2041 तक असम में हिंदू होंगे अल्पसंख्यक.? : असम की बदलती डेमोग्राफी पर CM हिमंत की चेतावनी के मायने
June 14, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत

2041 तक असम में हिंदू होंगे अल्पसंख्यक.? : असम की बदलती डेमोग्राफी पर CM हिमंत की चेतावनी के मायने

सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने जताई चिंता—2041 तक असम में मुस्लिम बहुलता संभव। जनसंख्या विस्फोट और घुसपैठ पर गंभीर आरोपों का सम्पूर्ण विश्लेषण...

Written byअभय कुमारअभय कुमार
Jul 25, 2025, 11:58 pm IST
in भारत, असम, विश्लेषण

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के अनुसार 2041 तक असम में हिंदू और मुस्लिम आबादी लगभग बराबर हो जाएगी। उनके वक्तव्य के अनुसार इसके बाद असम मुस्लिम बहुल राज्य बन जाएगा। जम्मू-कश्मीर और लक्षद्वीप के बाद असम तीसरा प्रदेश होगा, जहां हिंदू अल्पसंख्यक होंगे और मुसलमान बहुसंख्यक।

मुस्लिम आबादी में अप्रत्याशित वृद्धि घुसपैठ का संकेत

जम्मू-कश्मीर और लक्षद्वीप केंद्रशासित प्रदेश हैं, अतएव राज्यों में असम ही प्रतिशत के मामले में सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी वाला राज्य है और बना रहेगा।

यह बहुत गंभीर मामला है क्योंकि जिस तेजी से असम में मुसलमानों की आबादी बढ़ी है, वैसा भारत के किसी दूसरे राज्य में कभी नहीं हुआ है। किसी भी धर्म की आबादी अगर सामान्य तरीके से बढ़ती है तो इसमें कोई अतिवादिता नहीं है, लेकिन असम में जिस रफ्तार से मुसलमानों की जनसंख्या में बढ़ोतरी हुई है, उसे किसी भी लिहाज से सामान्य नहीं कहा जा सकता है।

मुस्लिम आबादी में अप्रत्याशित वृद्धि और घुसपैठ का संकेत

असम में मुस्लिम जनसंख्या में अप्रत्याशित वृद्धि बहुत बड़ी घुसपैठ की तरफ इशारा करती है। हकीकत में, असम में मुस्लिम जनसंख्या के विस्फोट के पीछे एक सोची-समझी बहुत बड़ी साजिश महसूस हो रही है। यह साजिश कोई नई नहीं, बल्कि आज़ादी के तत्काल बाद शुरू हो गई थी। इसका लक्ष्य पूरे असम को पूर्वी पाकिस्तान यानी आज के बांग्लादेश में शामिल करने का था।

यह भी पढ़ें – असम कांग्रेस में मुस्लिम देशों का हस्तक्षेप! प्रो-इस्लामिक हैंडल से साधा जा रहा चुनावी समीकरण? मुख्यमंत्री का बड़ा आरोप

यह साजिश आज भी अनवरत जारी है। अगर बांग्लादेश की जनसंख्या का आकलन करें तो पाते हैं कि वहां की जनसंख्या में वैसी वृद्धि नहीं देखी जा रही है। इसका निहितार्थ है कि बांग्लादेश के लोग अवैध रूप से असम और भारत के अन्य राज्यों में बस रहे हैं।

सरकार की प्रतिक्रिया और अतिक्रमण विरोधी अभियान

असम की भाजपा सरकार इस मामले की गंभीरता को भली-भांति समझती है और इसके समाधान के लिए यथोचित कदम भी उठा रही है। इसी क्रम में हिमंत बिस्वा सरमा की सरकार ने पूरे राज्य में वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने का एक बड़ा अभियान छेड़ रखा है। इस अतिक्रमण को रोकना असम की सांस्कृतिक, सामाजिक और राजनीतिक पहचान को बचाए रखने के लिए आवश्यक है।

यह भी पढ़ें – घुसपैठियों पर असम सरकार सख्त : लागू होगा 1950 अधिनियम, आयुक्तों को मिलेगा बड़ा विशेषाधिकार

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के अनुसार योजनाबद्ध तरीके से राज्य में मुस्लिम आबादी सरकारी और जंगलों की जमीन पर भी कब्जा कर रही है। हिमंत बिस्वा सरमा के अनुसार, अगर यह प्रवृत्ति जारी रही तो 2041 तक असम के मूल हिंदू निवासी अल्पसंख्यक बन सकते हैं। यह बदलाव न केवल आंकड़ों में दिखता है, बल्कि असम के सामाजिक और सांस्कृतिक ताने-बाने पर भी असर डाल रहा है।

31% मुसलमान हो सकते हैं बांग्लादेशी

हिमंत बिस्वा सरमा के अनुसार, असम राज्य की कुल मुस्लिम जनसंख्या में से सिर्फ 3% ही मूल असमिया आबादी है। यानी असम की कुल आबादी में 31% मुसलमान बांग्लादेशी हो सकते हैं। यह राज्य की जनसंख्या का एक तिहाई है।

1951 से 2011 तक मुस्लिम आबादी में वृद्धि का विश्लेषण

असम की जनसंख्या असंतुलन को समझने के लिए 1951 की प्रथम जनगणना से इस ओर विचार करना पड़ेगा। 1951 में असम में मुस्लिम आबादी 22.6% थी। 20 साल बाद 1971 में असम में मुस्लिम आबादी बढ़कर 24.6% हो गई। इसके 20 साल बाद, 1991 में असम में मुसलमानों की संख्या 28.4% हो गई।

यह भी पढ़ें – Operation Ghost SIM: असम पुलिस ने पाकिस्तान के लिए जासूसी करने वाले 7 लोगों को किया गिरफ्तार

2001 में असम में मुस्लिम आबादी बढ़कर 31% हो गई। 2011 की जनगणना में असम में मुसलमानों की आबादी 34.2% हो गई। जानकारों के अनुसार, अगली जनगणना में राज्य में मुसलमानों की जनसंख्या 40% के आंकड़े को भी पार कर सकती है।

राष्ट्रीय औसत की तुलना में असम में ढाई गुना वृद्धि

असम में मुस्लिम जनसंख्या की वृद्धि दर अन्य राज्यों से काफी अधिक है। 1951 से 2011 के बीच पूरे भारत में मुस्लिम आबादी 4.4% बढ़ी है, जबकि इसी दौरान असम में मुसलमानों की संख्या में 11.6% की बढ़ोतरी हुई है। देश में मुस्लिम जनसंख्या की अपेक्षा असम में ढाई गुना मुस्लिम जनसंख्या में वृद्धि देखी गई है।

मुस्लिम बहुल जिलों की स्थिति

असम के कई जिले मुस्लिम बहुल हो चुके हैं। असम में भी वैसे जिले जो बांग्लादेश की सीमा से सटे हैं, वहां मुसलमानों की जनसंख्या की वृद्धि दर काफी अधिक होने के साथ ही वे पूर्णतः मुस्लिम बहुल बन चुके हैं।

यह भी पढ़ें – असम : मस्जिद से आतंक फैलाने की साजिश नाकाम, NIA ने जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े इमाम को किया गिरफ्तार

वर्तमान में असम के लगभग 11 जिलों में वे बहुसंख्यक बन चुके हैं, वहीं अन्य चार जिलों में उनकी प्रभावी जनसंख्या है। 2001 की जनगणना के मुताबिक असम में छह मुस्लिम बहुल जिले थे और 2011 तक यह संख्या छह से बढ़कर 11 हो गई।

बांग्लादेश सीमा से सटे मुस्लिम बहुल जिले

इन मुस्लिम बहुल जिलों में अधिकतर वैसे जिले हैं, जो बांग्लादेश से सीधे सीमा साझा करते हैं या एक जिले के बाद आते हैं। अतएव कहा जा सकता है कि इन जिलों में अवैध बांग्लादेशियों के कारण ही जनसंख्या में इतनी तेजी से वृद्धि हुई है।

ज़िलामुस्लिम जनसंख्या %
दक्षिण शालमारा मनकाचर98.03%
धुबरी79.67%
बरपेटा70.74%
दारांग64.34%
हैलाकांडी60.31%
गोवालपारा57.52%
करीमगंज57.36%
नगांव55.36%
होजाइ53.65%
मरिगाँव52.56%
बंगाईगाँव50.22%

नोट – ये जिलेवार जनसंख्या (2011 की जनगणना के अनुसार है)

उपरोक्त जिलों में दक्षिण सलमारा, मनकाचर, धुबरी, गोवालपारा, करीमगंज जिले बांग्लादेश की सीमा से सीधे मिलते हैं।

बदरुद्दीन अजमल की पार्टी और मुस्लिम वोट बैंक

असम के मुस्लिम बहुल निचले असम में 2005 में मुस्लिमों के वोट बैंक की बहुलता को देखते हुए बदरुद्दीन अजमल ने आल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट नाम से पार्टी बनाई। इस पार्टी की स्थापना के समय के बाद से लगातार तीन लोकसभा चुनावों में पार्टी सुप्रीमो बदरुद्दीन अजमल ने धुबरी लोकसभा सीट से बड़ी जीत हासिल की।

यह भी पढ़ें – मालदीव कैसे बौद्ध से बना 100% मुस्लिम देश, जानिए 896 वर्षों की कहानी

इस दल ने स्थापना के बाद प्रथम विधानसभा चुनाव 2006 में 10 सीटें, 2011 में 18 सीटें, 2016 में 13 सीटें और वर्तमान विधानसभा के 2021 के चुनाव में 16 सीटों पर जीत दर्ज करके एक मजबूत दल के रूप में स्वयं को स्थापित कर लिया है। 2014 के लोकसभा चुनाव में अजमल की पार्टी ने तीन लोकसभा की सीटों — करीमगंज, धुबरी और बारपेटा — पर जीत हासिल करके अपनी हैसियत के साथ ही मुस्लिमों की बहुलता को भी प्रदर्शित कर दिया था।

Topics: AIUDFअसम मुस्लिम जनसंख्याअसम 2041असम हिंदू अल्पसंख्यकजनगणना 2021असम की राजनीतिdemography of assamहिमंत बिस्वा सरमाassam muslim populationधुबरीबदरुद्दीन अजमलबांग्लादेशी घुसपैठ
अभय कुमार
अभय कुमार
अभय कुमार, सीएसडीएस (CSDS ), इप्सोस (IPSOS) सहित कई रिसर्च और मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं। भारतीय राजनीति सामाजिक और अंतरराष्ट्रीय मामलो से जुड़े मुद्दों पर खास दिलचस्पी है और इसके लिए लिखते रहते हैं। [Read more]
Share1TweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

गुजरात में पकड़े गए बांग्लादेशी घुसपैठिए

गुजरात: पकड़े गए 362 बांग्लादेशी

हिमंत बिस्व सरमा, मुख्यमंत्री, असम

असम : 5 साल में अवैध कब्जे से 200 वर्ग किलोमीटर से ज्यादा जमीन मुक्त 

PM Narendra Modi petrol diesal crisis

जनसांख्यकी परिवर्तन और घुसपैठ पर मोदी सरकार की ऐतिहासिक कार्रवाई

शुभेंदु अधिकारी, मुख्यमंत्री, पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल में बांग्लादेशी घुसपैठियों पर शुभेंदु सरकार का सख्त एक्शन: रोजाना 70-80 वापस भेजे जा रहे

प्रतीकात्मक चित्र

बाड़बंदी से बौखलाया बांग्लादेश

गुवाहाटी में जीत की खुशी मनाते असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, राज्य भाजपा अध्यक्ष दिलीप सैकिया आदि।

तीसरी बार भाजपा सरकार

Load More

ताज़ा समाचार

Gulf crisis Air traffic

खाड़ी संकट से बुरी तरह प्रभावित एयर ट्रैफिक: IATA ने घटाई ग्रोथ उम्मीद, RPK सिर्फ 2.1%

Uttarakhand CM Dhami boat ride

CM पुष्कर सिंह धामी ने हरीपुर जलाशय में अंतरराष्ट्रीय क्याकिंग एवं कैनोइंग प्रतियोगिता की तैयारियों का लिया जायजा

Sudeep Bandopadhyay Meets Amit shah

टीएमसी में भगदड़! ममता के करीबी सुदीप बंद्योपाध्याय ने गृहमंत्री अमित शाह से की मुलाकात, हलचल तेज

Indian man killed in London

लंदन साउथॉल में भारतीय युवक गुर्भेज सिंह की चाकू से बेरहमी से हत्या

Patanjali civil service academy

पतंजलि सिविल सेवा अकादमी का शुभारंभ: IAS-IPS के लिए विरासत और विज्ञान का अनोखा संगम

Uttarakhand police

देहरादून: सहसपुर के बैरागीवाला में पानी की आपूर्ति पर विवाद, मुस्लिम युवकों के हमले में हिंदू युवक विनोद की मौत

Pauri garhwal encroachment

उत्तराखंड: पौड़ी जिले में गरजा बुलडोजर, सरकारी भूमि को कराया अतिक्रमण मुक्त

Patna Railway Station

पटना के पाटलिपुत्र स्टेशन पर छात्रों का बवाल: रेलवे में तोड़फोड़, आईजी जीतेंद्र राणा समेत कई पुलिसकर्मी घायल

PM Modi France visit

पीएम मोदी की फ्रांस यात्रा: G7 समिट में ग्लोबल साउथ की मजबूत आवाज

Indias ICBM System

भारत ने हासिल की ICBM रोकने की BMD क्षमता, DRDO के तीन परीक्षण सफल

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies