बांग्लादेश में शेख हसीना के जाने के बाद जो अराजकता फैली थी, उसके शिकार हिंदू हुए। महिलाएं पर जुल्म ढाए गए। महिलाओं के साथ बलात्कार से लेकर भीड़ में भी पीटे जाने की घटनाएं हुई हैं। मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार कहने के लिए बड़ी बड़ी बातें करती है, मगर उसके अपने देश में महिलाओं की क्या स्थिति है, वह यह रिपोर्ट दिखाती है।
इस रिपोर्ट को बांग्लादेश महिला परिषद ने बनाया है और यह रिपोर्ट बांग्लादेश महिला परिषद की केंद्रीय कानूनी सहायता उप-समिति द्वारा संग्रहित 15 राष्ट्रीय दैनिक समाचार पत्रों की खबरों का विश्लेषण करके तैयार की गई है। इसे 1 जुलाई को मीडिया के सामने जारी किया गया।
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जून में 200 से ज्यादा महिलाओं के साथ हिंसा
इस रिपोर्ट में लिखा है कि कैसे जून के ही महीने में अकेले 203 महिलाएं हिंसा का शिकार हुई है और इनमें 87 बच्चियाँ है। newdhakatimes के अनुसार इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इनमें से 43 बच्चों सहित 65 महिलाओं के साथ बलात्कार हुआ था। 5 बच्चों सहित 8 महिलाओं के साथ सामूहिक बलात्कार हुआ और 3 महिलाओं की हत्या बलात्कार के बाद कर दी गई। 7 बच्चों के साथ बलात्कार का प्रयास हुआ।
पीड़िताओं में बच्चियां और दिव्यांग भी शामिल
जून में ही 2 महिलाओं ने पीछा करने की वजह से आत्महत्या कर ली। इसके अलावा 13 बच्चों समेत 68 महिलाओं की अलग-अलग वजहों से हत्या कर दी गई। 2 बच्चों समेत 11 महिलाओं की रहस्यमयी परिस्थितियों में मौत हो गई। एक महिला पर तेजाब से हमला किया गया, जबकि 3 महिलाएं झुलस गईं, जिनमें से 2 की मौत हो गई। जो पीड़ित महिलाएं हैं, उनमें दिव्यांग महिलाएं भी हैं। मई में बलात्कार के 59 मामले सामने आए थे।
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मई महीने से अज्ञात शव मिलने की संख्या में भी वृद्धि हुई है और साथ ही राजनीतिक हिंसा में भी कमी नहीं आई है।
बच्चियों से लेकर किशोरियों तक हर उम्र की लड़कियां शिकार हुई हैं। जून के महीने में 63 बलात्कारों के शिकार में 19 बच्चे हैं और 23 किशोर। सामूहिक बलात्कार के मामलों में दो बच्चियाँ, तीन किशोरियाँ और आठ वयस्क महिलाएं हैं।
महिलाओं के लिए असुरक्षित बांग्लादेश
यह आँकड़े भयभीत करने वाले हैं। यह दिखाते हैं कि किस प्रकार महिलाओं के प्रति बांग्लादेश में माहौल बिगड़ रहा है। अभी एक हिन्दू महिला के साथ बलात्कार का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल है और पिछले दिनों एक ऐसी प्रोफेसर का भी इंटरव्यू वायरल हुआ था, जिन्होनें शेख हसीना को हटाने के अभियान में भाग लिया था और अब यह कहा था कि शेख हसीना के जाने के बाद महिलाओं की हालत बांग्लादेश में बहुत खराब हो गई है।
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यह भी मामले सामने आए कि कैसे कट्टरपंथियों के आगे यूनुस सरकार ने घुटने टेके, फिर चाहे वह महिला आयोग द्वारा की गई अनुशंसाओं को न मानना हो या फिर महिला खिलाड़ियों को सुरक्षित माहौल न देना।
वास्तविक आंकड़ा इससे भी अधिक
बांग्लादेश महिला परिषद की अध्यक्ष डॉ. फौज़िया मोस्लेम ने कहा, “ये आँकड़े केवल दर्ज मामलों को दर्शाते हैं। वास्तविक संख्याएँ इससे कहीं ज़्यादा हो सकती हैं, क्योंकि सामाजिक कलंक और कानूनी जटिलताओं के कारण कई घटनाएँ रिपोर्ट ही नहीं की जातीं।” उन्होंने आगे बताया कि संगठन महिलाओं के खिलाफ़ हिंसा से निपटने के लिए सरकार से अपील के तहत कानूनों के सख्त क्रियान्वयन, जागरूकता बढ़ाने और पीड़ितों के लिए ज़्यादा सुरक्षित आश्रय की माँग कर रहा है।
उठे राजनीतिक प्रश्न
इस रिपोर्ट को लेकर अब राजनीतिक प्रश्न भी उठ रहे हैं। बांग्लादेश छात्र लीग के अध्यक्ष और ढाका विश्वविद्यालय केंद्रीय छात्र संघ के पूर्व सहायक महासचिव हुसैन सद्दाम ने एक्स पर पोस्ट में लिखा कि यूनुस सरकार पूरी तरह से महिला और बच्चों के मामले में विफल रही है। हिंसा की यह महामारी महीनों से चली आ रही राज्य की उदासीनता और कानून प्रवर्तन की पूर्ण विफलता का प्रत्यक्ष परिणाम है। यह एक ऐसे समाज का भयावह प्रतिबिंब है जहां इस्लामी भीड़ का हौसला बुलंद है, राजनीतिक प्रतिशोध अनियंत्रित है और यह भी सच है कि लोगों के मन में दंड का डर नहीं है। महिलाएं और बच्चे एक अवैध सरकार की कीमत चुका रहे हैं जिसके पास कार्रवाई करने की न तो क्षमता है और न ही साहस।
महामारी के स्तर की आपदा
बांग्लादेश समाज कल्याण और महिला एवं बाल मामलों के मंत्रालय की सलाहकार शर्मीन एस मुर्शिद ने 20 जून से 29 जून तक बांग्लादेश में बलात्कार के लगभग 24 मामले सामने आने पर अपनी बात कही है। ढाकाट्रिब्यून के अनुसार उन्होनें इसे “महामारी के स्तर की आपदा” कहा है।
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उन्होनें गुरुवार में सचिवालय में प्रेस ब्रीफिंग में बात रखते हुए कहा कि उपजिला स्तर पर क्विक रीस्पान्स टीम बनाने के लिए कदम उठा लिए गए हैं। उन्होनें यह भी कहा कि सरकारें आईं और गईं, मगर इस समस्या का समाधान नहीं मिल सका। इसके साथ ही उन्होनें इसके लिए राजनीति, ड्रग, तकनीक और सामाजिक मूल्यों के पतन को जिम्मेदार बताया। उन्होनें कहा कि एक 10 साल के बच्चे ने ढाई साल की बच्ची के साथ यौन शोषण किया है। हम इसे कैसे समझा सकते हैं? उस बच्चे को तो यह भी समझ में नहीं आ रहा कि उसने क्या किया है।
बच्चों के लिए पोर्नोग्राफ़ी को भी प्रतिबंधित करने की उन्होनें बात की और साथ ही यह भी कहा कि मदरसों में भी यौन उत्पीड़न हो रहा है और हमारे अधिकारियों को स्कूल्स और मदरसों में लगातार जाना चाहिए।

















