क्या कांग्रेस द्वारा अनुच्छेद 370 की बहाली का समर्थन यह दर्शाता है कि वो संविधान विरोधी है ?
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क्या कांग्रेस द्वारा अनुच्छेद 370 की बहाली का समर्थन यह दर्शाता है कि वो संविधान विरोधी है ?

जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने अनुच्छेद 370 को बहाल करने का अनुरोध करते हुए 6 नवंबर, 2024 को प्रस्ताव पारित किया और कांग्रेस ने कार्रवाई का समर्थन किया, तो हमें समझ जाना चाहिए कि संविधान का विरोध कौन कर रहा है।

Written byडॉ. पंकज जगन्नाथ जयस्वालडॉ. पंकज जगन्नाथ जयस्वाल
Nov 9, 2024, 12:04 pm IST
in विश्लेषण
Congress Apposes 370 in jammu kashmir Assembaly

‘डीप स्टेट’ झूठे आख्यान फैलाकर केंद्र सरकार को अस्थिर करने का प्रयास कर रहा है, जिनमें से एक यह है कि संविधान खतरे में है। राहुल गांधी और इंडी गठबंधन विशेष रूप से चुनावी मौसम में इस तरह की झूठी धारणाओं का प्रसार कर रहे हैं। राहुल गांधी लगातार देश भर में घूम-घूम कर चेतावनी दे रहे हैं कि संविधान खतरे में है, मानो वे संविधान के सच्चे रक्षक हैं। आपातकाल घोषित करने से लेकर नियमित आधार पर संविधान में बदलाव करने और डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के संविधान के खिलाफ कानून बनाने तक, लोगों ने काँग्रेस की वास्तविक स्थिति को पहचान लिया है।

कांग्रेस की लंबे समय तक सत्ता में कई चीजें घटित हुईं। कौन संविधान और आरक्षण को बचाना चाहता है और कौन इसे नष्ट करना चाहता है? यदि जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने अनुच्छेद 370 को बहाल करने का अनुरोध करते हुए 6 नवंबर, 2024 को प्रस्ताव पारित किया और कांग्रेस ने कार्रवाई का समर्थन किया, तो हमें समझ जाना चाहिए कि संविधान का विरोध कौन कर रहा है।

अनुच्छेद 370 किस तरह संविधान विरोधी और आरक्षण विरोधी था

अनुच्छेद 370 के कारण जम्मू-कश्मीर में लोगों, खास तौर पर अनुसूचित जातियों और जनजातियों तथा महिलाओं के साथ बुरा व्यवहार हुआ और संविधान द्वारा गारंटीकृत आरक्षण और लाभों के अधिकार को खत्म कर दिया गया। सफाई कर्मचारियों के समूह को ‘वाटल’ जैसे अपमानजनक लेबल दिए गए, जिसका मतलब निम्न श्रेणी के कर्मचारी थे। साफ शब्दों में कहें तो राष्ट्रपति ने कांग्रेस शासित नेहरू प्रशासन के अनुरोध पर 1954 में जम्मू-कश्मीर के लिए डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के संविधान को पूरी तरह से कमजोर कर दिया।

भारतीय संविधान को कमजोर करके काँग्रेस ने अप्रत्यक्ष रूप से पाकिस्तानी दखलंदाजी को अनुमति दी। संविधान के कमजोर होने से एससी, एसटी, ओबीसी और महिलाएं सबसे ज्यादा प्रभावित हुईं। अनुच्छेद 370 ने जम्मू-कश्मीर में अलगाव और आतंकवाद को बढ़ावा दिया, जिससे 42,000 लोग मारे गए। 2019 में भाजपा सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बाद से क्या बदला है?

सबसे जरूरी बात यह है कि डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के संविधान को जम्मू-कश्मीर में पूरी तरह लागू किया गया; सभी को अन्य राज्यों के भारतीयों के समान अधिकार मिले और वंचित जातियों को सम्मान दिया गया। आरक्षण का अधिकार, वोट का अधिकार और बोलने का अधिकार समेत कई अधिकार दिए गए हैं। मोदी सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 को निरस्त करने से राज्य में 1993 के स्वीपर एक्ट सहित संविधान की सभी धाराएं लागू हो गईं। पिछले चार वर्षों में पहली बार जम्मू-कश्मीर में ओबीसी अल्पसंख्यक को मान्यता दी गई है। यह बहिष्कृत अल्पसंख्यकों के लिए एक महत्वपूर्ण जीत है, क्योंकि उन्होंने अपने संवैधानिक अधिकारों का प्रयोग करना शुरू कर दिया है।

370 के निरस्त होने से अब जम्मू-कश्मीर के समुदायों को देश के बाकी हिस्सों में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के समान प्रावधानों के अधिकार प्राप्त है। वन अधिकार अधिनियम, अत्याचार निवारण अधिनियम और वाल्मीकि समुदाय के जम्मू-कश्मीर में निवास के दावे को अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद लागू किया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने जम्मू-कश्मीर के स्थानीय निकायों में ओबीसी आरक्षण के लिए विधेयक को मंजूरी दे दी है। जम्मू-कश्मीर के इतिहास में पहली बार अनुसूचित जनजातियों के लिए 9 सीटें निर्धारित की गई हैं, साथ ही अनुसूचित जातियों के लिए अतिरिक्त सीटें आरक्षित की गई हैं।

वंचित आबादी पर अच्छे प्रभाव के अलावा, इस क्षेत्र में लैंगिक समानता की दिशा में प्रगति देखना उत्साहजनक है। पहले, अगर जम्मू और कश्मीर में कोई महिला किसी दूसरे राज्य के पुरुष से शादी करती थी, तो उसे राज्य में संपत्ति खरीदने से रोक दिया जाता था, जिससे महिलाओं के अधिकार और अपना जीवनसाथी चुनने की स्वतंत्रता सीमित हो जाती थी। अलगाववादी नेताओं के बच्चे आराम से रह रहे थे, वहीं अन्य लोगों को दहशतवाद के गंभीर प्रभावों का सामना करना पड़ा। अनुच्छेद 370 के निरस्त होने से इन ‘अन्य’ को सुरक्षा मिली है। 2016 से 2019 के बीच राज्य में पथराव की 5050 घटनाएं दर्ज की गईं अगस्त 2016 से अगस्त 2019 के बीच विरोध प्रदर्शनों और पत्थरबाजी की घटनाओं में 124 निर्दोष लोग मारे गए; निरस्तीकरण के बाद से चार वर्षों में ऐसी कोई मौत नहीं हुई है।

इसके अलावा, अनुच्छेद 370 के बाद के दौर में कानून और व्यवस्था की परिस्थितियों में नागरिकों की मौतों की संख्या आश्चर्यजनक रूप से शून्य हो गई। इसका मतलब यह है कि कोई भी उस शांति की प्रबल अनुभूति से इनकार नहीं कर सकता जो इस जगह पर व्याप्त है। इसलिए हम सभी को खुद से पूछना चाहिए कि क्या कांग्रेस और उसके सहयोगी संविधान के रक्षक हैं या हत्यारे। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में हुए घटनाक्रम से सभी भारतीयों की आंखें खुल जानी चाहिए। हमें उम्मीद है कि आप हर चुनाव में मतदान करते समय इस बात को ध्यान में रखेंगे।

Topics: अनुच्छेद 370Article 370बाबा साहब अंबेडकरCongressBaba Saheb AmbedkarConstitutionकांग्रेस ने 370 की बहाली की समर्थन कियाCongress supports restoration of 370कांग्रेसreservationआरक्षणसंविधान
डॉ. पंकज जगन्नाथ जयस्वाल
डॉ. पंकज जगन्नाथ जयस्वाल
डॉ पंकज जगन्नाथ जयस्वाल, शिक्षाविद्, लेखक और स्तंभकार हैं [Read more]
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