गत 17 जुलाई को सोलापुर (महाराष्ट्र) स्थित हुतात्मा स्मृति मंदिर में ‘उद्योगवर्धिनी’ संस्था ने परिवार उत्सव कार्यक्रम आयोजित किया। बता दें कि यह संस्था महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कार्य कर रही है। इस वर्ष यह संस्था अपनी 21वीं वर्षगांठ मना रही है। इसी उपलक्ष्य में यह कार्यक्रम आयोजित हुआ।
इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत ने कहा कि वात्सल्य का वरदान प्राप्त मातृशक्ति में समाज के उद्धार का विचार स्वाभाविक रूप से होता है। इसलिए, जब यह शक्ति खड़ी हो जाएगी, तो राष्ट्र की उन्नति निश्चित रूप से होगी। महिलाओं को उनकी इच्छा के अनुसार काम करने की स्वतंत्रता देनी चाहिए। इसके लिए उन्हें अनुचित रूढ़ियों के बंधन से मुक्त करना चाहिए। उद्योगवर्धिनी संस्था सामान्य लोगों के असाधारण प्रदर्शन से खड़ी हुई है।
सरसंघचालक ने आह्वान किया कि संस्था अपने सशक्तिकरण के साथ-साथ अपनी प्रेरणा से अन्य स्थानों पर भी उद्योगवर्धिनी जैसी संस्थाएं खड़ी करे। कार्यक्रम में उद्योगवर्धिनी पर आधारित ‘अखंड यात्रा’ नामक एक वृत्तचित्र दिखाया गया। उद्योगवर्धिनी न केवल सोलापुर की, बल्कि महाराष्ट्र की महिलाओं को सहारा देने वाली संस्था के रूप में उभर रही है।’ उद्योगवर्धिनी की संस्थापक अध्यक्ष चंद्रिका चौहान ने आह्वान किया कि उद्योगवर्धिनी समाज की है और समाज को इसमें योगदान देना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘यह संस्था वरिष्ठ समाजसेवी नानाजी देशमुख की प्रेरणा से शुरू हुई और स्वयंसेवकों की मदद से, सोलापुरवासियों के सहयोग से और महिलाओं के श्रम से खड़ी हुई है। महिला स्वावलंबन के लिए एक प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने की तैयारी चल रही है। इसके लिए प्रशासन सहित समाज के सहयोग की अपेक्षा है।’ इस अवसर पर जिलाधिकारी कुमार आशीर्वाद के साथ ही संस्था के अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
एक बेटी गई, लेकिन 500 बेटियां मिलीं
एक लाभार्थी वासंती सालुंखे ने बताया कि उद्योगवर्धिनी में आने के बाद न केवल उनका घर संभला, बल्कि उनके बेटे की शिक्षा भी पूरी हुई। आज उनके पास अपना पक्का घर है और वे अन्य महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए संस्था के अन्नपूर्णा विभाग में कार्यरत हैं। वहीं, 2005 से संस्था के महिला बचत समूह में कार्यरत मीनाक्षी सलगर ने कहा, ‘हमारे बचत समूह ने सशक्त होकर कई महिलाओं के जीवन को संवारा है। आज मुझे उद्योगवर्धिनी के सेवा पाथेय प्रकल्प में समय देने का अवसर मिल रहा है। इस बीच मेरी बेटी का निधन हो गया, लेकिन सेवा पाथेय उपक्रम के कारण मुझे 500 बेटियों के जीवन को संवारने का काम मिला है।’

















