मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG के बहुचर्चित पेपर लीक मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी CBI ने बुधवार को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी। सीबीआई ने दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में 13 गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ लगभग 20000 पन्नों की एक चार्जशीट दाखिल की है। जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि चार्जशीट के साथ जुड़े हजारों पन्नों को डिजिटल रूप से स्कैन करने का काम पूरा किया जा रहा है।
कोर्ट ने बीते मंगलवार को नोटिस किया था कि चार्जशीट के साथ कुछ जरूरी दस्तावेज नहीं हैं। इसलिए आज सीबीआई के इस आरोप पत्र को रिकॉर्ड पर लेते हुए बाकी बचे दस्तावेजों को जमा करने के लिए समय दिया। अब इस हाई-प्रोफाइल मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को होगी।
किन-किन धाराओं में तय हुए आरोप?
सीबीआई की चार्जशीट में नामजद सभी 13 आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में जेल में हैं। जांच एजेंसी ने आरोपियों के खिलाफ सख्त धाराएं लगाई हैं। भारतीय न्याय संहिता की आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और साक्ष्य मिटाने के गंभीर आरोप के तहत आने वाली धाराएं लगी हैं। साथ ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की आर्थिक धांधली और भ्रष्टाचार से जुड़ी धाराएं भी आरोपियों पर लगाई गई हैं। इसके अलावा लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम 2024 के तहत भी उन पर मुकदमा चलाया जाएगा।
सीबीआई के पास है गवाहों सबूतों की लंबी लिस्ट
सीबीआई ने अपनी इस चार्जशीट में बताया कि उनके पास 360 लोगों के बयान दर्ज हैं। इस केस को मजबूत बनाने के लिए उनके 422 महत्वपूर्ण दस्तावेज भी हैं। यही नहीं चार्जशीट से पता चला है कि मौके से बरामद 43 फिजिकल एविडेंस, लीक हुए पेपर्स की डिजिटल ट्रेल, विशेषज्ञों की राय को भी इसमें शामिल किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि जांच में वह डिजिटल फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की भी राय ले रही है।
92 ठिकानों पर छापेमारी और 3 NTA विशेषज्ञ हुए गिरफ्तार
शिक्षा मंत्रालय से शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने 12 मई 2026 को एफआईआर दर्ज की थी। इसके बाद 72 अधिकारियों की विशेष टीमें बनाई गईं, जिनमें 8 साइबर फॉरेंसिक एक्सपर्ट भी शामिल थे। इसके बाद देशभर में छापे मारे गए। सीबीआई ने महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली और अन्य राज्यों में कुल 92 ठिकानों पर एक साथ छापे मारे। छापेमारी के दौरान नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) से जुड़े 3 विषय विशेषज्ञों (केमिस्ट्री, बायोलॉजी और फिजिक्स) को भी गिरफ्तार किया गया। इनके नाम भी सामने आ गए हैं। बताया जा रहा है कि पीवी कुलकर्णी, मनीषा गुरुनाथ मंधारे और मनीषा संजय हवलदार पेपर लीक केस में शामिल थे। दो कोचिंग संस्थानों से जुड़े लोगों और कई बिचौलियों को दबोचा गया जिन्होंने कथित तौर पर लीक पेपर को अभ्यर्थियों तक पहुंचाने का काम किया था।
केस से जुड़े बैंक खाते, लॉकर आदि किए फ्रीज
सीबीआई ने केवल पेपर लीक करने वालों को ही नहीं पकड़ा बल्कि इस पूरे खेल में हुए करोड़ों रुपये के लेन-देन का भी पर्दाफाश किया है। जांच एजेंसी ने आरोपियों से जुड़े कई बैंक खातों, लॉकरों और एक डीमैट खाते को फ्रीज कर दिया है। वित्तीय लेन-देन की गहराई से जांच करने से पुलिस को उन अभ्यर्थियों और अभिभावकों की पहचान करने में मदद मिली है जिन्होंने पैसे देकर लीक प्रश्नपत्र खरीदा था।
अब आगे क्या होगा?
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में 3 अगस्त को होने वाली सुनवाई के दौरान सीबीआई जांच की आगे की प्रगति रिपोर्ट पेश करेगी। मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता वी.के. पाठक और अर्जुन आनंद को विशेष लोक अभियोजक (पब्लिक प्रोसिक्यूटर) नियुक्त किया गया है। सीबीआई का दावा है कि उसने प्रश्न पत्र लीक करने वाले मास्टरमाइंड से लेकर उसका फायदा उठाने वाले आखिरी छात्र तक की पूरी नेटवर्क चेन का पर्दाफाश कर दिया है और आगे की जांच में कुछ और बड़े खुलासे होने की संभावना है।

















