केरल उच्च न्यायालय ने नए आपराधिक कानूनों के हिंदी नामों को चुनौती देने वाली जनहित याचिका खारिज की
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होम भारत केरल

केरल उच्च न्यायालय ने नए आपराधिक कानूनों के हिंदी नामों को चुनौती देने वाली जनहित याचिका खारिज की

पीवी जीवेश ने भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) कानून के हिन्दू नामकरण को संविधान के अनुच्छेद 348 का उल्लंघन करार दिया।

Written byकुलदीप सिंहकुलदीप सिंह
Aug 19, 2024, 01:41 pm IST
inकेरल
Kerala High court BNS BNSS BSA

भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के हिन्दी नाम पर केरल के एक वकील ने केरल हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। लेकिन, हाई कोर्ट ने वकील को तगड़ा झटका देते हुए उनकी जनहित याचिका को खारिज कर दिया था।

इसे भी पढ़ें: उत्तराखंड: ISBT में बस में नाबालिग लड़की से गैंगरेप, 5 लोग जेल भेजे गए, POCSO समेत नए कानूनों में मामला दर्ज

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, पीवी जीवेश नाम के वकील द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई केरल के मुख्य कार्यवाहक चीफ जस्टिस ए मुहम्मद मुस्ताक और जस्टिस एस मनु की खंडपीठ ने की। पीवी जीवेश ने भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) कानून के हिन्दू नामकरण को संविधान के अनुच्छेद 348 का उल्लंघन करार दिया। याचिका में दावा किया गया है कि कानूनों के सभी पाठ अंग्रेजी में होने चाहिए।

इसे भी पढ़ें: उत्तराखंड: राज्य आंदोलनकारियों के लिए सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत आरक्षण, राज्यपाल ने दी मंजूरी

इसमें इस बात का भी तर्क दिया गया है कि हिन्दी नाम गैर हिन्दी भाषी क्षेत्रों में वकीलों और नागरिकों के लिए भ्रम और कठिनाई पैदा करेंगे। पीवी जीवेश का कहना है कि ऐसा करना संविधान के अनुच्छेद 19(1)(जी) के अंतर्गत उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। याचिकाकर्ता ने कानूनों के हिन्दी नामकरण को भाषाई साम्राज्यवाद के समान है और ऐसा करना देश की भाषाई विविधता का उल्लंघन करता है।

इसे भी पढ़ें: Kolkata Rape case: सिर, गाल, होंठ और प्राइवेट पार्ट समेत 14 हिस्सों पर चोट के निशान, पोस्टमार्टम से दरिंदगी का खुलासा

पिछले माह कोर्ट ने इस मामले पर विचार किया था कि क्या उसके पास संसद द्वारा पारित कानूनों का नाम अंग्रेजी में बदलने का निर्देश देने का अधिकार है। कोर्ट ने नामों के कारण होने वाले भ्रम को भी स्वीकार किया। हालांकि, अब केरल हाई कोर्ट ने वकील की याचिका को खारिज कर दिया है।

Topics: bnsबीएनएसएसबीएसएकानूनों का हिन्दी नामकरणBNSSBSAHindi naming of lawskerala high courtकेरल हाई कोर्टबीएनएस
कुलदीप सिंह
कुलदीप सिंह
नागपुर स्थित राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विद्यापीठ (नागपुर यूनिवर्सिटी) से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट। बीते एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष रुचि। पत्रकारिता की इस यात्रा की शुरुआत नागपुर नवभारत में इंटर्नशिप से शुरू होती है, तदोपरांत GTPL न्यूज चैनल, लोकमत समाचार, ग्रामसभा मेल, मोबाइल न्यूज 24 और Way2News हैदराबाद के बाद अब पाञ्चजन्य के साथ सफर जारी है। [Read more]
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