देहरादून: केंद्र सरकार ने 15 हजार करोड़ रुपए की किशाऊ बांध परियोजना को आगे बढ़ाने पर सहमति दे दी है। यह बांध उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर टौंस नदी पर बनेगा। टौंस नदी यमुना की सहायक नदी है। जौनसार और सिरमौर घाटी की जीवन रेखा के रूप में जानी जाती टोंस नदी की अपनी एक अलग जनजाति सभ्यता है।
आठ साल पुराना विवाद सुलझा, परियोजना को मिली मंजूरी
दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में आठ साल पुराना वित्तीय विवाद सुलझा लिया गया। केंद्र द्वारा ये तय हुआ कि जिन राज्यों को पानी मिलेगा, वे पावर कंपोनेंट की लागत उठाएंगे। इससे हिमाचल को सालाना 600 करोड़ रुपए के बराबर 100 करोड़ यूनिट बिजली मिलेगी। यह बांध भाखड़ा बांध से भी ऊंचा होगा- इसकी ऊंचाई करीब 236 मीटर होगी। इससे 422 मेगावाट बिजली बनेगी और 97 हजार हेक्टेयर से अधिक जमीन की सिंचाई होगी। उत्तराखंड और हिमाचल को बिजली उत्पादन में 50-50 फीसदी हिस्सा मिलेगा।
परियोजना से दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को पानी मिलेगा। सबसे ज़्यादा फायदा हरियाणा को होगा जिसे कुल पानी का करीब 47 फीसदी हिस्सा मिलेगा। उत्तराखंड को 0.311 बिलियन क्यूबिक लीटर पानी का हिस्सा मिलेगा। किशाऊ बांध को 2008 में राष्ट्रीय महत्व की परियोजना का दर्जा दिया गया था। यह परियोजना उत्तराखंड के लिए बिजली और पानी दोनों के लिहाज़ से बेहद अहम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा में शामिल इस प्रोजेक्ट पर अब आगे काम शुरू होने की उम्मीद है।















