यूपी के कौशांबी जनपद में नाबालिग लड़कियों की खरीद-फरोख्त और जबरन शादी कराने वाले गिरोह का पुलिस ने पकड़ा है। पुलिस ने दो महिला समेत पांच अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। पीड़िता को उसके घर वालों को सौंप दिया गया है।
पीड़िता ने बताया कि गत 25 मार्च 2026 को वह नाराज होकर बिना किसी को बताए घर से भाग गई थी। घर से निकाल करके वह स्टेशन गई और ट्रेन पर बैठ करके कानपुर पहुंच गई। कानपुर रेलवे स्टेशन पर उसकी मुलाकात अंशु नाम के युवक से हुई। अंशु ने बहला-फुसलाकर अपने भरोसे में लिया और अपने साथ ले गया। अंशु ने उसे करीब दो से तीन दिन तक कमरे पर रखा। इसके बाद वह उसे अपने दोस्त शाहरुख के कमरे पर ले गया।
पीड़िता ने बताया कि अंशु ने अपनी परिचित महिला अनुराधा की मदद से उसे मंजू देवी नाम की महिला को 70 हजार रुपये में बेच दिया। आरोप है कि मंजू देवी ने पैसे देकर किशोरी को खरीदने के बाद उसकी जबरन शादी अपने देवर सुमित से करा दी। शादी के बाद उसे कमरे में बंद रखा गया। विरोध करने पर जबरन दुष्कर्म, मारपीट की गई और जान से मारने की धमकी दी गई।
पुलिस के अनुसार पीड़िता के बयान और साक्ष्यों के आधार पर मानव तस्करी, खरीद-फरोख्त, जबरन विवाह और पॉक्सो एक्ट सहित कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर अभियुक्तों को जेल भेज दिया गया है।
कौशाम्बी जनपद के पुलिस अधीक्षक सत्यनारायण ने बताया कि 25 मार्च 2026 को एक व्यक्ति ने अपनी नाबालिग बेटी के लापता होने की सूचना थाना कोखराज में दी थी। इस मामले में विशेष टीम गठित कर जांच शुरू की गई। सर्विलांस और मुखबिर की सूचना के आधार पर पुलिस ने 22 अप्रैल 2026 को किशोरी को कानपुर से बरामद कर लिया।
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि मेडिकल परीक्षण और बयान के दौरान पीड़िता ने बताया कि उसे बहला-फुसलाकर ले जाया गया था। उसके बाद में 70 हजार रुपये लेकर बेच दिया गया। फिर उसकी जबरन शादी करा दी गई। विरोध करने पर उसके साथ जबरन दुष्कर्म, मारपीट और जान से मारने की धमकी भी दी गई। पुलिस ने इस मामले में सुमित कुमार, अनुराधा, मंजू, शाहरुख हुसैन और अंशु जाटव गिरफ्तार किया है। सभी आरोपी कासगंज, हाथरस एटा और मैनपुरी के रहने वाले हैं। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से सात मोबाइल फोन और 13,150 रुपये नकद बरामद किए हैं।

















