कैसे होगी नैतिकता की पुनर्स्थापना!
June 25, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत

कैसे होगी नैतिकता की पुनर्स्थापना!

चंदा कोचर प्रकरण ने भारतीय बैंकिंग व्यवस्था और कॉर्पोरेट गवर्नेंस में नैतिकता के संकट को उजागर कर दिया है। कभी उन्हें सशक्त महिला नेतृत्व और बैंकिंग सुधार की मिसाल के रूप में देखा जाता था।

Written byहितेश शंकरहितेश शंकर
Jul 30, 2025, 05:59 pm IST
in भारत, सम्पादकीय
चंदा कोचर

चंदा कोचर

चंदा कोचर प्रकरण ने भारतीय बैंकिंग व्यवस्था और कॉर्पोरेट गवर्नेंस में नैतिकता के संकट को उजागर कर दिया है। कभी उन्हें सशक्त महिला नेतृत्व और बैंकिंग सुधार की मिसाल के रूप में देखा जाता था। मीडिया समूहों ने उन्हें श्रेष्ठ व्यक्तियों की सूचियों में शामिल किया, बड़े उद्योगपतियों और राजनेताओं ने उनकी सफलता की प्रशंसा की। लेकिन जब आईसीआईसीआई बैंक से 300 करोड़ रुपए का ऋण जारी करने के बदले 64 करोड़ रुपए की रिश्वत लेने का आरोप सामने आया, तो यह पूरा तंत्र सवालों के घेरे में आ गया।

हितेश शंकर

कोचर का वह प्रसिद्ध पत्र, जिसमें उन्होंने बेटी को ”वर्क हार्ड, डोंट टेक शॉर्टकट्स” जैसे नैतिक संदेश दिए थे, आज एक विरोधाभास बन गया है। यह प्रकरण दिखाता है कि कैसे व्यक्तिगत और संस्थागत नैतिकता की कमजोरी पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता को ध्वस्त कर सकती है। बैंकिंग क्षेत्र में यह घटना न केवल एक बड़े घोटाले की कहानी है, बल्कि यह बताती है कि वर्षों से व्याप्त भ्रष्टाचार और पारदर्शिता की कमी किस तरह जनता का विश्वास तोड़ सकती है। इस गिरावट के बहुआयामी कारण हैं, बैंकिंग तंत्र के सुराख इस प्रकार की आशंकाओं को और बढ़ा देते हैं।

भारतीय बैंकिंग तंत्र की बड़ी समस्याओं में अघोषित पूंजी का प्रवाह, राजनीतिक हस्तक्षेप और अवैध ऋण वितरण प्रमुख हैं। अध्ययन बताते हैं कि 1983 के बाद से अपराध और राजनीति के आपसी गठजोड़ में इस पैसे की भूमिका बढ़ी है। ‘टैक्स हेवन’ देशों में व्यवस्थित नेटवर्क इसे सफेद धन में बदलकर भारत लौटाता है।

अब यह स्पष्ट है कि आईसीआईसीआई बैंक जैसे निजी बैंकों में भी बड़े पदों पर राजनीतिक और व्यावसायिक दबाव बनाए जाते रहे हैं। बैंकिंग बोर्ड और प्रबंधन में जवाबदेही और पारदर्शिता की कमी ने इस समस्या को और गंभीर बनाया है। यह केवल चंदा कोचर का व्यक्तिगत मामला नहीं, बल्कि एक बड़ी संस्थागत विफलता का संकेत है।

केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत का अनुमानित कालाधन सकल घरेलू उत्पाद का 20% से अधिक हो सकता है। 2015 में काला धन (अघोषित विदेशी आय और परिसंपत्तियां) तथा कराधान कानून बनाया गया जो 1 जुलाई, 2015 से प्रभावी है। इसके काफी सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।

सरकार ने जनधन योजना, आधार और डिजिटल भुगतान के जरिए नकद लेन-देन को कम करने का प्रयास किया, जिससे काले धन पर रोक लगाई जा सके। किंतु आज कुछ राज्यों में यूपीआई के विरुद्ध ही माहौल बनाने का राजनीतिक खेल शुरू हो गया है जिसे मीडिया में नासमझी में ही सही, भोले-भाले लोगों पर टैक्स की मार और भय बताकर बढ़ावा भी दिया जा रहा है। इस तरह के अधूरे ज्ञान और आर्थिक अनियमितताओं की रोकथाम के प्रयासों को पलीता लगाने के खेल पर लगाम लगाना जरूरी है। यह नैतिकतापूर्ण आर्थिक तंत्र को सुदृढ़ करने के लिए आवश्यक है।

तो फिर नैतिकता और पारदर्शिता की राह कैसे निकलेगी! चंदा कोचर प्रकरण बताता है कि नैतिकता की कमी व्यक्तिगत और संस्थागत दोनों स्तरों पर गंभीर परिणाम देती है। बैंकिंग गवर्नेंस को सुधारने के लिए निम्नलिखित कदम जरूरी हैं:

कॉर्पोरेट गवर्नेंस में सुधार – बोर्ड और प्रबंधन की नियुक्तियों में पारदर्शिता और जिम्मेदारी तय हो।
कानूनी सख्ती–अवैध ऋण वितरण और रिश्वतखोरी पर कठोर दंड और तेज न्यायिक प्रक्रिया हो।

देेश में अघोषित पूंजी के प्रवाह का समाधान केवल कानूनी या तकनीकी चुनौती नहीं, बल्कि एक नैतिक चुनौती भी है। चंदा कोचर प्रकरण ने यह साबित कर दिया है कि आर्थिक संस्थानों की नींव केवल वित्तीय नियमों से नहीं, बल्कि नैतिकता और पारदर्शिता से भी मजबूत होती है

डिजिटल निगरानी–डिजिटल लेन-देन और फिनटेक समाधानों के जरिए निगरानी को मजबूत किया जाए।

नैतिक नेतृत्व का चयन – ऐसे नेताओं को सामने लाना जो न केवल व्यावसायिक रूप से सक्षम हों, बल्कि नैतिकता के पैमानों पर भी खरे उतरें।

देेश में अघोषित पूंजी के प्रवाह का समाधान केवल कानूनी या तकनीकी चुनौती नहीं, बल्कि एक नैतिक चुनौती भी है। चंदा कोचर प्रकरण ने यह साबित कर दिया है कि आर्थिक संस्थानों की नींव केवल वित्तीय नियमों से नहीं, बल्कि नैतिकता और पारदर्शिता से भी मजबूत होती है।

भविष्य में सुधार के लिए डिजिटल अर्थव्यवस्था, कड़े कर कानून और पारदर्शी कॉर्पोरेट गवर्नेंस का मेल जरूरी है। जनता का भरोसा तभी लौटेगा जब वित्तीय संस्थान और सरकार निष्ठा, उत्तरदायित्व और पारदर्शिता की नई परंपरा स्थापित करेंगे। यही नैतिकता की पुनर्स्थापना की असली राह है।

X@hiteshshankar

Topics: Digital economyStringent tax lawsTransparent corporate governanceTax havensचंदा कोचर मामलाजन धन योजनाआईसीआईसीआई बैंकJan Dhan Yojanaकड़े कर कानूनपाञ्चजन्य विशेषपारदर्शी कॉर्पोरेट प्रशासनडिजिटल अर्थव्यवस्थाकर पनाहगाहChanda Kochhar caseICICI Bank
हितेश शंकर
हितेश शंकर
हितेश शंकर पत्रकारिता का जाना-पहचाना नाम, वर्तमान में पाञ्चजन्य के सम्पादक [Read more]
ShareTweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

इमरजेंसी फाइल्स- सुमित्रा गुलाटी की आपबीती

आपातकाल का सच: ‘इंदिरा ने बहुत गलत किया’, सुमित्रा गुलाटी के पूरे परिवार को जेल भेजा, छोटे-छोटे बच्चों को भी नहीं छोड़ा

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प

जी 7, पश्चिम एशिया और भारत के सधे कदम

आपातकाल का सच

आपातकाल का सच: इंदिरा गांधी और कांग्रेस ने लोकतंत्र को जकड़ा, संविधान को कैसे कुचला ? जानें सत्ता बचाने की पूरी कहानी

dr Shyama prasad Mukharjee mystirious death

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का बलिदान : नेहरू की भूमिका, मौत के पीछे की साजिश, मां का पत्र और बेटी का रहस्योद्घाटन

महान वीरांगना रानी दुर्गावती

रानी दुर्गावती: स्वाभिमान की रक्षा के लिए प्राणोत्सर्ग करने वालीं महान वीरांगना

संघ संस्थापक डॉ. हेडगेवार

राष्ट्र-चिंतक डॉ. हेडगेवार

Load More

ताज़ा समाचार

इमरजेंसी फाइल्स- सुमित्रा गुलाटी की आपबीती

आपातकाल का सच: ‘इंदिरा ने बहुत गलत किया’, सुमित्रा गुलाटी के पूरे परिवार को जेल भेजा, छोटे-छोटे बच्चों को भी नहीं छोड़ा

आज का राशिफल

25 जून का राशिफल: ग्रह-नक्षत्रों का असर, जानें आपका दिन कैसा रहेगा?

आज का इतिहास

25 जून का इतिहास: क्रिकेट, आतंकवाद और कूटनीति से जुड़ी बड़ी घटनाएं

Rajkot Nandini Bosamiya Suicide Case Aslam Hussein Sama Live In Partner Torture Investigation

“पापा मैं जिंदगी की जंग हार गई हूं”: राजकोट में मुस्लिम प्रेमी का टॉर्चर और हिंदू लड़की की मौत, परिजनों को हत्या का शक

Rahul Gandhi

‘कन्फ्यूजन’ या राजनीतिक आरोपों की जल्दबाजी? राहुल गांधी का बयान पर खेद, लेकिन सवाल बरकरार !

Rahul Gandhi

राहुल गांधी ने मानहानि मामले में हाईकोर्ट में लिखित आवेदन देकर बयान पर जताया खेद

50 Years of Emergency India Sunil Ambekar Ram Bahadur Roy Patna Seminar RSS

आपातकाल की सबसे बड़ी सीख : जागरूक समाज ही लोकतंत्र का वास्तविक प्रहरी

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

रानी दुर्गावती के नाम पर होगा जबलपुर एयरपोर्ट का नाम, केन्द्र को भेजेंगे प्रस्ताव : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

maharashtra government considers printing bride groom dob on wedding cards

महाराष्ट्र में बाल विवाह पर कड़ा प्रहार: शादी के कार्ड पर छपेगी दूल्हा-दुल्हन की जन्मतिथि! सरकार ला रही नया नियम

israel will not withdraw from southern lebanon defence minister israel katz

‘अमेरिका कहेगा, तब भी नहीं हटेंगे’ : दक्षिणी लेबनान पर इज़राइल का बड़ा एलान

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies