मालदा की एक अदालत ने 9 साल की मासूम से बलात्कार के दोषी रफीकुल इस्लाम को उम्रकैद की सजा सुना दी। ये रफीकुल कोई और नहीं, बल्कि एक रिटायर्ड स्कूल टीचर है! 4 जुलाई 2025 को आए इस फैसले में कोर्ट ने 50,000 रुपये का जुर्माना भी ठोका। 2021 में चुनाव बाद हुई हिंसा के इस मामले में ये पहली बार है जब CBI की मेहनत रंग लाई।
CBI ने कैसे पकड़ा?
2021 में जब बंगाल में चुनाव बाद हिंसा की घटनाओं के बाद जब बवाल मचा तो कोलकाता हाईकोर्ट ने CBI को ऐसे मामलों की जांच सौंपी। केंद्रीय एजेंसी की जांच में सामने आया कि 4 जून 2021 को रफीकुल बच्ची को बहला-फुसलाकर एक आम के बगीचे में ले गया और वहाँ उसके साथ दरिंदगी की। इस मामले में बच्ची और उसकी चचेरी बहन की गवाही के आधार पर ही कोर्ट ने दोषी रफीकुल को सजा सुनाई है।
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22 गवाहों से की गई पूछताछ
कोर्ट ने POCSO एक्ट की धारा 6 और IPC की धारा 376AB के तहत सजा सुनाई। 22 गवाहों की बातें सुनी गईं, और बच्ची की हिम्मत भरी गवाही ने सबको हैरान कर दिया। सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने 2 जुलाई को अभियुक्त को दोषी करार दिया और चार जुलाई को उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इससे अब बाकी के मामलों में भी न्याय मिलने की आस जगी है।
घर वालों ने की थी फांसी की मांग
इस मामले में पीड़िता के परिजनों को खुशी तो है कि दरिंदे को सजा मिली, लेकिन उनके मन में एक कसक अभी भी है कि वे उसे फांसी की सजा न दिला सके। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में टीएमसी के चुनाव जीतने के बाद वहां पर टीएमसी समर्थकों ने बड़े पैमाने पर भाजपा समर्थकों को निशाना बनाया था। कईयों की हत्याएं कर दी गई थी। सैकड़ों लोगों ने पलायन किया था। इसी मौके का फायदा उठाकर कट्टरपंथियों ने महिलाओं और बच्चियों के साथ रेप जैसी वारदातों को भी अंजाम दिया था।
पीड़िता को 3 लाख रुपए का मुआवजा देने का निर्देश
अपने फैसले में अदालत ने पश्चिम बंगाल सरकार को ये निर्देश दिया है कि वो पीड़िता को 3 लाख रुपए का मुआवजा तुरंत दे। ये मुआवजा विक्टिम कंपंनशेसन फंड से देने को कहा गया है।

















