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अपनी संभावनाओं से दुनिया को आकर्षित कर रहा है भारत : उपराष्ट्रपति

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि भारत अब वादे करने वाला देश नहीं रहा। भारत की उभरती अर्थव्यवस्था और संस्कृति पर पढ़ें उनका पूरा बयान...

Written byPanchjanyaPanchjanya
Mar 2, 2025, 04:37 pm IST
inभारत, दिल्ली

नई दिल्ली (हि.स.) । उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि भारत अब वादे करने वाला देश नहीं रह गया है। भारत को अब सपेरों का देश नहीं माना जाता। भारत पूरी दुनिया को अपनी संभावनाओं से आकर्षित कर रहा है।

उपराष्ट्रपति धनखड़ रविवार काे केरल राज्य के तिरुवनंतपुरम में ‘लोकतंत्र, जनसांख्यिकी, विकास और भारत का भविष्य’ विषय पर चौथे पी. परमेश्वरन स्मृति व्याख्यान कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उपराष्ट्रपति ने कहा कि पी. परमेश्वरन की भारतीय मूल्यों के प्रति अटूट प्रतिबद्धता, भारतीय लोकाचार की उनकी गहरी समझ और राष्ट्रीय एकता के लिए उनका अथक प्रयास पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। सांस्कृतिक रूप से निहित और आध्यात्मिक रूप से जागृत एक आत्मनिर्भर भारत के लिए उनका दृष्टिकोण पूरे देश में गहराई से गूंजता है।

हाल के दशक में भारत के विकास काे लेकर धनखड़ ने कहा कि जन-केंद्रित नीतियों और पारदर्शी जवाबदेह शासन ने पारिस्थितिकी तंत्र को उछाल दिया है। 1.4 बिलियन का राष्ट्र ग्रामीण क्षेत्र में आए परिवर्तनकारी बदलाव को देखें। हर घर में शौचालय है, बिजली कनेक्शन है, पानी का कनेक्शन आने वाला है, गैस कनेक्शन है, कनेक्टिविटी, इंटरनेट और सड़क, रेल और स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र में सहायता करने वाली नीतियां। ये हमारी विकास पथ को परिभाषित करती हैं।

उन्होंने कहा कि यह आर्थिक पुनर्जागरण, जो कुछ साल पहले कल्पना से परे था, चिंतन से परे था, सपनों से परे था, उसने हमारे सनातन का सार, समावेशिता, गैर-भेदभावपूर्ण, समान, समान विकास के परिणाम और सभी के लिए फल उत्पन्न किए हैं। किसी भी योग्यता, जाति, धर्म, जाति, रंग के बावजूद प्रयास किया गया है कि लाभ अंतिम पंक्ति में रहने वाले लोगों तक पहुंचना चाहिए और यह बड़ी सफलता के साथ किया जा रहा है।

धनखड़ ने कहा कि भारत के सबसे महान सपूतों में से एक (पी. परमेश्वरन) की स्मृति में यह स्मारक व्याख्यान है। वे इस सदी में हिंदू विचार प्रक्रिया के अग्रणी विचारकों में से एक हैं। हम इस व्याख्यान के माध्यम से सामाजिक कार्यों के लिए प्रतिबद्ध सबसे बेहतरीन बुद्धिजीवियों में से एक का जश्न मना रहे हैं। एक सभ्यता को केवल एक बुनियादी विचार से जाना जाता है। क्या यह वास्तव में अपने महान सपूतों का सम्मान करती है? और पिछले कुछ वर्षों में यही विषय रहा है। हमारे भूले हुए नायक, गुमनाम नायक, अच्छी तरह से नहीं तो अनदेखे नायक, हमने उन्हें याद किया है।

अकार्बनिक जनसांख्यिकीय परिवर्तनों पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए धनखड़ ने कहा कि जनसांख्यिकी मायने रखती है। जनसांख्यिकी को बहुसंख्यकवाद के साथ भ्रमित नहीं किया जाना चाहिए। हम इन दो खेमों में विभाजित समाज नहीं बना सकते लेकिन जब जनसांख्यिकी की बात आती है तो देश को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। राष्ट्र में राजनीतिक रूप से विभाजनकारी माहौल पर उपराष्ट्रपति ने कहा कि हम कुछ पहलुओं पर चिंताजनक परिदृश्यों से घिरे हुए हैं। राजनीति ध्रुवीकृत हो गई है, ऊर्ध्वाधर रूप से विभाजनकारी हो गई है, तापमान हमेशा उच्च रहता है। मूल राष्ट्रीय मूल्य और सभ्यतागत मूल्य केंद्रीय विषय नहीं हैं।

इस देश में जहां विविधता एकता में परिलक्षित होती है, यह देश जो समावेशिता के अपने सनातन मूल्यों पर गर्व करता है, हम इन मूल मूल्यों से दूर होने और ध्रुवीकृत, विभाजनकारी गतिविधियों में शामिल होने का जोखिम नहीं उठा सकते हैं। संवाद और विचार-विमर्श के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा, कि मुझे आपके साथ अपनी पीड़ा, अपना दर्द साझा करना चाहिए। संसद को लोगों के लिए आदर्श होना चाहिए। यह लोगों की आकांक्षाओं को वास्तविकता में बदलने का एक मंच है।

इस कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति की धर्मपत्नी डॉ. सुदेश धनखड़, केरल के राज्यपाल आरवी आर्लेकर, पूर्व केंद्रीय मंत्री वी. मुरलीधरन और अन्य गण्यमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।

Topics: P Parameswaran Memorial LectureIndian Economyसनातन संस्कृतिभारत का विकासउपराष्ट्रपति धनखड़Jagdeep Dhankhar speechIndia Growth Storyलोकतंत्र और जनसांख्यिकीBharat Viksit 2047
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