उत्तराखंड: हर घर हर नल तो पहुंच जाएगा, हर घर जल पहुंचना चुनौती, पानी की कमी से जूझ रहे पहाड़ के गांव
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उत्तराखंड: हर घर हर नल तो पहुंच जाएगा, हर घर जल पहुंचना चुनौती, पानी की कमी से जूझ रहे पहाड़ के गांव

उत्तराखंड में जल स्रोत सूख रहे हैं, नदी नालों झरनों में पानी न के बराबर है, खास बात ये भी है कि इन स्रोतों के आस पास जल संचय के लिए पर्याप्त साधन भी उपलब्ध नहीं है। बारिश कम होने बर्फबारी में गिरावट और जंगलों में लगने वाली आग से भी जल स्रोतों के आगे संकट है।

Written byदिनेश मानसेरादिनेश मानसेरा
Feb 2, 2025, 02:52 pm IST
inउत्तराखंड
Uttarakhand water crisis

प्रतीकात्मक तस्वीर

देहरादून: पीएम मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट जल जीवन मिशन के तहत उत्तराखंड के 1,420 गांवों के 40,000 से अधिक घरों तक नल पहुंच जाएगा। केंद्र सरकार ने इस मिशन को 2028 तक जारी रखने का फैसला लिया है।

बड़ा सवाल ये है कि हर घर नल तो पहुंच गया, लेकिन उसमें जल आया है कि नहीं? हकीकत ये है कि पहाड़ में जल स्रोत सूख रहे है, बर्फबारी और बारिश की कमी से पानी का संकट गहराया हुआ है।

2019 में पहाड़ के दूर दराज ग्रामीण क्षेत्रों में 1,30,325 घरों तक ही जल उपलब्ध हो रहा था, जल जीवन मिशन के तहत 7,780 ग्राम पंचायतों के 15 हजार गांवों के 14,50,635 घरों तक नल से जल पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया, इनमें से 13,565 घरों तक पानी का कनेक्शन पहुंच गया है। 1,357 गांवों में पाइप लाइन बिछाने का काम चल रहा है। 63 में काम शुरू होना है। इन 1,420 ग्रामों के 40,110 घरों में नल पहुंचाना सरकार का लक्ष्य है। मिशन अवधि मार्च में खत्म होने से  केंद्र और राज्य सरकारों के आगे एक समस्या खड़ी हो रही थी, परन्तु बजट में जल जीवन मिशन को 2028 तक बढ़ाने की मंजूरी मिल जाने से पहाड़ के ग्रामीणों को एक राहत जरूर मिली है।

अब हर घर नल तो पहुंच गया परन्तु उसमें जल कहां से लाया जाएगा इस सवाल का जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है।
उत्तराखंड में जल स्रोत सूख रहे हैं, नदी नालों झरनों में पानी न के बराबर है, खास बात ये भी है कि इन स्रोतों के आस पास जल संचय के लिए पर्याप्त साधन भी उपलब्ध नहीं है। बारिश कम होने बर्फबारी में गिरावट और जंगलों में लगने वाली आग से भी जल स्रोतों के आगे संकट है। मुनस्यारी बेरीनाग गंगोलीहाट आदि कई ग्रामों ने बारिश के जल संचय के लिए खुद ब खुद व्यवस्था की हुई है।

इसे भी पढ़ें: उत्तराखंड: एक मई से शुरू होगी चार धाम यात्रा, 4 मई को खुलेंगे श्री बद्रीनाथ धाम के कपाट

बहुत से ग्राम ऐसे हैं जो कि पानी के बंटवारे को लेकर आपसी झगड़े में है। कहीं ऊपरी ग्रामों में नीचे से पानी स्रोतों से जल खींचने की समस्या है तो कहीं सरकारी मशीनरी की अंदरूनी समस्या भी है। ऐसी कई वजहों से उत्तर भारत को पानी की आपूर्ति करने वाला उत्तराखंड राज्य खुद पीने के पानी की समस्या से ग्रस्त है। खबर है केंद्र में उत्तराखंड में पीने के पानी के संकट को लेकर मिली रिपोर्ट पर मंथन शुरू हुआ है। उत्तराखंड जल संस्थान की एक रिपोर्ट कहती है कि राज्य में 148 शहरी और 317 ग्रामीण क्षेत्रों के जल स्रोतों संकट में है, इनमें से 288 जलस्रोतों में 50 प्रतिशत और 47 में 75 प्रतिशत पानी सूख गया है। गाद गदेरे संकट में हैं।

जलवायु परिवर्तन का असर

पर्यावरणविद डॉ अनिल जोशी भी कहते है कि पहाड़ों में जल संकट है, जलवायु परिवर्तन से बर्फ और बारिश कम हो रही है जल स्रोत सूख रहे हैं, प्रदूषण बढ़ने की वजह से ऐसा हो रहा है। जल जीवन मिशन को लेकर पीएम मोदी ने पिछले एक माह में आधा दर्जन समीक्षा बैठके भी की है और प्रत्येक नागरिक को पीने के पानी की उपलब्धता पर जोर दिया है। उत्तराखंड में जल जीवन मिशन, जलागम, तालाब निर्माण जैसी योजनाएं विषम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण अपने लक्ष्य को पूरा करने में सफल नहीं हो पा रही है। लेकिन, जल स्रोतों के रखरखाव की कमी को यदि सरकार दूर करने का लक्ष्य निर्धारित कर ले तो पहाड़ में जल संकट को बहुत हद तक दूर किया जा सकता है।

Topics: Jal Jeevan Missionजल संकटउत्तराखंड जल संकटwater crisisUttarakhand water crisisजलवायु परिवर्तनClimate changeउत्तराखंडUttarakhandजल जीवन मिशन
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