30 मई को पुणे के पास राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) खड़कवासला से 17 महिला कैडेटों का प्रशिक्षण पूरा करके निकलना भारतीय सशस्त्र सेनाओं के इतिहास में एक और मील का पत्थर सिद्ध होगा। इन महिला कैडेटों ने 300 पुरुष कैडेटों (जिन्हें जेंटलमैन कैडेट या जीसी कहा जाता है) के साथ तीन साल का कठोर प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया एवं जेएनयू से स्नातक की डिग्री भी प्राप्त की। अब ये 17 महिला कैडेट अगले साल मई-जून में कमीशन अधिकारी बनने के लिए एक और वर्ष के सेवा विशिष्ट प्रशिक्षण के लिए जाएंगी।

ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी (ओटीए) चेन्नई एकमात्र संस्थान था, जहां महिला कैडेट या डब्ल्यूसी (वुमेन कैडेट) को भारतीय सेना में कमीशन अधिकारी बनने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा था। इसलिए एनडीए में इसके प्रशिक्षण के लिए जरूरी जानकारी सिर्फ ओटीए चेन्नई के पास थी। एनडीए कमांडेंट के नेतृत्व में अधिकारियों की एक टीम ने ओटीए चेन्नई का दौरा किया और प्रशिक्षण पद्धति देखी। मेरी टीम ने उन्हें सामरिक अवधारणाओं से निपटने और जीवन की कठोरता का सामना करने के लिए प्रशिक्षित और तैयार करने के तरीके की विस्तृत जानकारी दी। अत्यंत प्रसन्नता का विषय है कि एनडीए ने जून 2022 में प्रशिक्षण शुरू करने पर डब्ल्यूसी के लिए ओटीए चेन्नई में अपनाई जा रहीं कई सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाया।
एकीकृत प्रशिक्षण और चुनौतियां
ओटीए चेन्नई भारतीय सेना में शॉर्ट सर्विस कमीशन (एसएससी) के लिए पुरुष और महिला कैडेटों को प्रशिक्षित करता है। सेना में 10 साल तक सेवा देने के बाद केवल जीसी स्थायी कमीशन के पात्र थे। फरवरी 2020 में एक ऐतिहासिक फैसले में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि महिलाओं को भी सशस्त्र सेनाओं में स्थायी कमीशन मिलना चाहिए। इसका श्रेय मोदी सरकार को जाता है। उन्होंने तीनों सेनाओं में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश को शीध्र लागू करने को कहा। दो महीने से भी कम समय में महिला अधिकारियों के लिए लगभग 500 कर्नल रैंक की रिक्तियां रक्षा मंत्रालय से प्राप्त हो गईं।
ओटीए चेन्नई में महिला कैडेटों को कम समय में प्रशिक्षित करने की भारी जिम्मेदारी थी। ओटीए चेन्नई ने वर्ष 2021 की शुरुआत से जीसी और डब्ल्यूसी के लिए ‘एकीकृत प्रशिक्षण’ नामक प्रशिक्षण की एक नई अवधारणा प्रारंभ की। इससे पहले, डब्ल्यूसी अलग से प्रशिक्षण लेते थे, क्योंकि वे स्थायी कमीशन के लिए पात्र नहीं थे। इसके लिए पात्रता के साथ आवश्यक था कि उन्हें अपने करियर की अवधि के दौरान अपने पुरुष समकक्षों के साथ प्रशिक्षित और संचालित किया जाए। महिला कैडेटों को शारीरिक प्रशिक्षण, ड्रिल परेड, हथियारों से फायरिंग, आउटडोर अभ्यास आदि से लेकर जीसी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर प्रशिक्षण देना एक चुनौती थी। महिला होने के नाते, उनकी स्वच्छता आवश्यकताओं और नारी सम्मान के मुद्दों को ध्यान में रखना भी जरूरी था।

महिलाओं को स्थायी कमीशन
नई अवधारणा को लागू करने के लिए अकादमी को अतिरिक्त संसाधनों की तलाश करनी पड़ी। लेकिन छह महीने के बाद, जिसे अकादमी में ‘एक टर्म’ कहा जाता है, हमने जल्दी ही अपना सबक सीखा। प्रशिक्षण पद्धति में आवश्यक परिवर्तन किए ताकि अकादमी में दिनचर्या के लिए अधिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण लाया जा सके। अन्य अकादमियों के विपरीत ओटीए चेन्नई की प्रशिक्षण अवधि सिर्फ 11 महीने है। इस दौरान कैडेटों से अपेक्षा की जाती है कि वे उन्हीं शारीरिक मानकों को प्राप्त करें, जहां प्रशिक्षण अवधि 18 महीने से चार साल तक की होती है। इसलिए ओटीए चेन्नई के पास प्रशिक्षण की सबसे कम अवधि के साथ कमीशन अधिकारियों को तैयार करने का सबसे अच्छा समाधान है। इसके अलावा, जीसी व डब्ल्यूसी के संयुक्त प्रशिक्षण से एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा आती है, जो उनके पेशेवर मानकों को और आगे बढ़ाती है।
वर्ष 2020 से महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन प्रदान किए जाने के बाद उनके प्रदर्शन और क्षमताओं में महत्वपूर्ण और स्पष्ट सुधार हुआ है। कर्नल रैंक की महिला अधिकारियों ने अपनी कमान के तहत पुरुषों के साथ इकाइयों और रेजिमेंटों की कमान संभाली है। ऑपरेशन सिंदूर की प्रेसवार्ता के दौरान प्रवक्ता के रूप में कर्नल सोफिया कुरैशी का अनुकरणीय प्रदर्शन ऐसा ही एक उदाहरण है।

सशस्त्र बलों में बेटियां
सशस्त्र सेनाओं में बड़ी संख्या में महिला अधिकारियों और महिला सैनिकों की भर्ती मोदी सरकार की प्रमुख उपलब्धियों में से एक रही है, खासकर पिछले पांच वर्ष में। तीनों सेवाओं में से केवल भारतीय सेना में सबसे कठिन और चुनौतीपूर्ण सेवा शर्तें हैं। भारतीय सेना की महिला अधिकारियों और महिला सैनिकों ने अपनी क्षमता साबित की है और हर अवसर पर खरी उतरी हैं।
ऑपरेशन सिंदूर में भी इनका प्रदर्शन अच्छा रहा है। धीरे-धीरे उनके नेतृत्व गुणों को पुरुष प्रधान सेना, विशेष रूप से सैनिकों द्वारा स्वीकार किया गया है। इसलिए, यदि महिलाएं सेना की सबसे कठिन सेवा शर्तों को पूरा करने में सफल रही हैं, तो अन्य वर्दीधारी सशस्त्र सेवाओं में महिलाओं की उपस्थिति को बढ़ाया जा सकता है।
नारी शक्ति आने वाले समय में विकसित भारत की नियति का मार्गदर्शन करने जा रही है। इस लक्ष्य की ओर एनडीए से महिला कैडेटों का प्रशिक्षित होकर निकलना देश के विकास में महिलाओं को समान हितधारक बनाने का एक और प्रमाण है। सशस्त्र सेनाओं की महिला कैडर पारंपरिक सीमा को तोड़ रही हैं और पेशेवर सैनिक होने की नई ऊंचाइयों को छू रही हैं। आने वाले समय में सशस्त्र सेनाओं में नारी शक्ति राष्ट्रीय सुरक्षा प्रणाली में एक बड़ा बदलाव ला सकती है।

















