2025: भारत में रक्षा सुधारों का वर्ष
July 18, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम रक्षा

2025: भारत में रक्षा सुधारों का वर्ष

वर्ष 2025 में केंद्रित हस्तक्षेप के नौ बिंदुओं की सार्वजनिक घोषणा रक्षा क्षेत्र में चल रहे और प्रस्तावित सुधारों में विश्वास का दावा है।

Written byलेफ्टिनेंट जनरल एम के दास,पीवीएसएम, बार टू एसएम, वीएसएम ( सेवानिवृत)लेफ्टिनेंट जनरल एम के दास,पीवीएसएम, बार टू एसएम, वीएसएम ( सेवानिवृत)
Jan 7, 2025, 01:59 pm IST
in रक्षा, विश्लेषण

वर्ष 2025 के नए साल के दिन रक्षा मंत्री (आरएम) ने रक्षा मंत्रालय (एमओडी) के शीर्ष अधिकारियों के साथ एक बैठक की अध्यक्षता की और चल रहे और भविष्य के सुधारों को गति देने के लिए, सर्वसम्मति से वर्ष 2025 को भारत में ‘रक्षा सुधारों का वर्ष’ घोषित करने का निर्णय लिया गया। श्री राजनाथ सिंह वर्ष 2019 से रक्षा मंत्रालय के शीर्ष पर हैं और उन्होंने रक्षा क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण सुधारों की देखरेख की है। भू-राजनीतिक परिदृश्य में तेज़ी से बदलाव और भारत के ग्लोबल साउथ के नेता के रूप में उभरने के साथ, राष्ट्रीय सुरक्षा के लिये रक्षा सुधारों पर ध्यान केंद्रित करना महत्त्वपूर्ण है। कुछ सुधार पिछले चार से पांच वर्षों से हो रहे हैं और वर्ष 2025 में उनमें से कुछ औपचारिक आकार और पहचान ले सकते हैं।

अहम सवाल यह है कि भारत में रक्षा क्षेत्र में सुधार क्यों महत्वपूर्ण हैं। हालांकि भारत रक्षा व्यय पर सकल घरेलू उत्पाद का 2% से थोड़ा कम खर्च करता है, लेकिन वित्तीय बजट में वार्षिक रक्षा परिव्यय लगभग 13% है। रक्षा के लिये 6.22 लाख करोड़ रुपए का कुल आवंटन वित्तीय वर्ष 2024-25 के कुल बजट परिव्यय का लगभग 12.9% है। यह परिव्यय अन्य प्रमुख मंत्रालयों की तुलना में बहुत अधिक है। उदाहरण के लिए, रेलवे को 2.55 लाख करोड़ रुपये मिले, गृह मंत्रालय को 2.20 लाख करोड़ मिले, कृषि को 1.52 लाख करोड़ रुपये मिले, परिवहन और राजमार्ग को 2.78 लाख करोड़ मिले, उपभोक्ता मामलों और सार्वजनिक वितरण को 2.23 लाख करोड़ रुपये मिले। यानि की कोई अन्य मंत्रालय इतना अधिक बजट हर साल नहीं पाता है। परन्तु रक्षा बजट में से एक बड़ा हिस्सा वेतन और पेंशन मद में खर्च होता है। इसलिए, रक्षा प्लेटफार्मों के आधुनिकीकरण और खरीद के लिए उपलब्ध धन का सबसे विवेकपूर्ण उपयोग सदा एक चुनौती होती है। रक्षा क्षेत्र में सुधार करके इसे काफी हद तक उपलब्ध बजट को अधिक उपयोगी बनाया जा सकता है।

सरकारी तंत्र के सभी क्षेत्रों में अगर सुधारों की बात करें तो रक्षा क्षेत्र में सुधार सबसे जटिल और समय लेने वाले होते हैं, खासकर भारत जैसे लोकतांत्रिक ढांचे में। दुनिया भर की सेनाएं रूढ़िवादी और परंपरा से बंधी हुई हैं और परिवर्तन से बचती हैं। अमेरिका में भी 1986 के गोल्डवाटर-निकोल्स रक्षा पुनर्गठन अधिनियम को सरकार द्वारा आगे बढ़ाना पड़ा। भारत में रक्षा क्षेत्र में सुधार प्रक्रिया मोदी 1.0 सरकार से शुरू की गई है और उनमें से कुछ ने पहले ही मूक लेकिन महत्वपूर्ण योगदान दिया है। कुछ सुधार सार्वजनिक डोमेन में नहीं हैं, विशुद्ध रूप से गोपनीयता के कारण। लेकिन रक्षा मंत्रालय अब अधिक सक्रिय रहा है और नागरिकों को राष्ट्र के सुरक्षा तंत्र में हितधारक बनाने के तेजी से काम कर रहा है। वर्ष 2025 में केंद्रित हस्तक्षेप के नौ बिंदुओं की सार्वजनिक घोषणा रक्षा क्षेत्र में चल रहे और प्रस्तावित सुधारों में विश्वास का दावा है।

9 बिन्दुओं पर होंगे प्रस्तावित सुधार

नौ प्रस्तावित सुधार इस प्रकार हैं: थिएटर कमांड की स्थापना के लिए संयुक्तता और एकीकरण को बढ़ावा, साइबर, अंतरिक्ष, रोबोटिक्स और एआई के नए डोमेन पर ध्यान केंद्रित करना, अंतर-सेवा सहयोग और प्रशिक्षण, क्षमता विकास के लिए तेजी से अधिग्रहण प्रक्रिया, रक्षा उत्पादन में सार्वजनिक-निजी भागीदारी, सहयोग और प्रभावी नागरिक-सैन्य समन्वय, रक्षा निर्यात में बढ़ोतरी, भूतपूर्व सैनिकों का कल्याण और उनकी विशेषज्ञता का लाभ उठाना और अंत में भारतीय संस्कृति और मूल्यों में गर्व की भावना से राष्ट्र की सुरक्षा।

उपरोक्त फोकस क्षेत्रों पर एक नज़र डालने से संकेत मिलता है कि इन सभी सुधारों को मोदी 2.0 सरकार के तहत 1 जनवरी 2020 से चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) की नियुक्ति के बाद से आधिकारिक प्रोत्साहन दिया गया है।  श्री राजनाथ सिंह के वर्ष 2019 में रक्षा मंत्री के रूप में नियुक्त होने के बाद उनके नेतृत्व में कई क्षेत्रों में सुधार किया गया। दिसंबर 2021 में सीडीएस के रूप में जनरल बिपिन रावत के आकस्मिक निधन के साथ, रक्षा समन्वय को झटका लगा, लेकिन अब नए सीडीएस, जनरल अनिल चौहान के तहत उसे पुनर्जीवित किया गया है। नए रक्षा सचिव, श्री राजेश कुमार सिंह, आईएएस ने पिछले साल 1 नवंबर को नियुक्ति ग्रहण की है और इस प्रकार उनके द्वारा सशस्त्र बलों के सुधारों और महत्वपूर्ण क्षमता विकास  में निरंतरता प्रदान करने का पूर्ण सामर्थ्य है।

प्रस्तावित सुधारों में से, एकीकृत थिएटर कमांड यानि (आईटीसी) का निर्माण सबसे जटिल और चुनौतीपूर्ण होने जा रहा है। आईटीसी सेना, नौसेना और वायुसेना के संसाधनों को एक कमांडर के तहत जोड़ती है ताकि युद्धक मशीनरी और लॉजिस्टिक्स के अधिकतम उपयोग के साथ सशक्त एकजुट बल बनाया जा सके। लेकिन पिछले पांच वर्षों में, आईटीसी की योजना और तैयारी के बारे में बहुत सारी तैयारी की जा चुकी है और इस तरह के संगठन को जल्द ही अंतिम आकार लेने की संभावना है। कमान और नियंत्रण से संबंधित मुद्दे जटिल हैं और मानव संसाधन (एचआर) से जुड़े मुद्दे और नेतृत्व के उच्च स्तर पर आकांक्षी मुद्दे भी हैं। लेकिन मेरा विश्वास है की इन बाधाओं को जल्द ही दूर कर दिया जाएगा । आईटीसी के चरणबद्ध तरीके से सृजन के बाद भी, नए संगठन को प्रत्याशित दक्षता सुनिश्चित करने के लिए सावधानीपूर्वक निगरानी की आवश्यकता होगी।

जून 2022 में शुरू की गई अग्निपथ योजना के माध्यम से सैनिकों, नाविकों और एयरमैन का नया प्रवेश का तरीका एक और बड़ा परिवर्तन और सुधार था। प्रवेश पद्धति और प्रशिक्षण व्यवस्था अब स्थिर हो गई है। प्रारंभिक प्रतिक्रिया उत्साहजनक है और सरकार ने 75% अग्निवीरों के सुनिश्चित पार्श्व अवशोषण की घोषणा की है जो चार साल की सेवा के बाद बाहर चले जाएंगे । यह नई प्रणाली युद्ध के मामले में राष्ट्र के लिए भूतपूर्व रक्षा सैनिकों का एक बड़ा आधार भी देश को प्रदान करती है। चूंकि अग्निवीरों का पहला बैच वर्ष 2026 में पार्श्व अवशोषण के लिए आएगा, इसलिए यदि यह आईटीसी के निर्माण के साथ मेल खाता है तो एक नाजुक संतुलन अधिनियम की आवश्यकता उस वक्त हो सकती है।

श्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में रक्षा मंत्रालय की प्रमुख सफलता रक्षा निर्यात में भारी उछाल रही है। स्वदेशीकरण और निजी उद्योग की भागीदारी को बढ़ावा देने के साथ, हमारा रक्षा निर्यात एक दशक पहले 2000 करोड़ रुपये के मामूली आंकड़े से इस वर्ष रिकॉर्ड 21,000 करोड़ रुपये को पार कर गया है। एक और प्रमुख सुधार रक्षा पीएसयू का निगमीकरण था। अक्टूबर 2021 में, रक्षा मंत्रालय ने आयुध निर्माणी बोर्ड (OFB) को सात 100% सरकारी स्वामित्व वाली कॉर्पोरेट संस्थाओं में परिवर्तित कर दिया। इससे पहले, ओएफबी काफी हद तक एक बीमार उद्यम था, जिसका विश्व स्तरीय हथियारों, गोला-बारूद और उपकरणों के निर्माण में बहुत कम योगदान था। तीन साल से भी कम समय में सार्वजनिक क्षेत्र की रक्षा इकाइयां (डीपीएसयू) पहले से ही लाभ में हैं। आने वाले समय में, भारत को ग्लोबल साउथ का एक प्रमुख रक्षा विनिर्माण केंद्र बनना होगा और रक्षा सुधार उस दृष्टि से और भी महत्वपूर्ण हैं।

जून 2020 में पूर्वी लद्दाख में गलवान में चीन के साथ झड़पों के बाद, भारतीय सशस्त्र बलों ने संयुक्त रूप से दीर्घकालिक दृष्टिकोण पर जोर दिया है। मध्य पूर्व में जारी इजरायल-हमास/हिजबुल्लाह संघर्ष और रूस-यूक्रेन युद्ध ने भी सामरिक अवधारणा को बदल दिया है। छोटे, तेज और तीव्र युद्धों की बजाय पूरा विश्व लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष और युद्धों को घूर रहा है। सैन्य विश्लेषक युद्ध के नए सिद्धांत समझने के लिए संघर्ष कर रहे हैं और दुनिया को आक्रामक चीन का सामना करना पड़ रहा है। चीन ने जानबूझकर भारत के साथ सीमा विवाद नहीं सुलझाया है और वह सीमा संकट का रणनीतिक लाभ उठाना चाहता है। इस प्रकार रक्षा क्षेत्र में सुधार राष्ट्रीय सुरक्षा और अनिश्चित भू-राजनीतिक परिदृश्य के लिए और भी महत्वपूर्ण हो गए हैं।

भारत में, राजनीतिक नेतृत्व और शासक वर्ग में रणनीतिक संस्कृति की कम जानकारी चिंता का एक और मुद्दा है। यहां तक कि नौकरशाहों में बहुत कम रक्षा विशेषज्ञ हैं जो सैन्य मामलों के जानकार हैं। 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की आकांक्षा रखने वाले राष्ट्र में इसे तेजी से बदलना होगा और नए विशेषज्ञ तैयार करने होंगे। युद्धों और संघर्षों के लिए ‘संपूर्ण राष्ट्र दृष्टिकोण’ की आवश्यकता होती है और प्रत्येक सक्षम नागरिक को एक उत्साही सैनिक जैसी सच्ची भावना के साथ राष्ट्र निर्माण में योगदान देना होगा । आंतरिक सुरक्षा की गतिशीलता बाहरी सुरक्षा के साथ भी जुड़ी हुई है और मोदी 1.0 सरकार के तहत 2014-2019 से गृह मंत्री के रूप में श्री राजनाथ सिंह भारत के सामने आने वाली सुरक्षा चुनौतियों से पूरी तरह अवगत हैं।

प्रस्तावित रक्षा सुधार राष्ट्र के सर्वोत्तम हित में निरंतरता और परिवर्तन की भावना को दर्शाते हैं। सभी सैन्य नेत्रत्व  और राजनीतिक वर्ग को भी अपने सीमित क्षेत्र को बचाने की भावना और राजनीतिक मतभेद  से ऊपर उठकर राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में गहरी दिलचस्पी दिखानी होगी। वर्ष 2025 में औपचारिक रूप दिए गए रक्षा सुधार भारतीय सशस्त्र बलों को बहु-डोमेन एकीकृत संचालन, तकनीकी रूप से उन्नत लड़ाकू बल में बदलने जा रहे हैं, जो भूमि, वायु और समुद्री सीमाओं के साथ-साथ भारत के वैश्विक हितों को सुरक्षित करने में सक्षम हों।

Topics: रक्षाDefenceभारतीय रक्षाIndian Defenceरक्षा क्षेत्र में भारत की झलकGlimpse of India in Defence Sector
ShareTweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

आज का श्लोक : न देवा यष्टिमादाय् रक्षन्ति पशुपालवत्।

आज का श्लोक : न देवा यष्टिमादाय् रक्षन्ति पशुपालवत्।

Rajesh Kumar takes charge as chairman

राजेश कुमार सिंह को DRDO का अतिरिक्त प्रभार, आत्मनिर्भर रक्षा को बढ़ावा

भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संयुक्त अरब अमीरात में दोस्ती और सहयोग की एक नई इबारत लिखी

India-UAE relations: अपने ‘दूसरे घर’ यूएई में Modi ने गहराया दोस्ती और सहयोग का नाता, समझौतों से सुलझी आगे की राह

India Italy defence cooperation

भारत और इटली रक्षा क्षेत्र में करेंगे संयुक्त हथियार उत्पादन, राजनाथ सिंह-क्रोसेटो की बैठक में बड़ा फैसला

भारत-रूस के बीच अहम रक्षा समझौता हुआ लागू, RELOS क्या है?

Load More

ताज़ा समाचार

श्री नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री

PM मोदी का AI वीडियो वायरल! 22,000 रुपये लगाकर 25 लाख कमाने का झांसा, PIB Fact Check ने बताया फर्जी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

पंजाब में आप सरकार के मर्म पर प्रहार कर चुनावी एजेंडा सेट कर गए PM मोदी

India UK trade deal

Explainer: UK के साथ व्यापार समझौते से भारत को क्या फ़ायदा होगा?

Journalist Alok Goswami passes away

वरिष्ठ पत्रकार आलोक गोस्वामी का निधन, पाञ्चजन्य के अतुलनीय सहयोगी अब हमारे बीच नहीं रहे

खटीमा: ईसाई बने थारू जनजाति के 36 लोगों ने सनातन धर्म में की घर वापसी, जनेऊ और कलेवा धारण किया

अमेजन से मंगवाई हिंदी की पुस्तक, मिली अंग्रेजी की; शिकायत के बाद भी नहीं हुई कोई कार्रवाई

Rahul Gandhi Dehradun

उत्तराखंड: राहुल गांधी के कार्यक्रम में छात्रों की गूंज में छात्र कम अधेड़ ज्यादा नजर आए

Dehradun Kanwar Yatra

हरिद्वार कांवड़ यात्रा: मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में समन्वय बैठक, लिए गए बड़े फैसले

Delhi Police Sonam Wangchuk Admitted in safdarjung

हाई कोर्ट के निर्देश के बाद दिल्ली पुलिस ने सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाकर सफदरजंग में किया भर्ती

Andy Burnham elected As UKs New PM

वामपंथी विचारधारा से सने एंडी बर्नहम बने लेबर पार्टी के नए लीडर, बनेंगे ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies