उत्तराखंड: देवभूमि में 2 हजार से 5183 वक्फ संपत्तियां आखिर कैसे हो गईं, कोई जवाब नहीं दे रहा
August 2, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत उत्तराखंड

उत्तराखंड: देवभूमि में 2 हजार से 5183 वक्फ संपत्तियां आखिर कैसे हो गईं, कोई जवाब नहीं दे रहा

सरकारी जमीनों पर कब्जे कर बना दिए धार्मिक स्थल फिर उन्हें वक्फ में करवा दिया पंजीकृत।

Written byदिनेश मानसेरादिनेश मानसेरा
Dec 17, 2024, 10:52 am IST
in उत्तराखंड
Uttarakhand Mosque Waqf board

हरिद्वार: क्या कांग्रेस सरकार के शासनकाल में उत्तराखंड की डेमोग्राफी बदलने की पूरी योजना बनाई गई? क्या इसकी स्क्रिप्ट देवबंद और जमीयत दिल्ली मुख्यालय में लिखी गई? ऐसे कई सवाल उत्तराखंड में हो रहे जनसंख्या असंतुलन के साथ जुड़े थे है। प्रदेश में वक्फ संपत्तियां 2 हजार से बढ़कर 5183 हो गईं। सरकारी जमीनों पर मस्जिद, मजार बनाकर उसे वक्फ बोर्ड में करवा दिया रजिस्टर।

2015 के हरीश रावत सरकार के समय यहां मलिन बस्तियों को रेगुलाइज करने की तैयारी शुरू हुई थी 2016 में इसके लिए अध्यादेश लाया गया, इसी दौरान कांग्रेस सरकार चली गई और बीजेपी सरकार ने इसके नियमितीकरण पर रोक लगा दी। रोक लगाने के पीछे कारण कोई भी बताए गए हो। लेकिन सबसे बड़ा कारण यहां मलिन बस्तियों में राजनीतिक संरक्षण में बसाए गए बाहरी प्रदेशों के मुस्लिम वोटर थे जिनसे कांग्रेस को नहीं बीजेपी को हमेशा से खतरा रहा, क्योंकि ये वोट बीजेपी को नहीं पड़ते है। ये तो थी मलिन मस्तियों के वोट बैंक की बात।

अब वक्फ बोर्ड की संपत्तियों को लेकर बहस छिड़ी हुई है, कि आखिर राज्य बनने के दौरान से लेकर अब तक इनमें ढाई गुना की वृद्धि कैसे हो गई ? वक्फ का मतलब दान में दी गई संपत्ति से होता है, तो क्या वक्फ बोर्ड को ये संपत्तियां दान में मिली? मिली तो किसने दी? कैसे दी? किन हालात में दी ? इस सवाल का जवाब कोई नहीं दे रहा। संभवतः इस सवाल का जवाब शासन स्तर से वक्फ बोर्ड से पूछा ही नहीं गया होगा।

हाल ही में नैनीताल की मस्जिद को लेकर विवाद उठा जिसमें वक्फ बोर्ड से  जानकारी दी गई ये संपत्ति वक्फ बोर्ड में दर्ज है ? लेकिन, इसके क्षेत्रफल की जानकारी उसके पास नहीं है। अब संदेह यहीं से पैदा होता है कि वक्फ बोर्ड के पास पंजीकरण तो है, पंजीकरण से पूर्व इसके भू-संबंधी दस्तावेज किसी नाम थे? किसने दान में दी ? ये जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा रही है। इन सवालों का जवाब आर टी आई एक्टिविस्ट एडवोकेट नितिन कार्की भी मांग रहे हैं। मुस्लिम वोट बैंक के खेल में देवभूमि में संवेदनशील स्थानों पर रातों रात अवैध मजारें बना दी गई। मस्जिदें और मदरसे खड़े कर दिए गए। अब पुष्कर सिंह धामी सरकार ने अवैध मजारों, मस्जिदों और मदरसों पर शिकंजा कसा तो पता चला कि विशुद्ध रूप से सनातनियोंं के देवों की भूमि उत्तराखंड में 5000 से ज्यादा वक्फ बोर्ड की संपत्तियां घोषित कर दी गई।

इसे भी पढ़ें: ट्राई सर्विस अधिकारियों का 40 वर्ष पूरे होने पर देहरादून आईएमए में समारोह

यह सारा खेल हरीश रावत की कांग्रेस सरकार के समय हुआ इसलिए अब देवभूमि उत्तराखंड में डेमोग्राफी चेंज हो रही है, मुस्लिम आबादी के साथ वक्फ बोर्ड की संपत्तियों में भी अप्रत्याशित वृद्धि हो रही है। जो इस बात का सबूत है कि राज्य में बढ़ती मुस्लिम आबादी भविष्य में राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक समस्या पैदा करने जा रही है। वक्फ बोर्ड के आंकड़े बताते हैं कि उसके रिकार्ड में 5000 से ज्यादा वक्फ संपत्तियां दर्ज हैं। इनके अलावा भी सैकड़ों संपत्तियां ऐसी है जो रेलवे, वन विभाग, सिंचाई विभाग और राजस्व विभाग की जमीनों पर अवैध कब्जा कर बनाई हुई है लेकिन उनका उल्लेख वक्फ बोर्ड के रिकार्ड में अभी दर्ज नहीं हैं। लेकिन भविष्य में इन्हें भी वक्फ संपत्ति घोषित किया जा सकता है। इनमें मस्जिदें, मदरसें और मजारें शामिल है। उत्तराखंड में भाजपा सरकार के रहते भले ही वक्फ बोर्ड इन्हें रिकार्ड में दर्ज नहींकर पा रहा हो, लेकिन जिस दिन कांग्रेस की सरकार उत्तराखंड में होगी उस वक्त वक्फ संपत्तियोंंमें किस तेजी से वृद्धि होगी इसकी कल्पना 5000 वक्फ संपत्तियों के रिकार्ड को समझ कर की जा सकती है।

देवभूमि में वक्फ बोर्ड की संपत्तियां   

देवभूमि उत्तराखंड के वक्फ बोर्ड ने केंद्रीय वक्फ बोर्ड के सामने राज्य में 5183 संपत्तियों का ब्यौरा प्रस्तुत किया है, इसके अलावा 205 संपत्तियों के मामले स्थानीय न्यायालयों में विचाराधीन होने की बात कही जा रही है। यानी 21 वर्षों में वक्फ बोर्ड की सुंपत्तियां दोगुनी हो गई हैं क्योंकि जब 2003 में जब उत्तराखंड में नारायण दत्त तिवारी के नेतृत्व वाली कांग्रेस थी तब पहली बार उत्तराखंड वक्फ बोर्ड का गठन हुआ था। उस समय वक्फ बोर्ड के पास 2078 संपत्तियां थी। ये संपत्तियां भी यूपी वक्फ बोर्ड से उत्तराखंड वक्फ बोर्ड को विरासत में मिली थी। इनमें से 450 फाइल यूपी से उत्तराखंड पहुंची ही नहीं थी। उत्तराखंड वक्फ बोर्ड की संपत्ति सूची में मस्जिद से अधिक कब्रिस्तानों की संख्या है। पहाड़ी जिलों में चमोली में 1, रुद्रप्रयाग में 1 टिहरी में 4, पौड़ी में 10, उत्तरकाशी में 1 बागेश्वर में 3, चंपावत में 6, अल्मोड़ा में 6 पिथौरागढ़ में 3 मस्जिदें और इनसे ज्यादा कब्रिस्तान होने की जानकारी सामने आई है।

नैनीताल जिले में 48 मस्जिदें, ऊधमसिंह नगर में 144, हरिद्वार जिले में सबसे अधिक 322, देहरादून जिले में 155 मस्जिदें हैं, जो कि उत्तराखंड वक्फ बोर्ड में पंजीकृत की गई हैं। सुदूर पहाड़ी जिलों में भी वक्फ बोर्ड की औकाफ (दान में दी गई) संपत्तियों की जानकारी सामने आ रही है। उत्तराखंड में 2105 औकाफ संपत्तियां हैं, जिनमें अल्मोड़ा जिले में 46, पिथौरागढ़ जिले में 11, पौड़ी में 26, सबसे अधिक हरिद्वार में 865, ऊधमसिंह नगर में 499 और देहरादून में 435 संपत्तियों पर वक्फ बोर्ड का अपना दावा है। पूरे उत्तराखंड में 773 स्थानों पर कब्रिस्तान बना दिए गए हैं, जबकि 704 मस्जिदों को वक्फ बोर्ड के अधीन बताया गया है। उत्तराखंड में वक्फ बोर्ड की सूची से बाहर अभी इतनी ही और मस्जिदों के और होने की सूचनाएं सरकार के पास हैं।

वक्फ बोर्ड के रिकार्ड में 100 मदरसे   

उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के रिकार्ड में 100 मदरसे भी देवभूमि में चल रहे हैं। जबकि, मदरसा बोर्ड की सूची में चार सौ से ज्यादा मदरसे दर्ज हैं। राज्य के भीतर 201 से अधिक मजारें वक्फ बोर्ड में सूचीबद्ध  है। बताया जाता है कि अब मजारों में नमाज भी पढ़ाई जा रही है। जिन्हें धीरे-धीरे मस्जिद और फिर मदरसे का रूप ले लिया है। वक्फ बोर्ड की संपत्तियों में पूरे राज्य में 12 स्कूल और इतने ही मुसाफिरखाने पंजीकृत है, सूची में 1024 मकान और 1711 दुकानें भी हैं। 70 ईद गाह, 32 इमामबाड़े, 112 कृषि भूमि प्लाट और अन्य 253 संपत्तियां है। ऐसा माना जा रहा है कि वक्फ बोर्ड की कई संपत्तियों पर प्रभावशाली और भू माफिया का कब्जे है। उत्तराखंड वक्फ बोर्ड की स्थापना 2003 में हुई थी, तब वक्फ बोर्ड की संपत्तियों की संख्या 2078 के आसपास बताई गई थी। इनमें से 450 संपत्तियों की फाइलें यूपी से अभी तक उत्तराखंड वक्फ बोर्ड को नहीं दी है और ये विषय, एक विवाद के रूप में केंद्र सरकार तक पहुंचा हुआ है। ऐसा माना जा रहा है कि देवभूमि उत्तराखंड में पिछले 21 वर्षों में वक्फ बोर्ड की संपत्तियों की संख्या दो गुना से अधिक हो गई है। जो इस बात को प्रमाणित करता है कि देवभूमि उत्तराखंड में मुस्लिम आबादी में बेतहाशा वृद्धि हुई है।

इसे भी पढें: शौर्य गाथाओं के साथ मनाया गया विजय दिवस, सीएम बोले- बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर अत्याचार मानवता पर आघात

अभी ये आंकड़े ऐसे है जो कि वक्फ बोर्ड में दर्ज हैं। जबकि बड़ी संख्या में मुस्लिम धार्मिक स्थल, मदरसे अभी ऐसे भी हैं जो वक्फ बोर्ड में दर्ज नहीं हैं और वे सरकारी जमीनों को घेरकर या अवैध कब्जे कर बनाए गए हैं। वक्फ बोर्ड की संपत्तियों को लेकर भी संशय है कि क्या वो वास्तव में वक्फ बोर्ड की संपत्ति है, अथवा उत्तराखंड सरकार की संपत्ति है? बहरहाल देवभूमि उत्तराखंड में वक्फ संपत्तियों का तेजी से बढऩा चिंता का विषय है, राज्य में डेमोग्राफी चेंज को लेकर बहस छिड़ी हुई है। वक्फ संपत्तियों के बढ़ रहे आंकड़े भी इसी और संकेत दे रहे हैं कि देवभूमि उत्तराखंड के सांस्कृतिक देव स्वरूप के इस्लामीकरण की साजिश तो नहीं हो रही है?

सुदूर पहाड़ों में इस्लामिक षड्यंत्र

उत्तराखंड के कण-कण में देवों का वास है इसलिए इसे देवभूमि कहा जाता है। लेकिन, सुदूर पहाड़ी बस्तियों में क्या एक व्यापक षड्यंत्र के तहत इस्लामिक धार्मिक स्थलों का विस्तार किया जा रहा है? ऐसा इसलिए कहा जा रहा कि जिस तरह से वन विभाग के जंगल में सैकड़ों अवैध मजारे बनाई गई उसी तरह से क्या मस्जिदों का भी विस्तार हो रहा है? हाल ही में उत्तरकाशी मस्जिद को लेकर एक विवाद शुरू हुआ है। ऐसा कहा जा रहा है कि ये अवैध रूप से बनाई गई है। क्योंकि पहले ये घर था और मुस्लिम परिवार रहता था, लेकिन पिछले कुछ समय से यहां मुस्लिम लोग इकट्ठा होकर जुम्मे की नमाज पढऩे लगे और धीरे-धीरे इसे मस्जिद का रूप दे दिया गया। इस बारे में आरटीआई के जरिए मिली जानकारी के अनुसार, इस भूमि के दस्तावेजों में हेरा फेरी की गई है, इसलिए उत्तरकाशी में हिंदू संगठनों का आंदोलन हुआ और हालात बिगड़े।

उत्तराखंड राज्य बनने के बाद देवभूमि में बड़ी संख्या में मस्जिदें बनी है। इनमें से ज्यादातर सरकारी भूमि पर कब्जा कर बनाई गई है। देहरादून और हरिद्वार जिले में सौ से अधिक मुस्लिम धार्मिक स्थलों की संख्या ऐसी है, जिन्हें सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा कर इमारत को विस्तार दिया गया और फिर उसे वक्फ बोर्ड में पंजीकृत करवा दिया। देहरादून, सेलाकोई, रामपुर मंडी विकास नगर, हरबर्टपुर आदि कई क्षेत्रों में यदि मस्जिदों की भूमि के दस्तावेजों की जांच की जाए तो सच सामने आ जाएगा। कुछ ऐसे मामले भी हैं जो पहले सरकारी भूमि पर कब्जे कर मदरसे बने फिर उनमें नमाज होने लगी और बाद में ये मस्जिद का आकार लेने लगी। हल्द्वानी के बनभूलपुरा में अतिक्रमण हटाने को लेकर जो बवाल हुआ उसके पीछे भी फर्जी मदरसा था, जो मलिक के बगीचे में नजूल की जमीन पर कब्जा कर बनाया गया था। लेकिन उसे मस्जिद बता कर प्रचारित किया गया।

बहरहाल उत्तराखंड की पुष्कर धामी सरकार के सामने इस तरह के प्रकरण इसलिए भी सामने आ रहे है, क्योंकि उनका साफ कहना है कि वे उत्तराखंड के देव स्वरूप को किसी भी सूरत में बदलने नहीं देंगे।  सीएम धामी को लगातार खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट भी पहुंच रही है, कि राज्य में सरकारी भूमि पर अतिक्रमण करके डेमोग्राफी चेंज की जा रही है और यहां इस्लामिक धार्मिक स्थल बनाए जा रहे हैं। खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट में भी कहा गया है कि जब राज्य में वक्फ बोर्ड का गठन हुआ था तब उत्तर प्रदेश से 2078 संपत्तियां मिली थी जो अब बढ़कर 5183 हो चुकी हैं। ये इजाफा कैसे हुआ? इसका उत्तर खोजना बाकी है। क्योंकि उत्तराखंड में ही नहीं, बल्कि पूरे देश में वक्फ बोर्ड के पास असीमित अधिकार है। अभी तक वक्फ बोर्ड जिस भूमि पर अपका हक बता देता है वो उसकी हो जाती है। इसके खिलाफ वन विभाग, राजस्व विभाग और रेलवे जब तक आपत्ति करता है या अपनी भूमि खाली कराना चाहता है तब तक देर हो चुकी होती है।

 

Topics: Madrasamosquewaqf boardउत्तराखंड में वक्फ संपत्तियांwaqf properties in uttarakhandउत्तराखंडUttarakhandमस्जिदवक्फ बोर्डमदरसा
ShareTweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

प्रतीकात्मक तस्वीर

उत्तराखंड के जंगलों में क्यों बढ़ रही है इंसानों पर वन्यजीवों की दहशत? आंकड़े कर देंगे हैरान

प्रतीकात्मक तस्वीर

घर वापसी: ईसाई बने 47 लोगों ने अपनाया सनातन धर्म, चार दिन में 153 लोग अपने मूल धर्म में लौटे

आरोपी पुलिस की गिरफ्त में

मैं तुम्हें गोली मार दूंगा…’ धमकी का VIDEO हुआ वायरल, फिर पुलिस ने आरोपी सलिक को पहुंचाया जेल

उत्तरकाशी की सिलक्यारा टनल में फिर हादसा, कंक्रीट लाइनिंग का हिस्सा गिरने से श्रमिक की मौत

supreme court

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के मदरसा शिक्षकों को दिया बड़ा झटका, 350 से अधिक की याचिकाएं खारिज की

Weather Update: उत्तराखंड के 5 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, पहाड़ी क्षेत्रों में बिजली गिरने की चेतावनी

Load More

ताज़ा समाचार

Sheikh Hasina Press Conference Delhi

“5 अगस्त को पहली बार मीडिया के सामने आएंगी शेख हसीना”: दिल्ली में बांग्लादेश वापसी की रणनीति पर होंगे बड़े ऐलान!

Bangladesh Army New Cantonment Naikhongchhari Silkhali Base India Mizoram Border General Waker Uz Zaman Turkey Drone Panchjanya

भारत सीमा पर बांग्लादेश की बड़ी सैन्य घेराबंदी: नाइखोंगछारी में बना रहा छावनी, तैनात किए तुर्की से लिए हथियार!

British Museum 11th Century Maa Saraswati Vagdevi Idol Return Bhojshala Dhar Haryana Saraswati Board Panchjanya

लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम से भारत वापस आएगी 11वीं सदी की मां सरस्वती की प्रतिमा, भोजशाला से जुड़ा है इतिहास!

CM Pushkar Singh Dhami Mahendra Bhatt Dehradun Dayitvdhari Meeting Panchjanya

देहरादून में बोले CM धामी- ‘दायित्वधारी सरकार और जनता के बीच सेतु’, समस्याओं के समाधान में निभाएं सक्रिय भूमिका!

VHP International Joint General Secretary Dr Surendra Jain Jodhpur Press Conference Waqf Board Scam Panchjanya

“सीमांत अतिक्रमण हटाना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी”: VHP ने की राजस्थान वक्फ बोर्ड CEO को हटाने की मांग, जानिए कारण

Ratnagiri Silent March Gen Z Samvidhan Samman Manch Maruti Mandir Ambedkar Statue

सनातन और सेना के अपमान पर भड़का आक्रोश: रत्नागिरी में Gen Z युवाओं ने निकाली विशाल ‘राष्ट्र रक्षा मौन पदयात्रा’!

Dattatreya Hosabale RSS General Secretary NSE Mumbai Viksit Bharat Education Seminar Panchjanya

हम कोई फैक्ट्री नहीं, सभ्यता बना रहे हैं: मुंबई में सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने दिया विकसित भारत पर बड़ा संदेश

3 अगस्त का पंचांग

3 अगस्त का पंचांग: जानें ग्रह स्थिति, तिथि, नक्षत्र और शुभ समय

विचार के नाम पर खाली, होठों पर बस गाली

विश्व मैत्री दिवस का मायाजाल और श्री रामचरितमानस में निहित मित्रधर्म का सन्देश

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies