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बढ़ते कदम, ‘स्व’ का दम

मेक इन इंडिया ने महत्वपूर्ण प्रगति की है। आईडेक्स , सृजन पोर्टल और समर्थ जैसे मंचों और निजी क्षेत्र के कारण नवाचार और तकनीकी क्षमता बढ़ी है। इससे भारत की रक्षा और औद्योगिक क्षमता कई गुना बढ़ी है

Written byPanchjanyaPanchjanya
Jun 9, 2025, 10:43 am IST
in भारत, विश्लेषण, जम्‍मू एवं कश्‍मीर

‘मेक इन इंडिया’ की शुरुआत 25 सितंबर, 2014 को हुई थी। यह भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने वाली एक महत्वाकांक्षी योजना है। इसका उद्देश्य निवेश आकर्षित करना, नवोन्मेष को बढ़ावा देना, कौशल विकास को प्रोत्साहित करना और बौद्धिक संपदा की रक्षा करना है। इस पहल ने निजी क्षेत्र की भागीदारी, विशेष रूप से रक्षा और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में नवाचार और स्वदेशीकरण को गति दी है।

आज स्थिति यह है कि रक्षा उपकरणों के लिए विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर रहने वाला भारत अब स्वदेशी विनिर्माण में उभरती हुई शक्ति के रूप में स्थापित हो चुका है और घरेलू क्षमताओं के माध्यम से अपनी सैन्य ताकत को आकार दे रहा है। देश में निर्मित आधुनिक युद्धपोतों, लड़ाकू विमानों, तोपखाना प्रणालियों और अत्याधुनिक हथियारों के साथ भारत अब वैश्विक रक्षा विनिर्माण परिदृश्य में एक प्रमुख राष्ट्र के रूप में खड़ा है। इसमें आईडेक्स और समर्थ जैसी पहल एआई, साइबर युद्ध तथा स्वदेशी हथियार प्रणालियों में तकनीकी प्रगति को बढ़ावा दे रही हैं।

3 लाख करोड़ रु. का उत्पादन है लक्ष्य

भारत के रक्षा उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 2014-15 में भारत का रक्षा उत्पादन 46,429 करोड़ रुपये था, जो 174 प्रतिशत बढ़कर 2023-24 में 1.27 लाख करोड़ रुपये हो गया। इसमें 65 प्रतिशत उपकरण स्वदेशी हैं। यह एक महत्वपूर्ण बदलाव है, क्योंकि कुछ वर्ष पहले तक भारत 65-70 प्रतिशत रक्षा उपकरणों का आयात करता था। यह बदलाव रक्षा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता को दर्शाता है।

मेक इन इंडिया के तहत कई ऐसे विनिर्माण किए हैं, जिससे भारत को अपनी तकनीकी क्षमता पर गर्व हो रहा है। इसमें नौसेना में शामिल पहला स्‍वेदशी एयरक्राफ्ट कैरियर ‘आईएनएस विक्रांत’ भी है। 45,000 टन वजन वाले इस युद्धपोत को बनाने पर 20,000 करोड़ रुपये की लागत आई थी। स्‍वदेशी होने के बावजूद यह एयरक्राफ्ट कैरियर तकनीक के मामले में विदेशी युद्धपोतों के समकक्ष है। यानी अब भारत के पास विमानवाहक पोत बनाने की क्षमता भी है।

16 डीपीएसयू, 430 से अधिक लाइसेंस प्राप्त कंपनियां और लगभग 16,000 एमएसएमई भारत की स्वदेशी उत्पादन क्षमताओं को मजबूती प्रदान करते हैं। भारत के कुल रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र का योगदान 21 प्रतिशत है, जो नवाचार और दक्षता को बढ़ावा देता है। भारत ने 2029 तक रक्षा उत्पादन को 3 लाख करोड़ और रक्षा निर्यात 50,000 करोड़ रुपये करने का लक्ष्य रखा है। अमृत काल की कल्पना देश को रक्षा उत्पादन के मामले में वैश्विक स्तर पर शीर्ष पांच देशों के बीच देखने की है। आज भारत 100 से अधिक देशों में रक्षा उपकरणों का निर्यात कर रहा है। इसमें अमेरिका, रूस, जर्मनी, श्रीलंका, और मलेशिया जैसे देश शामिल हैं। यह वैश्विक रक्षा क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।

नवाचार का इंजन

रक्षा उत्कृष्टता के लिए नवाचार ‘आईडेक्स’ की स्थापना अप्रैल 2018 में रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए की गई थी। यह स्टार्टअप, एमएसएमई, अनुसंधान संस्थानों और व्यक्तिगत नवोन्मेषकों को जोड़कर एक पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करता है। इसके माध्यम से रक्षा व एयरोस्पेस में नवाचार एवं प्रौद्योगिकी विकास के लिए एक समृद्ध इकोसिस्टम बना है। आईडेक्स ने रक्षा नवाचार में भारत-अमेरिका सहयोग को बढ़ावा देने के लिए INDUS-X शिखर सम्मेलन जैसे मंचों का भी उपयोग किया है, जिसका तीसरा संस्करण सितंबर 2024 में कैलिफोर्निया में आयोजित किया गया था।

इसी प्रकार, नवीन प्रौद्योगिकियों के विकास को बढ़ावा देने के लए पिछले वर्ष अक्तूबर में ‘अदिति’ का तीसरा संस्करण लॉन्च किया गया, जो एआई, साइबर युद्ध और स्वदेशी हथियार प्रणालियों पर केंद्रित है।
रक्षा के क्षेत्र में स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने के लिए ‘सृजन’ पोर्टल एक महत्वपूर्ण मंच है। सृजन योजना के तहत फरवरी 2025 तक 38,000 से अधिक रक्षा उत्पाद उपलब्ध हैं। इनमें से 14,000 से अधिक का स्वदेशीकरण और सकारात्मक देशीकरण में सूचीबद्ध 5,500 से अधिक उत्पादों में से 3,000 से अधिक वस्तुओं का स्वदेशीकरण हुआ है।

एल एंड टी, टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और भारत फोर्ज जैसी निजी कंपनियां इसमें महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। सृजन पोर्टल ने निजी कंपनियों और डीआरडीओ जैसे रक्षा अनुसंधान संगठनों के बीच सहयोग को सुगम बनाया है, जिससे स्वदेशी प्रौद्योगिकी का विकास तेज हुआ है। वहीं, समर्थ योजना रक्षा विनिर्माण में प्रौद्योगिकी उन्नयन और स्वचालन को प्रोत्साहित करती है। यह एआई, साइबर युद्ध और स्वदेशी हथियार प्रणालियों के विकास में योगदान दे रही है। एयरो इंडिया 2025 कार्यक्रम ‘समर्थ’ में 33 प्रमुख स्वदेशी उत्पाद प्रदर्शित किये गए, जिनमें 24 का विकास रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (डीपीएसयू), रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) तथा भारतीय नौसेना द्वारा किया गया है। इसमें आईडीईएक्स की नौ सफल नवाचार परियोजनाएं भी शामिल थीं।

विकास और उत्पादन भागीदार कार्यक्रम के तहत निजी कंपनियां डीआरडीओ के मिलकर हवा में सीधी ऊपर दागी जाने वाली शॉर्ट-रेंज मिसाइल जैसी परियोजनाओं पर काम कर रही हैं। निजी कंपनियों को उन्नत तकनीकों के हस्तांतरण से स्वदेशी रक्षा उपकरणों का उत्पादन बढ़ा है। एल एंड टी ने स्वदेशी तोपखाने जैसे K9 वज्र-T स्व-चालित होवित्जर और नौसेना के लिए युद्धपोतों का निर्माण किया है। साइबर सुरक्षा और एआई आधारित रक्षा समाधानों में निवेश के अलावा कंपनी ने डीआरडीओ के साथ मिलकर उन्नत रक्षा प्रणालियों जैसे-मिसाइल लॉन्चर और रडार सिस्टम का विकास किया है।

टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स ने एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्र में स्टार्टअप्स के साथ सहयोग कर नवाचार को बढ़ावा दिया है। टाटा एयरबस के साथ मिलकर देश में सी-295 परिवहन विमान का निर्माण कर रही है। कंपनी ने हेलिकॉप्टर और ड्रोन प्रौद्योगिकी में प्रगति की है, जिससे भारत की मानव रहित युद्ध क्षमता बढ़ी है। इसी तरह, भारत फोर्ज ने डीआरडीओ के साथ मिल कर एक उन्नत तोपखाना एडवांस्ड टोड आर्टिलरी गन सिस्टम बनाया है। साथ ही, कंपनी ने छोटे हथियारों और बख्तरबंद वाहनों के लिए स्वदेशी प्रौद्योगिकी विकसित की है।

रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत के प्रयासों ने विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता को काफी हद तक कम कर दिया है। रणनीतिक नीतियों व स्वदेशी नवाचार के माध्यम से भारत अत्याधुनिक सैन्य प्लेटफॉर्म विकसित कर रहा है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक विकास दोनों मजबूत हो रहे हैं। रणनीतिक नीतिगत हस्तक्षेप, घरेलू भागीदारी में वृद्धि और स्वदेशी नवाचार के कारण देश की रक्षा क्षमताओं में काफी तेजी आई है। उत्पादन, निर्यात में तेज वृद्धि और मेक इन इंडिया जैसी पहलों की सफलता रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने की भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

स्वदेशी रक्षा उपकरण

हाल ही में सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीएस) ने एडवांस्ड टोड आर्टिलरी गन सिस्टम (एटीएजीएस) की खरीद को मंजूरी दी है। इसमें 7,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से देश में डिजाइन, विकसित एवं निर्मित हथियार 15 आर्टिलरी रेजिमेंटों को सुसज्जित करेंगे। एटीएजीएस एक अत्याधुनिक तोपखाना प्रणाली है, जिसे भारत फोर्ज, टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और डीआरडीओ ने विकसित किया है।

इसके अलावा, मेक इन इंडिया कार्यक्रम ने धनुष आर्टिलरी गन सिस्टम, मुख्य युद्धक टैंक अर्जुन, लाइट स्पेशिएलिटी व्हीकल्स, हाई मोबिलिटी व्हीकल्स, लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस, एडवांस्ड लाइट हेलिकॉप्टर, लाइट यूटिलिटी हेलिकॉप्टर, आकाश मिसाइल, वेपन लोकेटिंग रडार, 3डी टैक्टिकल कंट्रोल रडार और सॉफ्टवेयर डिफाइंड रेडियो सहित उन्नत सैन्य प्लेटफार्मों के विकास को सक्षम किया है। साथ ही विध्वंसक, स्वदेशी विमान वाहक, पनडुब्बियां, फ्रिगेट, कोरवेट, फास्ट पेट्रोल वेसल, फास्ट अटैक क्राफ्ट तथा ऑफशोर पेट्रोल वेसल जैसे नौसैनिक पोत विकसित किए हैं।

Topics: मुख्य युद्धक टैंक अर्जुनस्वदेशी हथियार‘मेक इन इंडिया’आईएनएस विक्रांतपाञ्चजन्य विशेषसाइबर युद्धआपरेशन सिंदूरनवाचार और स्वदेशीकरणरक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरतावैश्विक विनिर्माण केंद्रधनुष आर्टिलरी गन सिस्टम
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