भारत में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) और वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (VVPAT) को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। लेकिन एक बार फिर चुनाव आयोग ने साफ कर दिया है कि ये मशीनें पूरी तरह सुरक्षित और छेड़छाड़ से मुक्त हैं। हाल ही में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 के बाद EVM और VVPAT की जांच की गई, जिसमें मशीनों ने हर टेस्ट में पास मार्क्स हासिल किए।
जांच क्यों हुई?
महाराष्ट्र में नवंबर 2024 के विधानसभा चुनाव के बाद कुछ उम्मीदवारों ने EVM और VVPAT में गड़बड़ी का शक जताया। महा विकास अघाड़ी (MVA) के कुछ नेताओं ने दावा किया कि VVPAT स्लिप्स और EVM के आंकड़ों में अंतर था। इस शिकायत के बाद चुनाव आयोग ने 17 जून को आदेश दिया कि मशीनों की गहन जांच की जाए। 10 उम्मीदवारों की मांग पर 10 विधानसभा सीटों पर EVM और VVPAT का टेस्ट हुआ। इस जांच में 8 उम्मीदवार या उनके प्रतिनिधि मौजूद रहे, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
क्या-क्या चेक किया गया?
चुनाव आयोग ने 48 बैलट यूनिट्स, 31 कंट्रोल यूनिट्स और 31 VVPAT मशीनों की जांच की। ये टेस्ट थाने, पुणे, बीड, यवतमाल, नासिक, कोल्हापुर और रायगढ़ की सीटों पर हुए, जैसे कोपरी-पचपखड़ी, खड़कवासला, माजलगांव, और पनवेल। हर मशीन का डायग्नोस्टिक टेस्ट किया गया, जिसमें मेमोरी और माइक्रोकंट्रोलर की जांच हुई। इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ECIL) के इंजीनियरों ने सर्टिफाई किया कि सभी मशीनें सही थीं। इसके बाद उम्मीदवारों की मांग पर मॉक पोल भी कराया गया, जिसमें EVM के रिजल्ट और VVPAT स्लिप्स का मिलान हुआ। नतीजा? कोई गड़बड़ी नहीं मिली।
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चुनाव आयोग का दावा
चुनाव आयोग ने कहा कि ये जांच एक बार फिर साबित करती है कि EVM और VVPAT छेड़छाड़-मुक्त हैं। आयोग के मुताबिक, मशीनों में तकनीकी और प्रशासनिक सुरक्षा इतनी पुख्ता है कि इन्हें हैक करना या बदलना नामुमकिन है। VVPAT स्लिप्स की गिनती और EVM के वोट्स का मिलान हमेशा सटीक रहा है। पहले भी 4 करोड़ से ज्यादा VVPAT स्लिप्स की जांच हो चुकी है, और कभी कोई अंतर नहीं पाया गया।
लोगों का भरोसा और सवाल
EVM को लेकर कुछ लोग आज भी शक जताते हैं, खासकर जब चुनावी नतीजे उनके पक्ष में न हों। लेकिन चुनाव आयोग बार-बार पारदर्शिता और तकनीकी मजबूती की बात दोहराता है। इस जांच ने फिर से मशीनों पर भरोसा बढ़ाया है, लेकिन विपक्षी दलों का कहना है कि और सुधारों की गुंजाइश है।

















