां के हबीबुल्लाह खट्टी अब सिलाई करते हैं, लेकिन गांव खाली होने से वह भी मुश्किल हो गया है। पहले 150 घर थे, अब केवल 4 बचे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, खारो चान और आसपास के इलाकों से लगभग 12 लाख लोग पलायन कर चुके हैं क्योंकि सिंधु नदी में अब पहले जैसा पानी नहीं रहा।1950 के बाद से यहां पानी की मात्रा लगभग 80% घट गई है। इसके पीछे कई कारण है- सिंचाई नहरें, बांध बनना, हिमनदों का पिघलना और जलवायु परिवर्तन। इन वजहों से समुद्र का खारा पानी अंदर तक फैल गया है और जमीन खराब हो रही है। 1990 के बाद से पानी में नमक की मात्रा 70% बढ़ गई है, जिससे खेती करना बहुत मुश्किल हो गया है। झींगा और केकड़े भी अब कम मिलते हैं। सिंधु डेल्टा धीरे-धीरे डूब रहा है और सिकुड़ रहा है। सिंधु नदी पाकिस्तान की जीवन रेखा है, जो भारत से आती है और वहां की 80% खेती वाली जमीन को पानी देती है।
पहले यह जगह खेती, मछली पकड़ने और जंगली जानवरों के लिए प्रसिद्ध थी। लेकिन 2019 की एक सरकारी रिपोर्ट में कहा गया कि अब 16% जमीन खारे पानी की वजह से बंजर हो चुकी है। केटी बंदर कस्बे में जमीन पर नमक की सफेद परत जम गई है, और लोग पीने का पानी नाव से लाकर गधों की मदद से गांव तक पहुंचाते हैं। पहलागाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को रद्द कर दिया है और अब वह नदी पर बांध बनाकर पाकिस्तान को कम पानी देने की योजना बना रहा है। इससे पाकिस्तान की स्थिति और भी खराब हो सकती है।

















