अवैध मदरसें : मजहब की आड़ में मकड़जाल
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मजहब की आड़ में मकड़जाल

उत्तर प्रदेश में अवैध मदरसों, सरकारी भूमि पर कब्जा कर बनी मस्जिदों और मजार पर कड़ी कार्रवाई

Written byसुनील रायसुनील राय
Jun 4, 2025, 07:52 am IST
inउत्तर प्रदेश
यूं ध्वस्त हुआ अवैध मदरसा

यूं ध्वस्त हुआ अवैध मदरसा

बीते कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश के नेपाल सीमा से सटे जनपदों में बड़ी संख्या में अवैध ढंग से मस्जिदों, मदरसाें, मजारों और ईदगाहों का निर्माण हुआ। हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर उन सभी अवैध कब्जों और बिना मान्यता के संचालित मदरसों के खिलाफ कार्रवाई की गई। प्रदेश के महाराजगंज, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, बहराइच, लखीमपुर खीरी, श्रावस्ती और पीलीभीत जिलों में प्रशासन की ओर से यह कार्रवाई की गई। कुछ मदरसों को सील कर दिया गया एवं सरकारी भूमि पर किए गए अवैध निर्माण को बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया गया। इस कार्रवाई में कुल 225 मदरसों, 30 मस्जिदों, 25 मजारों एवं 6 ईदगाहों के विरुद्ध कार्रवाई की गई।

उत्तर प्रदेश सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि नेपाल सीमा के 15 किलोमीटर दायरे में किसी भी प्रकार के अवैध कब्जे, मजहबी या शैक्षणिक संस्थान के अवैध संचालन को बंद कर दिया जाएगा। जिला प्रशासन को इस संबंध में कड़े निर्देश दिए गए हैं कि मजहब की आड़ में किए गए अतिक्रमण को चिह्नित किया जाए और उसके खिलाफ शीघ्र कार्रवाई की जाए। महाराजगंज जनपद में कोल्हुई क्षेत्र के ग्राम पंचायत धरैची टोला में जांच करने पर यह पाया गया कि गड्ढे की जमीन पर कब्जा कर लिया गया था। उस भूमि पर अवैध ढंग से मदरसे का निर्माण कर दिया गया था। राजस्व विभाग की टीम ने भारी पुलिस बल के साथ बुलडोजर चलवाकर मदरसे को ध्वस्त कर दिया। तहसील फरेंदा ग्राम में अवैध मदरसे को हटाया गया। तहसील निचलौल में बिना मान्यता के संचालित चार मदरसों को नोटिस देकर सील कर दिया गया। वहीं महाराजगंज जिला प्रशासन ने 29 अवैध मदरसों पर कार्रवाई की। इसके साथ ही 9 मस्जिदों, 7 मजारों एवं एक ईदगाह का अतिक्रमण हटवाया गया।

सिद्धार्थनगर के शोहरतगढ़ के ग्राम बगुलहवा में अवैध मदरसे को हटाने के लिए नोटिस दिया गया। इसके बाद अतिक्रमण करने वाले गुलाम महीउद्दीन ने खुद अतिक्रमण को हटा लिया। सिद्धार्थनगर जनपद में ही सरकारी भूमि पर स्थित कुल 171 अवैध अतिक्रमणों को हटाया गया। वहां पर जांच के दौरान यह पाया गया कि 35 मदरसे, 9 मस्जिदें, 2 मजारें और एक ईदगाह को सरकारी जमीन पर अवैध ढंग से निर्मित किया गया है। इसमें 8 मदरसे, 2 मस्जिदें और एक मजार का अतिक्रमण हटाया गया।

बलरामपुर जनपद में अवैध मदरसों पर सख्त कार्रवाई की गई। बिना मान्यता के चल रहे सात मदरसों को चिह्नित किया गया। इन सभी को अवैध ढंग से निर्मित किया गया था। जिला प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर इन सात मदरसों को ध्वस्त कर दिया। बलरामपुर में बिना मान्यता के 24 मदरसे संचालित किए जा रहे थे। इन सभी को बंद करा दिया गया। श्रावस्ती जनपद में तहसील जमुनहा के ग्राम रामपुर बस्ती में शासकीय भूमि पर स्थित अवैध मदरसे को ध्वस्त कर दिया गया। भिनगा तहसील के ग्राम केशवापुर, जोगिनभरिया में स्थित मदरसे को भी बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया गया। इसके साथ ही निजी भूमि पर बिना मान्यता के संचालित दो मदरसों को चिह्नित कर सील किया गया। वहीं भिनगा तहसील के ग्राम भरथा रोशनगढ़ में एक अवैध मजहबी स्थल समेत पांच मजारों को हटाया गया। 164 मदरसों पर उन्हें बेदखली की कार्रवाई की गई है। जांच में पाया गया कि जनपद में 68 मदरसे बिना मान्यता के चल रहे थे। इन सभी मदरसों को सील कर दिया गया।

बहराइच जनपद में पाया गया कि मदरसा जामिया गुलशने रजा हबीबुल उलूम को 40 वर्ष पहले खेल के मैदान पर कब्जा करके बनाया गया था। जांच में मदरसा संचालक यह भी नहीं बता पाया कि मदरसा संचालन के लिए फंड कहां से मिलता है। इस मदरसे के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए सील कर दिया गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार बहराइच जनपद में 491 मदरसे बिना मान्यता के संचालित हो रहे हैं। इनमें से करीब 107 मदरसे ऐसे हैं, जो बिना मान्यता के भारत–नेपाल सीमा क्षेत्र–नानपारा–में संचालित हो रहे हैं। भारत–नेपाल सीमा क्षेत्र में अवैध ढंग से संचालित होने वाले अधिकतर मदरसे आवासीय हैं। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी संजय मिश्र का कहना है कि ”भारत-नेपाल बॉर्डर पर चिह्नित किए गए अवैध मदरसों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है।” बहराइच जनपद में एक अवैध मस्जिद को ध्वस्त कर दिया गया। अभी तक कुल 171 अवैध अतिक्रमणों को हटाया गया है।

लखीमपुर खीरी में भी अवैध निर्माण पर सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। लखीमपुर खीरी की जिलाधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल ने बताया कि ”सार्वजनिक भूमि पर तीन अवैध अतिक्रमण चिह्नित किए गए। अवैध ढंग से निर्मित मजार, एक मस्जिद व दो ईदगाह से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई। इसके साथ ही एक ईदगाह को सील भी कर दिया गया। आठ मदरसों के विरुद्ध कार्रवाई की गई।” पीलीभीत में सार्वजनिक भूमि पर बनी एक अवैध मस्जिद को चिह्नित किया गया। इसके पश्चात इस मामले में नोटिस जारी किया गया है। अवैध ढंग से मस्जिद निर्माण करने वाले छह व्यक्तियों से 15 दिन में जवाब मांगा गया है।

सिर्फ दीनी तालीम से नहीं चलेगा काम

देश में पिछले कुछ वर्षों में ‘मदरसा शिक्षा’ को लेकर चले विमर्श ने जोर पकड़ा है। किसी को मजहबी शिक्षा से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन केवल दीनी तालीम लेने भर से उनका भविष्य सुरक्षित नहीं हो जाएगा।

दरअसल, ‘जमीयत उलेमा-ए-हिंद’ ने हाल ही में कहा है कि वह गैर मान्यता प्राप्त मदरसों को जबरन बंद कराए जाने के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाएगी। वह इस कदम को संविधान और मुस्लिम विरोधी बता रही है। उत्तर प्रदेश कार्यकारिणी समिति की बैठक में जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रदेश अध्यक्ष मौलाना अशहद रशीदी ने कहा है कि इस कार्रवाई को इलाहाबाद उच्च न्यायालय में चुनौती दी जाएगी।

जमीयत उन मदरसों की वकालत कर रही है जो किसी नियम से नहीं चलते। बता दें कि उत्तर प्रदेश में नेपाल से सटे बहराइच, श्रावस्ती, महराजगंज, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, लखीमपुर खीरी और पीलीभीत जिलों में प्रशासन द्वारा अवैध कब्जे और बिना मान्यता के संचालित किए जाने का आरोप लगाते हुए 200 से ज्यादा मदरसों को बंद कराया जा चुका है।

वर्तमान में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य एवं पूर्व में राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) के अध्यक्ष रहे प्रियंक कानूनगो कहते हैं, “इस संगठन के मौलवी यह नहीं चाहते कि बच्चे आधुनिक शिक्षा से जुड़ें। ऐसे मदरसों में केवल दीनी तालीम देकर उन्हें आधुनिक शिक्षा से दूर किया जा रहा है।”

सर्वोच्च न्यायालय की अधिवक्ता सुबुही खान कहती हैं, “किसी भी बच्चे का भविष्य उसे दी गई शिक्षा से बनता है, लेकिन अवैध तरीके से चलाए जा रहे मदरसों में केवल दीनी तालीम दी जाती है। ऐसे में ‘जमीयत उलेमा-ए-हिंद’ का गैर मान्यता प्राप्त मदरसों को संचालित किए जाने का समर्थन करना बहुत गलत है।”

जमीयत-उलेमा ए हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सुहैब कासमी का कहना है, “जमीयत वह संस्था है जो पिछले 70 साल से मुसलमानों बरगलाने का काम कर रही है। इसके लोग मुसलमानों का इस्तेमाल अपने स्वार्थ के तौर पर करते चले आ रहे हैं। ये दुनिया भर के देशों में जाकर यही बताते हैं कि ‘भारत में मुसलमान बहुत परेशान हैं। उनसे मस्जिदें छीनी जा रही हैं। मदरसे बंद किए जा रहे हैं। हम उनको पढ़ा रहे हैं, इसलिए आप हमें पैसा दीजिए।’ यह पूरा खेल मोटा चंदा लेने के लिए किया जाता है। मप्र राज्य बाल संरक्षण आयोग की सदस्य डॉ. निवेदिता शर्मा कहती हैं, “गैर मान्यता प्राप्त या अवैध मदरसे बंद होने चाहिए। दीनी तालीम देना यदि जरूरी है तो साथ में ऐसी शिक्षा भी दी जानी चाहिए जिससे बाद में बच्चा योग्य बन सके।”  डाॅ. मयंक चतुर्वेदी

 

‘हर हाल में हटेगा अवैध कब्जा’

उत्तर प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री दानिश अंसारी का कहना है कि सरकार की मंशा है कि जो भी शिक्षा दी जाए, वह मानकों के अनुरूप दी जाए। हमारा पूरा प्रयास है कि मदरसों की शिक्षा व्यवस्था सीबीएसई या आईसीएसई बोर्ड की तरह मानक के अनुरूप कार्य करे। जो मदरसे मानक के अनुरूप नहीं हैं, उन पर कार्रवाई की जा रही है और यह कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। सीमावर्ती जनपदों में अवैध कब्जों को खाली कराया गया है। अवैध ढंग से निर्मित मदरसे और मजार आदि का अतिक्रमण हटाया गया है। यह कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। अवैध कब्जा और अतिक्रमण को हर हाल में खाली कराया जाएगा।

Topics: मदरसा शिक्षाभारत-नेपाल बॉर्डरJamiat Ulema-e-Hindजमीयत उलेमा ए हिंदअवैध मदरसाnational human rights commissionराष्ट्रीय मानवाधिकार आयोगIllegal MadrasaIndia Nepal borderपाञ्चजन्य विशेष
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पाञ्चजन्य ब्यूरो चीफ, लखनऊ, उत्तर प्रदेश [Read more]
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