India-UAE relations: अपने 'दूसरे घर' यूएई में Modi ने गहराया दोस्ती और सहयोग का नाता, समझौतों से सुलझी आगे की राह
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India-UAE relations: अपने ‘दूसरे घर’ यूएई में Modi ने गहराया दोस्ती और सहयोग का नाता, समझौतों से सुलझी आगे की राह

यूएई-भारत समझौते उस व्यापक वैश्विक संदर्भ में हुए हैं जिसमें अमेरिका—इस्राएल और ईरान के बीच संघर्ष के कारण तेल की आपूर्ति संकट में है और कीमतें बढ़ी हैं। ऐसे में फुजेराह में भंडारण व एलएनजी आपूर्ति के समझौते भारत की रणनीतिक तैयारियों के लिये अहम हैं

Written byAlok GoswamiAlok Goswami
May 16, 2026, 12:32 pm IST
in विश्व, विश्लेषण
भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संयुक्त अरब अमीरात में दोस्ती और सहयोग की एक नई इबारत लिखी

भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संयुक्त अरब अमीरात में दोस्ती और सहयोग की एक नई इबारत लिखी

पांच देशों की यात्रा पर निकले भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने सबसे पहले पड़ाव संयुक्त अरब अमीरात में दोस्ती और सहयोग की एक नई इबारत लिखी है। इस संक्षिप्त दौरे में भारत—यूएई के बीच हुए अनेक समझौते तो हुए ही, शीर्ष नेताओं ने अपनी ‘बॉडी लैंग्वेज’ से व्यक्तिगत विश्वास और प्रेम का दर्शन भी कराया। इस अवसर पर मोदी ने अपने भाषण में यूएई को अपना ‘दूसरा घर’ बताते हुए राष्ट्रपति जायेद से अपने दोस्ताना संबंधों का भी उल्लेख किया।

प्रधानमंत्री मोदी की यह यूएई यात्रा अनेक मायनों में सार्थक​ रही। उनके इस लघु दौरे ने दोनों देशों के ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। अबू धाबी में कल यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायेद अल नाहयान द्वारा गर्मजोशी के साथ स्वागत किए जाने के बाद मोदी ने यूएई के नेतृत्व की तारीफ की और उस देश को अपना ‘दूसरा घर’ बताया। इस दौरे का समय विशेष रूप से संवेदनशील रहा, क्योंकि यूएई और ईरान के बीच तनाव के चलते क्षेत्र में सुरक्षा और ऊर्जा की स्थिति नाजुक बनी हुई है। मोदी ने यूएई पर ईरानी हमलों की कड़ी निंदा की और ऐसे वक्त में यूएई नेतृत्व के संयम और साहस की प्रशंसा की। मोदी ने वहां बसे भारतीय समुदाय के प्रति जायेद की सहानुभूति और उन्हें सुरक्षा देने के लिए आभार जताया।

अबू धाबी में कल यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायेद अल नाहयान द्वारा गर्मजोशी के साथ स्वागत किए जाने के बाद मोदी ने यूएई के नेतृत्व की तारीफ की

सुरक्षा व कूटनीति
अपने वक्तव्य में मोदी ने कहा कि ईरानी हमलों ने क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित किया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को मुक्त, खुला और सुरक्षित बनाए रखना सभी की प्राथमिकता होनी चाहिए। मोदी ने कहा कि भारत हमेशा संवाद और कूटनीति को प्राथमिकता देता है। उन्होंने साथ ही उन घटनाओं की भी निंदा कीं जिनमें यूएई को निशाना बनाया गया। यूएई नेतृत्व की तरफ से भी राष्ट्रीय एकता, सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता बनाए रखने के प्रयासों का स्वागत किया गया।

रणनीतिक व सुरक्षा सहयोग
दोनों देशों ने एक रणनीतिक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह साझेदारी रक्षा-औद्योगिक सहयोग, नवाचार व उन्नत प्रौद्योगिकी, प्रशिक्षण, संयुक्त अभ्यास, समुद्री सुरक्षा, साइबर रक्षा, सुरक्षित संचार और सूचना आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों में गहन सहयोग की रूपरेखा तय करती है। इससे दोनों देशों की सुरक्षा संस्थाओं के बीच सामरिक तालमेल और तकनीकी सहयोग बढ़कर संभावित खतरों का सामूहिक रूप से मुकाबला करने की क्षमता बढ़ेगी। यह समझौता क्षेत्रीय चुनौतियों, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और साइबर खतरों के बढ़ते चरित्र को ध्यान में रखकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ऊर्जा व ईंधन सुरक्षा
ऊर्जा साझेदारी इस दौरे का केंद्रीय मुद्दा रहने ही वाली थी। भारत और यूएई ने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (Strategic Petroleum Reserves) और तरल प्राकृतिक गैस (LNG) की आपूर्ति समेत ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े सहयोग पर समझौते किए। इनमें एक प्रमुख प्रावधान यह है कि फुजेराह में संभावित क्रूड ऑयल के भंडारण को भारतीय रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार का हिस्सा बनाया जा सकेगा। यह साझेदारी भारत की ऊर्जा आपूर्ति विविधकरण और रणनीतिक भंडार क्षमताओं को मजबूत करेगी, खासकर तब जब 90 प्रतिशत तेल आयात स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर आता है और क्षेत्रीय तनाव ईंधन की कीमतों व आपूर्ति पर असर डाल रहा है।

फुजेराह में भंडारण व एलएनजी आपूर्ति के समझौते भारत की रणनीतिक तैयारियों के लिये अहम हैं

शिपिंग व समुद्री सहयोग
समुद्री सुरक्षा और शिपिंग के क्षेत्र में भी दोनों देशों में समझौता हुआ, जिसके तहत समुद्री मार्गों की सुरक्षा, जहाजों की आवाजाही और समुद्री आधारभूत संरचना पर सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। यह कदम वैश्विक व्यापार-मार्गों की सुरक्षा के साथ-साथ ऊर्जा आपूर्ति शृंखलाओं को निर्बाध रखने के उद्देश्य से किया गया है। दोनों देशों ने बंदरगाहों, लॉजिस्टिक्स और शिपिंग नेटवर्क के माध्यम से आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने के संकेत मिले हैं।

आर्थिक निवेश व व्यापार
मोदी ने कहा कि यूएई भारत में आर्थिक निवेश करेगा, दोनों देशों के बीच आर्थिक रिश्तों को और गहरा करने के लिए यूएई 5 अरब डॉलर तक निवेश करेगा। यह निवेश ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और अन्य प्राथमिक क्षेत्रों में होगा। शेख मोहम्मद बिन जायेद ने भी ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और अन्य प्राथमिक क्षेत्रों में सहयोग को नई गति देने की बात कही है। निवेश समझौते और द्विपक्षीय व्यापार-निवेश योजनाएं भारत के विकास लक्ष्यों और यूएई की वैश्विक निवेश रणनीति, दोनों के अनुरूप हैं।

यूएई सरकार और शाही परिवार द्वारा भारतीय समुदाय के प्रति दिखाए गए सम्मान और समर्थन के लिए मोदी ने विशेष आभार व्यक्त किया (File Photo)

भारतीय समुदाय के प्रति समर्थन
यूएई में लगभग 40 लाख भारतीय काम करते हैं और रहते हैं। हाल के ईरानी ड्रोन व मिसाइल हमलों में फुजेराह में एक रिफाइनरी में आग लगी थी और तीन भारतीय कामगार घायल हुए थे। इस कठिन समय में यूएई सरकार और शाही परिवार द्वारा भारतीय समुदाय के प्रति दिखाए गए सम्मान और समर्थन के लिए मोदी ने विशेष आभार व्यक्त किया। दोनों नेताओं ने मानव-सम्बन्धी आयामों को भी महत्व दिया और भावनात्मक जुड़ाव के संकेत दिए, जिससे द्विपक्षीय कूटनीति में ‘सॉफ्ट पावर’ का महत्व स्पष्ट हुआ।

वैश्विक परिस्थिति व ऊर्जा संकट
वर्तमान यूएई—भारत समझौते उस व्यापक वैश्विक संदर्भ में हुए हैं जिसमें अमेरिका—इस्राएल और ईरान के बीच संघर्ष के कारण तेल की आपूर्ति संकट में है और कीमतें बढ़ी हैं। भारत जैसे बड़े आयातक देशों पर तो ऊर्जा संकट का असर अधिक गहराता दिख रहा है; हाल ही में भारत को ईंधन की कीमतें बढ़ानी पड़ी हैं। ऐसे में फुजेराह में भंडारण व एलएनजी आपूर्ति के समझौते भारत की रणनीतिक तैयारियों के लिये अहम हैं।

प्रधानमंत्री मोदी की यह यूएई यात्रा रणनीतिक साझेदारी, ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक निवेश के नए अध्याय खोल गई है। रक्षा, ऊर्जा, शिपिंग, साइबर व समुद्री सुरक्षा और निवेश, इन सभी क्षेत्रों में समझौते, बेशक, द्विपक्षीय रिश्तों को दीर्घकालिक आधार देंगे। साथ ही, संकट के समय में यूएई द्वारा भारतीयों के प्रति दिखाया गया समर्थन दोनों देशों के बीच भरोसे और सहयोग को और बढ़ा गया है। ये समझौते न सिर्फ द्विपक्षीय हितों को साधते हैं, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा की दृष्टि से भी एक महत्वपूर्ण संकेत हैं।

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Alok Goswami
Alok Goswami
A Delhi based journalist with over 25 years of experience, have traveled length & breadth  of the country and been on foreign assignments too. Areas of interest include Foreign Relations, Defense, Socio-Economic issues, Diaspora, Indian Social scenarios, besides reading and watching documentaries on travel, history, geopolitics, wildlife etc. [Read more]
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