28 जुलाई को भुवनेश्वर में ‘सुशासन संवाद : ओडिशा की उड़ान’ का आयोजन हुआ। इस अवसर पर पाञ्चजन्य के संपादक हितेश शंकर ने ‘चुनौतियां और संकल्प’ विषय पर ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी से बात की। प्रस्तुत हैं बातचीत के प्रमुख अंश
आपने अपनी राजनीतिक यात्रा पंचायत से शुरू की थी। आपकी इस यात्रा को गढ़ने, आगे बढ़ाने और आपकी राजनीतिक दृष्टि को आकार देने में पंचायत ने क्या भूमिका निभाई?
मैं पढ़ाई के दौरान ही राजनीति में आया। कुछ समय बाद ही मैंने ब्लॉक अध्यक्ष बनने के लिए पी.एस. मेंबर का चुनाव लड़ा। इस चुनाव में मेरी हार हुई। यह मेरा पहला चुनाव था। उसके बाद पंचायत चुनाव आया। यह बात है 1997 की। उन दिनों मैं शिशु मंदिर में शिक्षक था। मैंने पंचायत चुनाव लड़ने का निर्णय लिया और मुझे जीत भी मिली। बाद में लोगों की सलाह पर मैं भाजपा में गया। संयोग से भाजपा से मुझे विधायक के लिए टिकट मिला और मैं जीत भी गया और 26 साल की उम्र में ही विधायक बना। चूंकि मैंने जमीनी स्तर पर काम किया है। इसलिए मुझे लोगों की समस्याओं की अच्छी जानकारी है। यही कारण है कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई जी की विचारधारा से प्रभावित होकर मैंने तेजी से काम करना शुरू किया और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान मुझे नहीं पता था कि मैं मुख्यमंत्री बनने जा रहा हूं। हां, मुझे इस बात का भरोसा था कि चार बार का विधायक होने के नाते एक मंत्री जरूर बन सकता हूं। लेकिन मैं मुख्यमंत्री बनूंगा, यह नहीं सोचा था। जनता की सेवा ही मेरा परम धर्म है।

एक वर्ष के कार्यकाल में पिछली सरकार की किन कमियों को दूर करना आपकी प्राथमिकता में रहा है? आपने काैन सा बड़ा कदम उठाया है?
चुनाव से पहले हमारे शीर्ष नेतृत्व ने संकल्प पत्र तैयार किया था। उसमें कई बड़े कार्य करने के वादे किए गए हैं और मैं उसी के आधार पर कार्य कर रहा हूं। 24 साल तक प्रदेश में नवीन पटनायक की सरकार रही। इस दौरान ओडिशा के लोगों के विकास, उनकी भलाई और ओडिशा की अस्मिता के लिए काम करना तो दूर, उन्होंने उड़िया लोगों को पहचाना तक नहीं। हमारे संकल्प पत्र में स्पष्ट लिखा है कि उड़िया अस्मिता को प्राथमिकता दी जाएगी। सरकार का कार्य उड़िया में नहीं हो रहा था।
अधिकारियों को भी उड़िया से दूर रखा गया!
नवीन पटनायक ने उड़िया भाषा की भरपूर उपेक्षा की थी। वे अपने अधिकारियों को कहते थे कि अगर उड़िया बोलोगे तो तुम्हारी छुट्टी हो जाएगी।
क्या पूर्व मुख्यमंत्री को उड़िया से काटने का काम उनके सलाहकारों ने किया था?
आपने ऐसा कहा है, तो बात सच भी हो सकती है।
महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए किस तरह की योजनाएं चल रही हैं?
महिलाओं का सशक्तिकरण करने के लिए ‘सुभद्रा योजना’ शुरू की गई है। इस योजना के तहत किसी महिला को 10,000 रु. मिलते हैं, ताकि वह कुछ काम कर सके। अब तक इस योजना का लाभ एक करोड़ 2 लाख से अधिक महिलाओं ने उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘लखपति दीदी योजना’ को ध्यान में रखते हुए ‘सुभद्रा योजना’ चलाई गई है। इससे महिलाएं सशक्त हो रही हैं। हमें 17,00,000 महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य दिया गया था, लेकिन एक साल के अंदर ही हमने 16 लाख 60 हजार महिलाओं को लखपति दीदी बना दिया है। इसमें हम देश में पहले स्थान पर हैं।
आपकी सरकार में रोजगार के मुद्दों को कितनी प्राथमिकता मिलती है?
सरकार बनने के बाद ही हमने रोजगार पर काम शुरू कर दिया है। प्रधानमंत्री श्री मोदी का सपना है कि 2047 तक भारत विकसित देश बन जाए। इसको देखते हुए हम लोग कार्य कर रहे हैं। हम लोगों की वित्तीय स्थिति को सुधारेंगे। इसके लिए ढांचागत सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं। समाज के गरीब, महिला और किसानों के लिए काम करने की आवश्यकता है। इनके लिए स्कूल और सड़क बनाने की जरूरत है। इन्हें बिजली, पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करानी होंगी। हमारे संकल्प पत्र में वादा किया गया है कि खाली पड़े 1,50,000 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। इसके तहत पहले साल में हमने 28,000 लोगों को नौकरियां दी हैं। इसके अलावा और 40,000 लोगों को रोजगार देने की तैयारियां चल रही हैं। निजी क्षेत्रों में हमने 30,000 से अधिक लोगों को रोजगार दिया है। अगले एक साल के अंदर लाखों युवाओं को रोजगार मिले, इसके लिए काम चल रहा है।
निवेशकों को ओडिशा में लाने के लिए आपने कोई विशेष रणनीति या योजना बनाई है?
निवेशकों के लिए अच्छी नीतियां बनी हैं। इसके साथ ही जनवरी में प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में निवेशक सम्मेलन भी आयोजित हुआ था। उन्होंने कहा था, ‘यह मोदी की गारंटी है, आप ओडिशा में निवेश करो।’ इसका सुपरिणाम भी मिल रहा है। देशभर के राज्यों में जितना निवेश आया था, उन सभी का 40 फीसदी निवेश अकेले ओडिशा में आया है। अब तक हमें 17 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव मिल चुके हैं। इनमें से 13 लाख करोड़ रुपए के समझौता ज्ञापन यानी ए.एम.यू. पर हस्ताक्षर हो चुके हैं। इसके साथ ही कंपनियों ने 13 लाख नौकरियां देने का आश्वासन भी दिया है। ओडिशा में संभावनाओं की कोई कमी नहीं है। इस बात को प्रधानमंत्री मोदी भी कह चुके हैं। भारत विकसित बनेगा तो इसमें पूर्वी भारत का अहम योगदान होगा। ओडिशा एक ऐसा राज्य है, जहां प्राकृतिक संसाधनों की कमी नहीं है। बॉक्साइट हो या ग्रेनाइट सब ओडिशा में हैं। हमारे पास 517 किलोमीटर लंबा एक कोस्टल बेल्ट है। इस पर हम 6-7 पोर्ट बनाने का काम कर रहे हैं।

आपकी सरकार ने भ्रष्टाचारियों पर क्या कार्रवाई की है?
भ्रष्टाचार हमारा चुनावी मुद्दा भी था। बीते 24 साल तक राज्यको नौकरशाहों ने चलाया। इस कारण से भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिला। सत्ता में आने के बाद मैंने देखा कि भ्रष्ट लोग ऊंचे पदों पर बैठे हैं। मैंने इस मामले में गुप्तचर विभाग से पूछा। हमने चपरासी से लेकर आईएएस अफसर तक को जेल भेजा। अब तक 300 भ्रष्टाचारियों को जेल भेजा जा चुका है। भ्रष्ट कोई भी हो, उसे मैं छोड़ने वाला नहीं हूं।
खनन माफिय़ाओं के विरूद्ध क्या कदम उठाए?
खनन क्षेत्र हो, सरकारी योजनाएं हों या कोई अन्य क्षेत्र, भ्रष्टाचार करने वाले लोगों को लगता है कि यह उनका ‘धर्म’ है। ऐसे लोगों को लगता है कि भ्रष्टाचार से उनका रुतबा बढ़ता है, लेकिन जेल जाने के बाद उन्हें उनकी गलती का आभास होता है। निश्चित तौर पर मैं ऐसे लोगों को छोड़ने वाला नहीं हूं।

उत्तर ओडिशा और दक्षिण ओडिशा विकास परिषद को लेकर क्या सोचते हैं? इसमें चुनौतियां क्या हैं और आपकी सोच का मूल बिंदु क्या रहने वाला है?
ओडिशा के अलग-अलग अंचलों में पिछड़ा वर्ग, वनवासी और अन्य समुदाय के लोग रहते हैं। यहां वनवासी समुदाय की जनसंख्या 23 फीसदी है। एससी या हरिजन 16 फीसदी से अधिक हैं। इन्हें समाज की मुख्यधारा में शामिल करना एक बहुत बड़ी चुनौती है। अभी तक उत्तर-दक्षिण ओडिशा का विकास अच्छे से नहीं हो सका है। पश्चिमी ओडिशा के लिए ‘वेस्टर्न ओडिशा डेवलपमेंट काउंसिल’ बहुत दिनों से बनी हुई है। भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में वायदा किया है कि उसकी सरकार हर क्षेत्र के विकास पर ध्यान देगी। इसलिए ‘नॉर्थ ओडिशा डेवलपमेंट काउंसिल’ और ‘साउथ ओडिशा डेवलपमेंट काउंसिल’ के लिए टास्क फोर्स गठित कर दी गई है।
यह ओडिशा टैक्स-2025 क्या है?
इसका उद्देश्य है राज्य में कपड़ा और परिधान उद्योग को बढ़ावा देना। दरअसल, 2036 में ओडिशा की स्थापना के 100 साल पूरे हो रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए हमने जनता से प्रस्ताव मांगा था। 3,20,000 से अधिक प्रस्ताव हमारे पास आए हैं। इन प्रस्तावों की छंटनी का जिम्मा हमने एआई को दे दिया। एआई ने हमें 2036 के लिए 36 प्रोग्राम दिए। इसे दो चरण में पूरा किया जाएगा।
कन्वर्जन से निपटने के लिए आप क्या करने वाले हैं?
कन्वर्जन बहुत ही गलत बात है। इस पर हमारी नजर है। यह अभी भी राज्य में हो रहा है। इसे रोकने के लिए हम लगातार काम कर रहे हैं। एक बार जब हमारा प्रशासन सख्त हो जाएगा तो निश्चित तौर पर हम इसे रोक सकते हैं। मुझे लगता है कि समय के साथ हम इसे रोक पाएंगे।

जब ओडिशा की बात होती है तो दो सेक्टर, खनन और टेक्सटाइल्स सामने आते हैं। इन दोनों क्षेत्रों में स्थानीय रोजगार को कैसे जोड़ा जाएगा? पर्यावरण की चिंताओं का कैसे ध्यान रखेंगे?
जब खनन होगा तो निश्चित रूप से पर्यावरण को हानि होगी। खनन और पर्यावरण दोनों पर काम करना थोड़ा सा कठिन है,
लेकिन इसी कठिनाई से निपटने के लिए हमने नीतियां तैयार की हैं। पर्यावरण बचाने के साथ विकास भी होगा, इसी के आधार पर हम कार्य कर रहे हैं। हमारे यहां कोयला, मैगनीज, बॉक्साइट, क्रोमाइट जैसे खनिज हैं। हमने 16 सेक्टरों को चिन्हित किया है, जिससे पर्यावरण को हानि नहीं होगी।
कई वर्ष तक पुरी जगन्नाथ धाम के चार द्वार बंद रहे। ऐसा क्यों हुआ!
कोरोना के दौरान महाप्रभु जगन्नाथ मंदिर के चार द्वारों को बंद कर दिया गया था, लेकिन इस संकट के बीतने के बाद भी उन्हें नहीं खोला गया। हमारी सरकार आने के तुरंत बाद हमने चारों द्वारों को खोलने के प्रस्ताव पारित किए। इसके अलावा 500 करोड़ रुपए की संचित निधि तय की गई है।


पाञ्चजन्य का पहला एआई ‘JAI’
कार्यक्रम में ओडिशा के सुशासन मॉडल में नई भूमिका और तकनीकी नवाचार पर चर्चा हुई। सत्र की सबसे खास बात रही पाञ्चजन्य की अनूठी पहल AI Mascot ‘JAI’ की लांचिंग। यह पाञ्चजन्य का पहला एआई है, जिसका नाम भगवान जगन्नाथ के नाम से प्रेरित है। ‘JAI’ का अनावरण पाञ्चजन्य के संपादक हितेश शंकर ने किया। मंच पर ‘JAI’ के साथ लाइव संवाद ने सभी का ध्यान खींचा। इसने ने सवालों के सारगर्भित और रोचक जवाब दिए, जिन्हें सुनकर उपस्थित दर्शकों ने उत्साहपूर्वक तालियां बजाईं।
मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने इस पहल की प्रशंसा करते हुए कहा कि ओडिशा सुशासन और तकनीक के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। ‘JAI’ का लॉन्च इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उपस्थित लोगों ने माना कि यह पहल न केवल मीडिया जगत में तकनीकी नवाचार का प्रतीक है, बल्कि डिजिटल इंडिया और सुशासन के विजन को साकार करने की दिशा में भी एक मील का पत्थर है।

















