मालदीव कैसे बौद्ध से बना 100% मुस्लिम देश, जानिए 896 वर्षों की कहानी
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मालदीव कैसे बौद्ध से बना 100% मुस्लिम देश, जानिए 896 वर्षों की कहानी

896 वर्षों पहले मालदीव ने इस्लाम अपनाया। जानिए अबू अल-बरकात, राजा धोवेमी और इस्लामी शरिया शासन की पूरी ऐतिहासिक यात्रा...

Written byShivam DixitShivam Dixit
Jul 25, 2025, 09:23 pm IST
in विश्व

नई दिल्ली । आज जब मालदीव अपनी 896वीं इस्लामी वर्षगांठ मना रहा है, तो यह सिर्फ एक  वर्षगांठ नहीं, बल्कि एक ऐसे ऐतिहासिक मोड़ की याद है जिसने इस देश की संस्कृति, समाज और शासन की दिशा हमेशा के लिए बदल दी। आज हम बात करेंगे कैसे मालदीप बौद्ध से मुस्लिम राष्ट्र बन गया और कैसे इस्लाम उसकी पहचान का हिस्सा बन गया…

बौद्ध अतीत से इस्लामी देश तक का सफर

12वीं शताब्दी से पहले मालदीव बौद्ध धम्म का एक प्रमुख केंद्र था। यहां बौद्ध धम्म को मानने वालों की संख्या बहुत थी। इसी वजह से यहां बौद्ध मान्यताओं का प्रचलन बहुत अधिक था। माना जाता है कि बौद्ध धम्म यहां तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में पहुंचा था।

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इसी वजह से आज भी मालदीव में जगह-जगह द्वीपों पर बौद्ध स्तूप और मठों के अवशेष मिलते हैं, जो उस समय की विरासत को सहेजे हुए हैं।

राजा धोवेमी से सुल्तान मुहम्मद अल-आदिल तक

मालदीव में इस्लाम 12वीं सदी में फैलना शुरू हुआ, जब वहां अबू अल-बरकात यूसुफ अल-बरबरी पहुंचे।

ऐसा कहा जाता है कि अबू अल-बरकात यूसुफ अल-बरबरी उत्तरी अफ्रीका और वहीं कुछ अन्य मतों की माने तो वे सोमालिया या ईरान से आए थे। उन्होंने उस समय के राजा धोवेमी को इस्लाम अपनाने के लिए मतांतरित किया।

जिसके बाद धोवेमी ने इस्लाम अपनाया और अपना नया नाम— सुल्तान मुहम्मद अल-आदिल रख लिया और इस परिवर्तन के साथ मालदीव का इस्लामी सफर शुरू हुआ।

इस्लामी शासन और शरिया कानून

राजा धोवेमी के इस्लाम अपनाने के बाद मालदीव में न सिर्फ सुल्तानों का युग शुरू हुआ, बल्कि शरिया कानून को न्याय और प्रशासन का आधार बनाया गया। जिसके बाद सदियों तक मालदीव एक इस्लामी सल्तनत रहा और मजहबी शिक्षा, इस्लामी स्थापत्य कला, और मजहबी परंपराएं मालदीव के लोगों के जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गईं।

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फिर जब 1968 में जब मालदीव गणराज्य बना, तब भी इस्लाम देश राष्ट्रीय “मजहब” बना।

आज का मालदीव : 100% मुस्लिम आबादी

आज मालदीव इस्लामिक देश है और यहां 100% जनसंख्या मुस्लिम है। अब मालदीव में ना कोई बौद्ध धम्म का मानने वाला है, ना ही कोई सजीव बौद्ध प्रार्थना स्थल अब मालदीव में केवल मस्जिदें और अन्य मजहबी प्रतीक दिखाई देते हैं। अब वहां केवल इस्लामी परंपराएं निकाह से लेकर त्योहारों और दैनिक जीवन में गहराई से घुसी हुई हैं।

मुस्लिम पर्यटकों का पसंदीदा मालदीव

आज का मालदीव मुस्लिम पर्यटकों के लिए सबसे पसंदीदा ‘हलाल फ्रेंडली’ टूरिस्ट डेस्टिनेशन बनकर उभरा है।

क्योंकि यहां- शरियत के अनुसार महिलाओं के लिए अलग स्पा और पूल की सुविधाएं हैं। यहां प्राइवेट इस्लामिक फैमिली विला हैं। जगह जगह नमाज के लिए अलग से व्यवस्था है और गैर-मद्य पेय (Non-Alcoholic Options) की भरपूर व्यवस्था है।

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इसके अलावा यहां की सरकार पारंपरिक इस्लामी जीवनशैली को प्रोत्साहित कर उसे विशेष रूप से बढ़ावा दे रही है।

मालदीव का इस्लामी सफर केवल एक मजहबी परिवर्तन नहीं था, यह सांस्कृतिक, राजनीतिक और सामाजिक रूपांतरण की घटना है। 896 वर्षों की यह यात्रा दिखाती है कि कैसे बौद्ध से इस्लामिक देश बना मालदीव।

Topics: धोवेमीहलाल टूरिज्ममालदीव में इस्लामबौद्ध स्तूप अवशेषमालदीव का इतिहासमालदीवशरियाइस्लामी कानूनबौद्ध से मुस्लिम896 इस्लामी वर्षगांठअबू अल बरकात
Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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