भुवनेश्वर । भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने पुष्टि की है कि पुरी के श्रीजगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार (कोषागार) की दीवारों या फर्श के नीचे कोई छिपा हुआ गुप्त कक्ष या शेल्फ मौजूद नहीं है। यह जानकारी हाल ही में किए गए ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार सर्वे के बाद सामने आई है। एएसआई ने यह निष्कर्ष अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किया।
रत्न भंडार की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
एएसआई द्वारा इस पोस्ट में कहा गया है कि पुरी श्रीमंदिर का रत्न भंडार मध्यकाल के उत्तरार्ध में निर्मित हुआ था। यह पारंपरिक कलिंग पीढ़ा शैली की एक सादे किन्तु महत्वपूर्ण वास्तुकला का उदाहरण है। यह श्री जगन्नाथ मंदिर के जगमोहन के उत्तरी प्रवेश द्वार से सटा हुआ है और खंडलाइट पत्थरों से निर्मित है।
संरक्षण समिति का गठन
मार्च 2023 में एएसआई ने मुख्य मंदिर और रत्नभंडार के संरक्षण के लिए एक तकनीकी कोर संरक्षण समिति गठित की, ताकि सभी कार्य मंदिर की परंपरागत पूजा-पद्धतियों और धार्मिक अनुशासन के अनुरूप हों।
रत्न भंडार की संरचना
इसमें आगे बताया गया है कि रत्न भंडार दो भागों में विभाजित है:
- भीतरी भंडार (भीतर रत्नभंडार)
- बाहरी भंडार (बाहर रत्नभंडार)
इन दोनों कक्षों के बीच एक मजबूत लोहे की ग्रिल गेट है, जिसे बाहर से बंद किया जाता है।
संरक्षण कार्य की समयसीमा
जीपीआर सर्वे के निष्कर्ष के बाद संरक्षण कार्य 17 दिसंबर 2024 से प्रारंभ हुआ।
- पहला चरण : 17 दिसंबर 2024 – 28 अप्रैल 2025
- दूसरा चरण : 28 जून – 7 जुलाई 2025
पत्थरों और संरचना की मरम्मत
संरक्षण के दौरान आंतरिक छत, कार्बेल, कोटर, दीवारों और बाहरी पीढ़ा मुख पर प्लास्टर हटाया गया। कई क्षतिग्रस्त पत्थर और ढीले जोड़ पाए गए जिन्हें सील किया गया। आंतरिक और बाहरी सतहों की रासायनिक सफाई भी की गई।
आधुनिक तकनीकों का प्रयोग
कोटरों में जंग लगे व्रॉट आयरन बीम्स को हटाकर विशेष डिज़ाइन किए गए स्टेनलेस स्टील बॉक्स बीम्स से प्रतिस्थापित किया गया। इसके अलावा, पॉलीमर-मॉडिफाइड सीमेंट (पीएमसी) ग्राउटिंग दीवारों के जोड़ और बाहरी पीढ़ा स्तरों पर की गई।
अंतिम मरम्मत और सौंदर्यीकरण
अंतिम मरम्मत कार्य के अंतर्गत छत, बाहरी दीवारों और पीढ़ा स्तरों पर क्षतिग्रस्त पत्थरों को बदला गया। फर्श को सैंडस्टोन बेस पर ग्रेनाइट स्टोन से पुनर्निर्मित किया गया। भीतरी कक्ष को विभाजित करने वाली लोहे की ग्रिल गेट को भी रासायनिक रूप से साफ कर सुनहरी रक्षात्मक रंग से रंगा गया।
The #Ratnabhandara, built in the late medieval period is a modest structure of the Kalinga Pidha style architecture and is attached to the northern entrance of the Jagamohana of the Shri #JagannathTemple, #Puri, #Odisha. Constructed from Khondalite stone, it was intended to house… pic.twitter.com/Dv5cA1XWfT
— Archaeological Survey of India (@ASIGoI) July 29, 2025

















