पुलिस पर पिस्तौल तानने वाला शाहरुख पठान जेल से बाहर: दिल्ली दंगे 2020 में फैलाया था उन्माद, पिता का सहारा लेकर आया बाहर
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पुलिस पर पिस्तौल तानने वाला शाहरुख पठान जेल से बाहर: दिल्ली दंगे 2020 में फैलाया था उन्माद, पिता का सहारा लेकर आया बाहर

दिल्ली दंगों में पुलिसकर्मी पर पिस्तौल तानने वाले शाहरुख पठान को 15 दिन की अंतरिम जमानत मिल गई। दिल्ली दंगे 2020 के दौरान शाहरुख पठान सड़क पर खुलेआम हथियार लहराते और पुलिस पर निशाना साधते नजर आया था।

Written byShivam DixitShivam Dixit
Mar 8, 2025, 10:27 pm IST
in भारत, दिल्ली
Delhi riots 2020 accused Shahrukh pathan got a bail

शाहरुख पठान ने पुलिस कॉन्स्टेबल पर तान दी थी रिवॉल्वर। (फाइल फोटो)

नई दिल्ली । साल 2020 के दिल्ली दंगों में एक पुलिसकर्मी पर पिस्तौल तानने और हिंसा भड़काने के आरोपी शाहरुख पठान को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार को पठान को 15 दिन की अंतरिम जमानत दी, जिसे लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। अदालत ने यह राहत उसके बीमार पिता की देखभाल के लिए दी, लेकिन इस फैसले ने उसकी हिंसक छवि और गंभीर आरोपों को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। क्या एक ऐसा शख्स, जिस पर दंगों में शामिल होने और पुलिस पर हमले जैसे संगीन इल्जाम हैं, इतनी आसानी से जमानत का हकदार है?

हिंसा की तस्वीरों से सुर्खियों में आया शाहरुख

शाहरुख पठान का नाम तब चर्चा में आया, जब 24 फरवरी, 2020 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली के मौजपुर चौक पर भड़के दंगों के दौरान उसने पुलिस कांस्टेबल दीपक दहिया पर पिस्तौल तानी। इस घटना की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे, जिसमें वह सड़क पर खुलेआम हथियार लहराते और पुलिस पर निशाना साधते नजर आया था। उस पर एक दंगाई भीड़ का हिस्सा होने का भी आरोप है, जिसने एक व्यक्ति को गोली मारकर घायल कर दिया। इन दंगों में 53 लोगों की जान गई थी और सैकड़ों घायल हुए थे। पठान पर दो अलग-अलग मामलों में मुकदमा चल रहा है, जो उसकी आपराधिक गतिविधियों की गंभीरता को दर्शाता है।

कोर्ट का फैसला : राहत या विवाद?

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बाजपेयी की अदालत ने पठान को 20,000 रुपये के निजी बांड और समान राशि की जमानत पर 15 दिन की अंतरिम जमानत दी। पठान ने अपनी याचिका में दावा किया कि उसके पिता गंभीर रूप से बीमार हैं और उनकी देखभाल के लिए उसकी मौजूदगी जरूरी है। कोर्ट ने उसके पिता के मेडिकल दस्तावेजों और जांच अधिकारी द्वारा पेश की गई तस्वीरों को देखा, जिसमें उनकी खराब हालत दिखाई गई थी।

अदालत ने कहा- “आवेदक के पिता के खराब स्वास्थ्य को देखते हुए उसे यह राहत दी जा रही है।” लेकिन क्या यह कारण एक ऐसे शख्स को जमानत देने के लिए काफी है, जिसने दंगों के दौरान उन्माद फैलाया हो, जिसने कानून के रखवालों पर ही हमला किया था.? जिसकी तस्वीर पूरी दुनिया ने देखी थी।

सख्त शर्तें, लेकिन मगर सवाल बरकरार

अदालत ने पठान की अंतरिम जमानत के साथ कुछ शर्तें भी रखीं। उसे अपना मोबाइल नंबर पुलिस को देना होगा, फोन हमेशा चालू रखना होगा, किसी गवाह या सह-आरोपी से संपर्क नहीं करना होगा और हर दूसरे दिन पुलिस स्टेशन में हाजिरी देनी होगी। इसके बावजूद, कई लोगों का मानना है कि ये शर्तें उसकी हिंसक पृष्ठभूमि को देखते हुए नाकाफी हैं। हालांकि 15 दिन की अवधि खत्म होने पर उसे जेल अधीक्षक के समक्ष आत्मसमर्पण करना होगा।

दंगों का काला अध्याय और शाहरुख की भूमिका

फरवरी 2020 में हुए दिल्ली दंगे नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध और समर्थन में हुए प्रदर्शनों के बाद भड़के थे। इन दंगों ने दिल्ली को हिंसा की आग में झोंक दिया था, और शाहरुख पठान उन चेहरों में से एक था, जिन्होंने इस आग को और भड़काने का काम किया। पुलिसकर्मी पर पिस्तौल तानने की उसकी तस्वीर न सिर्फ हिंसा का प्रतीक बनी, बल्कि यह भी सवाल उठाया कि कानून के प्रति ऐसी बेखौफ हरकत करने वाले को कितनी आसानी से राहत मिल सकती है।

जनता की नाराजगी और कानूनी बहस

शाहरुख पठान को अंतरिम जमानत मिलने का फैसला सोशल मीडिया और आम लोगों के बीच बहस का विषय बन गया है। कई लोग इसे कोर्ट का “नरम रवैया” मान रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि मानवीय आधार पर यह फैसला सही है। लेकिन सवाल यह है कि क्या एक ऐसा शख्स, जिसने न सिर्फ कानून को चुनौती दी, बल्कि समाज में हिंसा को बढ़ावा दिया, उसे इस तरह की छूट दी जानी चाहिए..?

बरहाल शाहरुख पठान की अंतरिम जमानत भले ही 15 दिनों के लिए हो, लेकिन उसके खिलाफ चल रहे मुकदमों का अंतिम फैसला अभी बाकी है। उसकी हरकतों ने समाज में एक गहरी छाप छोड़ी है। अब क्या वह अपनी अंतरिम जमानत की शर्तों का पालन करेगा या फिर यह अवधि नए विवादों को जन्म देगी, यह देखना बाकी है। लेकिन एक बात साफ है—शाहरुख पठान का नाम दिल्ली दंगों के काले अध्याय से कभी अलग नहीं हो सकता।

Topics: शाहरुख पठान जमानतShahrukh Pathan case updateदिल्ली कोर्ट फैसलाCAA protest violenceदंगाई को मिली जमानतControversial court decisionशाहरुख पठान केस अपडेटCAA विरोध प्रदर्शन हिंसादिल्ली दंगा आरोपीकोर्ट का विवादित फैसलाDelhi riots accusedShahrukh Pathan bailपुलिसकर्मी पर हमलाDelhi court verdictDelhi riots-2020Attack on police officerदिल्ली दंगे 2020Riot accused gets bail
Shivam Dixit
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अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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