अमेरिका ने ईरान से संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था, IAEA, के साथ सहयोग फिर से शुरू करने और अपने परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत की मेज पर लौटने को कहा है। साथ ही चेतावनी दी है कि अगर वो ऐसा नहीं करता है तो उसे और सख्त आर्थिक व कूटनीतिक दबाव का सामना करना पड़ सकता है। यह बयान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अमेरिका की कार्यवाहक राजदूत डोरोथी शीया ने दिया। उन्होंने ईरान के सामने दो रास्ते रखे: या तो वह IAEA के साथ सहयोग करे और कूटनीति के जरिए शांति व वैश्विक अर्थव्यवस्था में वापसी का रास्ता चुने, या फिर गुपचुप तरीके से अपने परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाए, जो क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है।
अमेरिका की चेतावनी
रिपोर्ट्स के अनुसार, डोरोथी शीया ने सुरक्षा परिषद में स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर ईरान कोई समझौता नहीं करता, तो अमेरिका उसकी गतिविधियों, खासकर परमाणु हथियार बनाने की कोशिशों, को रोकने के लिए हरसंभव कूटनीतिक और आर्थिक दबाव बनाए रखेगा। उन्होंने कहा कि ईरान का मौजूदा रवैया, जिसमें वह IAEA की निगरानी को नजरअंदाज कर रहा है और क्षेत्रीय सहयोगी समूहों का समर्थन कर रहा है, खतरनाक है। शीया ने चेतावनी दी कि अगर ईरान गुप्त रूप से अपने परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाता है, तो यह नॉन-प्रोलिफरेशन ट्रीटी (NPT) के तहत उसकी जिम्मेदारियों का उल्लंघन होगा।
ईरान का पलटवार
ईरान ने पिछले महीने अमेरिका और इजरायल के उसके परमाणु ठिकानों पर हमलों के बाद IAEA के साथ सहयोग को निलंबित करने वाला कानून पास किया था। हालांकि, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस सप्ताह कहा कि देश ने IAEA के साथ सहयोग पूरी तरह खत्म नहीं किया है। अब इस सहयोग को ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल देखेगी। फिर भी, इस कानून ने IAEA की ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर नजर रखने की क्षमता को कमजोर किया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंताएं बढ़ गई हैं।
इसे भी पढ़ें: India UK Trade Deal: भारत और ब्रिटेन ने समग्र आर्थिक एवं व्यापारिक समझौते पर किए हस्ताक्षर, पढ़ें पूरी रिपोर्ट
स्नैपबैक का खतरा
अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगी देशों—जर्मनी, फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम—ने ईरान को अगस्त के अंत तक परमाणु समझौते के लिए राजी होने की समय सीमा दी है। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो 2015 के परमाणु समझौते (JCPOA) के तहत बने स्नैपबैक तंत्र के जरिए संयुक्त राष्ट्र की सभी पुरानी पाबंदियां फिर से लागू हो सकती हैं। यह तंत्र संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2231 का हिस्सा है, जिसके तहत अगर ईरान समझौते का पालन नहीं करता, तो कोई भी हस्ताक्षरकर्ता देश 30 दिनों के भीतर पाबंदियां फिर से लागू कर सकता है। अगर इस दौरान कोई नया प्रस्ताव पास नहीं हुआ, तो पुरानी पाबंदियां अपने आप लागू हो जाएंगी।
आज ईरान शुक्रवार को इस्तांबुल में जर्मनी, फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम के साथ परमाणु वार्ता करने वाला है। हालांकि, अमेरिका के साथ बातचीत का रास्ता अभी बंद है। मस्कट में छठे दौर की वार्ता इजरायल के 13 जून को ईरान पर हमलों के ठीक पहले रद्द हो गई थी। यह स्थिति क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा रही है।

















