नई दिल्ली । हिमाचल के धर्मशाला से एक बेहद अहम खबर सामने आई है। तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा ने बुधवार को साफ शब्दों में कहा है कि दलाई लामा की परंपरा भविष्य में भी जारी रहेगी। उन्होंने ये घोषणा उस ऐतिहासिक चर्चा की पृष्ठभूमि में की है, जो 2011 में शुरू हुई थी, जब उन्होंने पहली बार सवाल उठाया था कि क्या इस परंपरा को भविष्य में जारी रखा जाना चाहिए या नहीं।
1969 में ही दिया था संकेत
दलाई लामा ने याद दिलाया कि 1969 में उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि उनके पुनर्जन्म की परंपरा को जारी रखना है या नहीं, इसका फैसला तिब्बती जनता और संबंधित समुदायों को करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा था कि जब वे 90 वर्ष के करीब होंगे, तब वे इस विषय पर तिब्बती बौद्ध परंपराओं के वरिष्ठ धर्मगुरुओं और जनता से फिर से सलाह-मशविरा करेंगे।
समाज की मांग को किया स्वीकार
हालांकि पिछले 14 वर्षों में इस विषय पर सार्वजनिक चर्चा बहुत ज़्यादा नहीं हुई, लेकिन तिब्बती संसद, केंद्रीय तिब्बती प्रशासन, धार्मिक संगठनों, अंतरराष्ट्रीय बौद्ध अनुयायियों और खासतौर पर तिब्बत के भीतर रहने वाले तिब्बती लोगों ने लगातार आग्रह किया कि दलाई लामा की परंपरा को बंद नहीं किया जाए।
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इन अपीलों को स्वीकार करते हुए, दलाई लामा ने अपने धर्मशाला स्थित निवास से घोषणा की कि उनकी परंपरा जारी रहेगी, और भविष्य में जब अगला दलाई लामा जन्म लेंगे, तो उन्हें मान्यता पारंपरिक धार्मिक पद्धतियों के अनुसार दी जाएगी।
अगला दलाई लामा कौन.? फैसला करेगा गादेन फोडरंग ट्रस्ट
दलाई लामा ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में पुनर्जन्म की मान्यता केवल गादेन फोडरंग ट्रस्ट के हाथ में होगी। यह ट्रस्ट उनके आधिकारिक कार्यालय द्वारा संचालित है और वही वरिष्ठ लामाओं और धर्मरक्षकों से परामर्श लेकर अगली प्रक्रिया को पूरा करेगा।
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उन्होंने सख्त शब्दों में दोहराया कि इस विषय में किसी सरकार या राजनीतिक संस्था, विशेषकर चीन को हस्तक्षेप का कोई अधिकार नहीं है।
चीन के दावे को किया खारिज
गौरतलब है कि चीन पहले ही इशारा कर चुका है कि वह अगला दलाई लामा खुद तय करेगा, लेकिन तिब्बती समुदाय और खुद दलाई लामा इस विचार को पूरी तरह नकार चुके हैं। दलाई लामा ने साफ कहा कि यह धार्मिक और आध्यात्मिक परंपरा है, जिसे केवल तिब्बती बौद्ध धर्मगुरु ही तय करेंगे।
जानिए कौन होते हैं दलाई लामा..?
दलाई लामा, तिब्बती बौद्ध धर्म के सबसे सम्मानित आध्यात्मिक नेता हैं। उन्हें बोधिसत्व अवलोकितेश्वर का अवतार माना जाता है, जो करुणा के प्रतीक हैं। हर नए दलाई लामा की पहचान एक विशेष आध्यात्मिक प्रक्रिया के तहत होती है, जिसमें गहन धार्मिक अनुष्ठान और परीक्षण शामिल होते हैं।
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अब दलाई लामा के इस ऐलान से स्पष्ट है कि तिब्बती परंपराओं की यह सबसे पवित्र कड़ी भविष्य में भी नहीं टूटेगी।

















