कट्टरपंथी बीएनपी का कहना है कि ‘अगरतला में उनके देश के उच्चायोग पर आक्रमण हुआ, उनके देश के झंडे की बेइज्जती हुई’। इन दोनों घटनाओं की आड़ में बीएनपी ने ढाका में उपद्रव किए और मजहबी उन्मादियों का उकसाते हुए ढाका से त्रिपुरा तक के मार्च के लिए भीड़ जुटाई।
बांग्लादेश में हाशिए पर धकेल दी गई पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की कट्टर मजहबी पार्टी बीएनपी में 5 अगस्त के बाद से नई जान आ गई है। उस इस्लामी देश में कट्टरपंथियों के बेलगाम होते जाने के साथ ही खालिदा अब बीएनपी को फिर से मुख्यधारा में लाने की कोशिश में आक्रामक बना रही हैं। त्रिपुरा में बांग्लादेश उच्चायोग में हुई तोड़फोड़ के बहाने अब इस पार्टी ने त्रिपुरा सीमा तक एक लॉन्ग मार्च शुरू किया है। इसका कुल उद्देश्य भारत के विरुद्ध नफरत को हवा देना और मीडिया का ध्यान खींचना है। भारत ने बांग्लादेश से सटी सीमा पर चौकसी बढ़ा दी है और हर शरारत का मुंहतोड़ जवाब देने की तैयारी की हुई है।
ढाका से 11 सितम्बर यानी कल शुरू किए गए अगरतला तक के इस मार्च से पूर्व बीएनपी के नेताओं ने मजहबी तत्वों को उकसाते हुए भारत विरोधी भाषण दिए जिनमें भारत के तीन राज्यों को हड़प लेने की धमकियां दी गईं। त्रिपुरा की घटना के बहाने भारत को ‘आक्रामक’ बताया गया और इसका ‘बदला लेने’ के आह्वान किए गए।

उल्लेखनीय है कि त्रिपुरा की राजधानी अगरतला स्थित बांग्लादेश के उच्चायोग पर बांग्लादेश में हिन्दू उत्पीड़न से गुस्साए कुछ प्रदर्शनकारियों ने हल्की—फुल्की तोड़फोड़ की थी। उसके बाद से भारत सरकार ने वहां सुरक्षा बढ़ा दी है। लेकिन इस घटना का बहाना लेकर खालिदा जिया की कट्टरपंथी पार्टी ने त्रिपुरा तक के लॉन्ग मार्च का फैसला करते हुए सीमा की ओर कूच किया है।
बीएनपी और उससे जुड़े छात्र संगठनों ने ढाका में नयापलटन स्थित बीएनपी मुख्यालय के सामने से यह मार्च शुरू किया। इधर भारत ने सीमाओं पर सुरक्षा एजेंसिया को सतर्क करते हुए सभी एहतियाती कदम उठाए हैं।
कट्टरपंथी बीएनपी का कहना है कि ‘अगरतला में उनके देश के उच्चायोग पर आक्रमण हुआ, उनके देश के झंडे की बेइज्जती हुई’। इन दोनों घटनाओं की आड़ में बीएनपी ने ढाका में उपद्रव किए और मजहबी उन्मादियों का उकसाते हुए ढाका से त्रिपुरा तक के मार्च के लिए भीड़ जुटाई।

इस मार्च का प्रतिकार करने और उन्मादियों को सीमा से दूर रखने के लिए भारत की सुरक्षा एजेंसियों ने पूरी तैयारी की हुई है। भारत नहीं चाहता कि सीमा पर कोई तनाव पैदा किया जाए। बीएनपी से जुड़े तत्व हिंसक प्रदर्शनों के लिए कुख्यात हैं। वैसे भी खालिदा जिया पूरी कोशिश में हैं कि अराजकता फैलाकर बांग्लादेश में खुद को देशभक्त पार्टी के तौर पर उभार सके।
अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की कट्टर विरोधी पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया को यूनुस सरकार तले अदालत ने न सिर्फ भ्रष्टाचार के सभी आरोपों से मुक्त कर दिया है बल्कि उनकी पार्टी के कट्टर मजहबी कार्यकर्ताओं को भी जेल से रिहा कर दिया है। बाहर आकर अब वे देश भर में हिन्दू विरोधी हिंसा मचाए हुए हैं, मंदिरों को तोड़ रहे हैं और शरिया राज लाने की कसमें खा रहे हैं।

















