Nag Panchami 2025 Special : क्यों मनाई जाती है नाग पंचमी..? जानिए पूजा विधि, कथा और महत्व
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Nag Panchami 2025 Special : क्यों मनाई जाती है नाग पंचमी..? जानिए पूजा विधि, कथा और महत्व

नाग पंचमी 2025 का महत्व जानें। पूजा विधि, कथा, पंचांग, अष्टनाग पूजन और कालसर्प दोष निवारण के उपाय जानकर नाग देव की कृपा पाएं...

Written byपंकज चौहानपंकज चौहान
Jul 29, 2025, 03:28 pm IST
inउत्तराखंड
नाग पंचमी पूजा विधि 2025

नाग पंचमी 2025 पूजा और कथा

हरिद्वार । नाग पंचमी का पर्व श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। भगवान भोलेनाथ के गले में नाग देवता वासुकि लिपटे रहते हैं, इसलिए नाग पंचमी पर वासुकि नाग, तक्षक नाग और शेषनाग की पूजा का विधान है तथा व्रत रखा जाता है। स्त्रियां सर्प को अपना रक्षक और भाई मानकर उसकी पूजा करती हैं।

नाग पंचमी 2025 का पंचांग

आज का पंचांग – श्रावण मास, वर्षा ऋतु, शुक्ल पक्ष, उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र, पंचमी तिथि, मंगलवार, नाग पंचमी, मंगला गौरी व्रत, राहुकाल दोपहर 03:00 बजे से 04:30 बजे तक, दिशाशूल उत्तर दिशा में, सूर्य दक्षिणायन, युगाब्द 5127, विक्रम संवत 2082, तदानुसार 29 जुलाई सन 2025।

अष्टनागों की पूजा का महत्व

नाग पंचमी पूजा और व्रत के लिए आठ नाग — अनन्त, वासुकि, पद्म, महापद्म, तक्षक, कुलीर, कर्कट और शंख देव माने गए हैं। इन्हीं अष्टनागों की पूजा की जाती है। भविष्य पुराण के पंचमी कल्प में नाग पूजा, नागों की उत्पत्ति और पंचमी तिथि का विशेष वर्णन मिलता है।

भविष्य पुराण की कथा और आस्तिक मुनि

भविष्य पुराण के अनुसार सागर मंथन के समय माता की आज्ञा न मानने के कारण नागों को श्राप मिला कि राजा जन्मेजय के यज्ञ में वे जलकर भस्म हो जाएंगे। तब भयभीत नाग ब्रह्माजी की शरण में पहुंचे। ब्रह्माजी ने बताया कि जब नागवंश में महात्मा जरत्कारू के पुत्र आस्तिक मुनि होंगे, तो वे उनकी रक्षा करेंगे।

यह भी पढ़ें – नाग पंचमी पर नागों को दूध पिलाने की परंपरा कितनी उचित?

यह घटना भी पंचमी तिथि को हुई थी। आस्तिक मुनि ने सावन की पंचमी को ही नागों को यज्ञ में जलने से बचाया और उन पर दूध डालकर उनके शरीर को शीतलता प्रदान की। उसी समय नागों ने आस्तिक मुनि से कहा कि पंचमी को जो भी हमारी पूजा करेगा, उसे नागदंश का भय नहीं रहेगा। तब से इस दिन नाग पूजा की परंपरा चली आ रही है।

नाग पंचमी व्रत की तैयारी और विधि

नाग पंचमी व्रत की तैयारी चतुर्थी से ही शुरू हो जाती है। पूजा के लिए नाग देव की तस्वीर या मिट्टी अथवा धातु की प्रतिमा लाई जाती है। चतुर्थी के दिन केवल एक बार दोपहर में भोजन किया जाता है। पंचमी को सूर्योदय से पूर्व स्नान कर घर की सफाई की जाती है। प्रसाद के लिए सिंवई की खीर और चावल बनाए जाते हैं।

यह भी पढ़ें – नागपंचमी: द्वापरयुगीन सर्पयज्ञ स्थली देवकली, जहां की मिट्टी रखने से घर में नहीं आते सर्प

लकड़ी के पटरे पर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर नाग देवता की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित की जाती है। प्रतिमा को जल, फूल, फल और चंदन चढ़ाया जाता है। नाग देवता की प्रतिमा को दूध, दही, घी, मधु और पंचामृत से स्नान कराया जाता है, फिर हल्दी, रोली, चावल और पुष्प अर्पित किए जाते हैं।

पूजा में अर्पित की जाने वाली सामग्री

दूध, दही, कुशा, गंध, पंचामृत, धान, लावा, गाय का गोबर, पुष्प, घी, खीर, फल, चीनी और दूब चढ़ाकर पूजा की जाती है। कई स्थानों पर पूजा में सफेद कौड़ियां भी रखी जाती हैं। इसके बाद नाग देवता की आरती की जाती है और नाग पंचमी की कथा सुनी जाती है।

पूजा के बाद घर के मुख्य द्वार पर गाय के गोबर से नाग की आकृति बनाई जाती है, उस पर कौड़ियां चिपकाई जाती हैं और खीर अर्पित की जाती है। माना जाता है कि ऐसा करने से घर बुरी शक्तियों से सुरक्षित रहता है और मां लक्ष्मी का आगमन होता है।

नाग पंचमी व्रत का महत्व और लाभ

दिनभर उपवास रखने के बाद शाम को ब्राह्मणों को भोजन कराकर व्रत खोला जाता है। मान्यता है कि नाग पंचमी पर विधिपूर्वक पूजा करने से आर्थिक लाभ होता है और जीवन में कभी धन की कमी नहीं होती।

यह भी पढ़ें – नागपंचमी : हिन्दू संस्कृति में नाग पूजा, कुंडलिनी जागरण और सनातन एकत्व का प्रतीक

घर में गोबर से नाग बनाकर या मंदिर में जाकर पूजा करने से सर्पदंश का भय दूर होता है। यदि सपेरा आए तो उसके नाग की पूजा कर दक्षिणा देकर विदा करने का भी प्रचलन है। नाग देवताओं की पूजा से धन और समृद्धि प्राप्त होती है, क्योंकि वे धन की देवी मां लक्ष्मी की रक्षा करते हैं।

कालसर्प दोष और विशेष उपाय

इस दिन श्रीया, नाग और ब्रह्म अर्थात शिवलिंग स्वरूप की आराधना से मनोवांछित फल प्राप्त होते हैं। जिनकी कुंडली में कालसर्प दोष होता है, उन्हें यह व्रत अवश्य करना चाहिए।

यदि किसी को बार-बार सपने में सांप दिखाई देता है या सांप से अधिक भय लगता है, तो उसे विशेष रूप से नाग पंचमी के दिन नाग की पूजा करनी चाहिए, जिससे भय दूर होता है।

यह भी पढ़ें – सूर्य मंदिर बीजामंडल को ठहरा दिया मस्जिद, नागपंचमी पर होती है पूजा, अब आदेश- पूजा की तो दो साल की सजा और 1 लाख जुर्माना

मान्यता है कि नाग पाताल लोक के स्वामी हैं, इसलिए इस दिन भूमि की खुदाई नहीं करनी चाहिए। कुछ लोग सपेरों से नाग खरीदकर उन्हें मुक्त भी कराते हैं और जीवित नाग को दूध से स्नान कराकर नाग देवता को प्रसन्न करते हैं।

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